मध्य प्रदेश / रैगिंग की शिकायत मिली तो तीन साल तक वहीं भी नहीं मिलेगा एडमिशन



admissions will not be get in any college for 3 years after receiving complaint of ragging
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admissions will not be get in any college for 3 years after receiving complaint of ragging

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2019, 12:49 PM IST

यूटिलिटी डेस्क, हरेकृष्ण दुबोलिया. मध्य प्रदेश के उच्च शैक्षणिक संस्थानों में साल दर साल बढ़ रही रैगिंग की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य विधि आयोग की सिफारिश पर सरकार ने प्रिवेंशन ऑफ रैगिंग एक्ट बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। आयोग ने सरकार को एंटी रैगिंग कानून का पूरा ड्राफ्ट बनाकर दे दिया है। जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में यह विधेयक लाया जा सकता है।

आरोपी स्टूडेंट को देश के किसी भी संस्थान में प्रवेश नहीं मिलेगा

  1. इसमें रहेंगे सख्त प्रावधान

    इसमें सख्त प्रावधान यह किया गया है कि रैगिंग की शिकायत मिलते ही आरोपी छात्र को कॉलेज से तुरंत निष्कासित और प्रारंभिक जांच में ही शिकायत सही पाने जाने पर छात्र को संस्थान से बर्खास्त कर दिया जाएगा।

     

    - इसके बाद अगले तीन साल तक आरोपी छात्र को देश के किसी भी संस्थान में प्रवेश नहीं मिल सकेगा। ‘मप्र प्रोहिबिटेशन ऑफ रैगिंग एक्ट 2019’ का ड्राफ्ट विधि आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड हाईकोर्ट जस्टिस वेदप्रकाश ने तैयार किया है।

     

    - प्रस्तावित कानून की सख्त जरूरत को लेकर आयोग ने ‘प्रीवेंशन ऑफ रैगिंग इन एजुकेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मध्यप्रदेश’ नाम से एक डिटेल रिपोर्ट विधि विभाग के माध्यम से उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और गृह विभाग को भी भेजी है।

     

    - विधि विभाग के प्रमुख सचिव सतेंद्र कुमार सिंह के मुताबिक 31 मई 2019 को सौंपी गई इस रिपोर्ट में सरकार से जनहित और प्रदेशहित में आगामी शैक्षणिक सत्र से पहले कानून बनाने पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।


    - जस्टिस वेदप्रकाश ने अपनी रिपोर्ट में रैगिंग कानून के प्रस्ताव का आधार सुप्रीम कोर्ट के यूनिवर्सिटी ऑफ केरल बनाम काउंसिल ऑफ प्रिंसिपल्स ऑफ कॉलेज इन केरला एंड अदर्स मामले में 2009 में दिए फैसले और मई 2007 की राघवन कमेटी की एंटी रैगिंग से जुड़ी रिपोर्ट को आधार बनाया है।

     

    - इसके अलावा आयोग ने बीते 10 साल में देशभर में हुई रैगिंग की 211 घटनाओं की मीडिया रिपोर्ट के आधार पर विश्लेषण कर यह निष्कर्षनिकाला है कि यह गंभीर अपराध है, जिसे बिना सख्त कानून खत्म नहीं किया जा सकता।

  2. प्रस्तावित कानून के प्रावधान

    एफआईआर के बाद गिरफ्तारी होगी और जमानत सिर्फ कोर्ट से ही हो सकेगी।


    - शिकायत के तत्काल बाद आरोपी का कॉलेज से निष्कासन और प्रारंभिक रिपोर्ट में दोषी मिलते ही बर्खास्तगी हो जाएगी।


    - पुलिस अन्य अपराधों की तरह ही ऐसे केसों में अदालत में चार्जशीट दायर करेगी।


    - कोर्ट से दोष सिद्ध होने पर आरोपी को 3 साल के लिए देश के किसी भी शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश का अपात्र घोषित कर दिया जाएगा।

  3. रैगिंग को एंजॉय करते हैं स्टूडेंट्स

    रैगिंग करने वाले स्टूडेंट्स अच्छे बैकग्राउंड से आते हैं और काफी इंटेलिजेंट होते हैं। वे रैगिंग जैसे अपराध को एंजॉय करते हैं। यह प्रवृत्ति इसलिए भी ज्यादा बढ़ रही है, क्योंकि सख्त कानून का अभाव है और हमारे यहां के स्टूडेंट्स में टॉलरेंस लेबल काफी ज्यादा है। अन्याय और सहनशीलता जब जरूरत से अधिक होती है, तब अपराध बढ़ता है और यह काबू तभी होता है, जब सख्त कानून के साथ स्टूडेंट्स इसे टालरेंट करना बंद कर देते हैं।
    - जस्टिस वेदप्रकाश, अध्यक्ष, राज्य विधि आयोग

  4. उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा रैगिंग के मामले मध्य प्रदेश में

    बीते पांच साल का रिकॉर्ड देखा जाए तो मध्यप्रदेश रैगिंग के मामलों में लगातार देश में दूसरे या तीसरे स्थान पर बना हुआ है। बीते 5 साल का ट्रेंड यह बताता है कि मप्र में रैगिंग के केस लगातार बढ़ रहे हैं। यदि 10 साल का ट्रेंड देखा जाए तो रैगिंग की घटनाओं की संख्या मौजूदा दशक में तीन गुना बढ़ गई है।

  5. इसके लिए दूसरे राज्यों के छात्र जिम्मेदार

    सरकार जल्द ही आयोग की विधिक सिफारिशों के आधार पर नया कानून लाएगी, लेकिन जहां तक मैं समझता हूं, मप्र में होने वाली रैगिंग की ज्यादातर घटनाओं में दूसरे राज्यों के विद्यार्थी शामिल पाए जाते हैं। मप्र शांतिप्रिय लोगों का प्रदेशहै। बाहरी छात्रों की संगत के कारण हमारे यहां के बच्चे भी कुछ हद तक गलत बातों में पड़ जाते हैं। 
    - पीसी शर्मा, विधि-विधायी एवं जनसंपर्क मंत्री

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