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प्रतिबंध लगाने के लिए 8 सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादों की सूची जारी कर सकती है सरकार

8 महीने पहले
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यूटिलिटी डेस्क. सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर बैन लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार 8 उत्पादों को सूचीबद्ध कर इन्हे बंद कर सकते है। इसमें प्लास्टिक कटलेरी, प्लास्टिक बैग और कुछ स्टायरोफोम आइटम भी शामिल हैं। इससे पहले तक यह कयास लगाए जा रहे थे कि 2 अक्टूबर से सिंगल यूज प्लास्टिक को बैन किया जाएगा, लेकिन बाद में सरकार ने स्पष्ट किया था कि फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है। इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखकर सिंगल यूज प्लास्टिक की परिभाषा तय करने और इन्हें सिलसिलेवार तरीके से बैन करने को लेकर दिशा-निर्देश देने को कहा था।

राज्यों को दिए थे प्लास्टिक कचरा उत्पादन कम करने के निर्देश
मंत्रालय ने सितंबर में राज्यों को पत्र लिखकर प्लास्टिक बैग, स्टायरोफोम कटलेरी का उत्पादन बंद करने को कहा था। मंत्रालय ने राज्यों से कहा था कि कचरे को सोर्स पर ही अलग-अलग करें, उन्हें कलेक्ट करें और ट्रांसपोर्टेशन के लिए लोकल बॉडीज को सपोर्ट करें। साथ ही प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करने वाली एंटिटीज को कहा जाए कि वे उसे वापस लें।

महाराष्ट्र सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर लगाया बैन
महाराष्ट्र सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाने की दिशा में कदम उठाते हुए एक नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके अनुसार प्लास्टिक या थर्माकोल से बने कप, प्लास्टिक शॉपिंग बेग, पेट प्लास्टिक बॉटल (200 ml तक) और स्ट्रॉ के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा पानी के पाउच को भी बैन किया गया है। यह नोटिफिकेशन महाराष्ट्र के पर्यावरण विभाग, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और ठाणे कॉरपोरेशन द्वारा जारी किया गया है। 

भारतीय जहाजों पर सिंगल यूज प्लास्टिक 1 जनवरी प्रतिबंधित
भारतीय जहाजों पर नए साल यानि की 1 जनवरी से सिंगल यूज प्लास्टिक नहीं ले जा सकेंगे। प्रतिबंधित प्लास्टिक उत्पादों में थैले, ट्रे, कंटेनर, खाद्य पदार्थ पैक करने वाली फिल्म, दूध की बोतलें, फ्रीजर बैग, शैम्पू बोतल, पानी एवं अन्य पेय पदार्थों की बोतल, साफ-सफाई के द्रव्यों का छिड़काव करने वाले कंटेनर और बिस्किट के ट्रे आदि भी शामिल हैं।

सिंगल यूज प्लास्टिक क्या होता है?
प्लास्टिक की बनी ऐसी चीजें, जिनका हम सिर्फ एक ही बार इस्तेमाल कर सकते हैं या इस्तेमाल कर फेंक देते हैं और जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, वह सिंगल यूज प्लास्टिक कहलाता है। इसका इस्तेमाल चिप्स पैकेट की पैकेजिंग, बोतल, स्ट्रॉ, थर्मोकॉल प्लेट और गिलास बनाने में किया जाता है।

देश में सालाना कितनी खपत?
मिनिस्ट्री ऑफ अर्बन एंड हाउसिंग अफेयर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 1996 में 61 हजार टन प्लास्टिक की सालाना खपत होती थी। यह 2017 में बढ़कर 1.78 करोड़ टन पहुंच गई। गैर-सरकारी संगठन इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (आईपीसीए) के डायरेक्टर आशीष जैन बताते हैं कि देश में जितनी प्लास्टिक की खपत होती है, उसमें सिंगल यूज प्लास्टिक का सिर्फ 4% से 5% हिस्सा ही है, लेकिन इसका वजन हल्का होने की वजह से हमें ये चारों तरफ दिखाई देता है। प्लास्टिक का इस्तेमाल कई जगह होता है। जैसे- टीवी, रिमोट, एसी, रेफ्रिजरेटर, कार, फर्नीचर आदि। चूंकि सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल हम रोज करते हैं, इसलिए इसकी चर्चा ज्यादा होती है और पर्यावरण को ज्यादा नुकसान होता है।

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