सख्ती / फोन कनेक्शन या बैंक खाते के लिए जबरदस्ती आधार नंबर मांगने पर लगेगा जुर्माना



aadhaar amendment bill- ets cabinet nod to be introduced in coming parliament session beginning in june
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aadhaar amendment bill- ets cabinet nod to be introduced in coming parliament session beginning in june

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2019, 03:54 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. मंत्रिमंडल ने बैंक खाता खोलने तथा मोबाइल फोन कनेक्शन लेने के लिये आधार के स्वैच्छिक उपयोग की अनुमति देने को लेकर बुधवार को एक संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। इस संशोधन के बाद किसी अन्य कानून की बाध्यता नहीं होने पर व्‍यक्ति को अपनी पहचान साबित करने के लिये आधार देने के लिए बाध्‍य नहीं किया जा सकेगा। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में ‘आधार तथा अन्य कानूनों में (संशोधन) के विधेयक, 2019’ को मंजूरी दी गयी। इसमें नियमों के उल्लंघन पर कड़ा जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।

इस नियम से जुड़ी खास बातें...

  1. इस संशोधन विधेयक को संसद के 17 जून से शुरू सत्र में पेश किया जाएगा

    यह विधेयक आधार कानून 2016 तथा अन्य कानून में संशोधन के रूप में होगा और मार्च 2019 में जारी अध्यादेश का स्थान लेगा। इस संशोधन विधेयक को संसद के 17 जून से शुरू सत्र में पेश किया जाएगा।

     

    - संशोधन में आधार कानून के प्रावधानों के उल्लंघन करने पर एक करोड़ रुपये तक का दिवानी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव किया गया है। अगर लगातार नियमों का अनुपालन नहीं किया जाता है तो प्रतिदिन 10 लाख रुपए तक के अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा।

     

    - आधार मांगने पर या भौतिक रूप से सत्यापन के मामले में आधार का अनाधिकृत उपयोग अपराध है। इसके लिए 10,000 रुपए तक के जुर्माने के साथ 3 साल तक की जेलहो सकती है।

     

    - कंपनी के मामले में यह र्जुमाना 1 लाख रुपये तक है। अनाधिकृत तरीके से सेंट्रल आइडेन्टिटीज डोटा रिपोजिटीरी’ तक पहुंच के साथ डाटा से छोड़छाड़ के लिये मौजूदा तीन साल से 10-10 साल की सजा का प्रावधान है।


    - आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘इस निर्णय से यूआईडीएआई (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) लोगों के हितों के अनुरूप एक मजबूत प्रणाली बनाने में सक्षम होगा और इससे आधार के दुरुपयोग को कम करने में सहायता मिलेगी।

     

    - इस संशोधन के बाद यदि संसद द्वारा पारित किसी कानून की बाध्‍यता न हो तो किसी व्‍यक्ति को अपनी पहचान साबित करने हेतु आधार नम्‍बर प्रस्‍तुत करने के लिए बाध्‍य नहीं किया जा सकेगा।

     

    - इसमें कहा गया है, ‘‘प्रस्‍तावित संशोधन लोगों की सुविधा के लिये बैंक खाते खुलवाने में आधार के उपयोग को मान्‍यता देता है परंतु बैंक को आधार नम्‍बर देना स्‍वैच्छिक होगा।

     

    - टे‍लीग्राफ अधिनियम, 1885 तथा धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के त‍हत बैंक इसे केवाईसी दस्‍तावेज के रूप में स्‍वीकार कर सकते हैं।

     

    - इसका मतलब है कि इसमें बैंक खाता खोलने तथा मोबाइल फोन कनेक्शन लेने के लिये सत्यापन और पहचान पत्र के रूप में आधार के स्वैच्छिक उपयोग की अनुमति होगी।

  2. केवल संस्‍थानों को सत्‍यापन करने की अनुमति दी गयी है

    विज्ञप्ति के अनुसार नए नियम के बाद आधार, लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक और उपयोगी होगा। प्रस्‍तावित संशोधन राष्‍ट्रपति द्वारा 2 मार्च, 2019 को घोषित अध्‍यादेश के प्रावधानों के अनुरूप है।

     

    - प्रस्तावित बदलाव के तहत व्‍यक्ति अपने हिसाब से आधार नम्‍बर का उपयोग कर सकता है। विज्ञप्ति के अनुसार इसमें केवल संस्‍थानों को सत्‍यापन करने की अनुमति दी गयी है लेकिन संस्थानों को इसको लेकर निजता का पूरा खयाल रखना होगा।

     

    - संशोधन विधेयक में निजी संस्‍थानों द्वारा आधार के उपयोग से संबंधित आधार अधिनियम की धारा 57 को हटाने का प्रस्‍ताव है। यदि आधार नम्‍बर का सत्‍यापन नहीं हो पाता है तो ऐसी स्थिति में भी किसी व्‍यक्ति को सेवा से वंचित नहीं किया जा सकता।

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