अमरनाथ यात्रा / पहली बार यात्रियों को मिलेगी बारकोड स्लिप, वाहनों में लगाए जाएंगे रेडियो टैग



amarnath yatra going to more safe by hightech barcode slips for yatri
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amarnath yatra going to more safe by hightech barcode slips for yatri

  • यात्रा की शुरुआत 1 जुलाई से होगी जो 46 दिन चलेगी और 15 अगस्त को खत्म होगी।
  • भीड़ कम रखने के लिए रोज सिर्फ 7500 यात्री गुफा के लिए रवाना होंगे।

Dainik Bhaskar

Jun 25, 2019, 02:41 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. अमरनाथ की पवित्र यात्रा 1 जुलाई से शुरू हो रही है। इस बार यह 46 दिन यानी 15 अगस्त तक चलेगी। पुलवामा हमले के बाद हो रही इस यात्रा की सुरक्षा के लिए सेना और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने अब तक के सबसे कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। यात्रा आसान और शांतिपूर्ण हो, इसके लिए टेक्नोलॉजी की भी मदद ली जा रही है। यात्रा मार्गों की 24 घंटे निगरानी के लिए आईपी आधारित हाई रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनसे कंट्रोल रूम को काफिलों और यात्रियों की रियल टाइम फुटेज मिलेगी। साथ ही सुरक्षा बलों के बीच समन्वय में भी आसानी होगी। यात्रियों की पहचान और लोकेशन जानने के लिए पहली बार उनकी यात्रा स्लिप में बारकोड होगा। इस स्लिप में यात्रियों की पूरी जानकारी होगी, जैसे वे कहां से आए हैं, उनका मोबाइल नंबर क्या है आदि। 

यात्रा से जुड़ी खास बातें...

  1. गाड़ियों पर लगाए जाएंगे रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग

    पिछली बार की तरह इस बार भी यात्रियों की गाड़ी में रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग (आरआईएफडी) लगाए जाएंगे, ताकि उन्हें ट्रैक किया जा सके। श्रद्धालुओं के ये वाहन जम्मू से बेस कैंप तक अर्द्धसैनिक बल के काफिले के साथ ही जाएंगे।

     

    - इस साल हाई रिजॉल्यूशन कैमरों से लैस ड्रोन से भी यात्रा मार्ग की निगरानी की जाएगी। भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए रोजाना सिर्फ 7500 यात्री ही गुफा के लिए रवाना किए जाएंगे। उनकी सुरक्षा के लिए इस साल 30 हजार से ज्यादा अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए हैं। पूरी यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था तीन लेयर की बनाई गई है।

     

    - सीआरपीएफ के श्रीनगर सेक्टर के आईजी रविदीप साही ने बताया कि सुरक्षा बलों की 300 कंपनियां (एक कंपनी में 80-100 जवान) तैनात की गई हैं, ताकि वे पुलिस, अर्द्धसैनिक बल और सेना के जवानों की मदद कर सकें। पहली लेयर में सीआरपीएफ, दूसरी में राज्य पुलिस और आखिरी लेयर सेना की होगी। 

  2. बंदोबस्त: 11 माउंटेन रेस्क्यू और 12 एवलाॅन्च रेस्क्यू टीमें मदद करेंगी

    यात्रा मार्ग पर कुछ जगहों पर फायर फाइटिंग टीम, एक्सरे बैगेज स्कैनिंग यूनिट्स भी तैनात की गई हैं। नीलगढ़, पांजतारनी और पहलगाम में हेलीपैड बनाए गए हैं। रास्ते में बारकोड प्वाइंट्स और टेलीकम्युनिकेशन की भी व्यवस्था की गई है।

     

    - श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उमंग नरूला ने बताया कि 27 रेस्क्यूटीम भी तैनात रहेंगी। पुलिस की 11 माउंटेन रेस्क्यूटीम महिलाओं और बीमार यात्रियों की मुश्किल में मदद करेंगी। 12 एवलॉन्च रेस्क्यूटीम भी तैनात की जाएंगी।
     

  3. रूट: 3888 मीटर ऊंचाई तक जाने को 14 और 46 किमी के दो रास्ते 

    कश्मीर घाटी में 3888 मीटर ऊंचाई पर स्थित बाबा अमरनाथ की पवित्र गुफा तक पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं। पहला रास्ता पहलगाम से गुफा तक 46 किमी लंबा है। यह इस तीर्थयात्रा का ऐतिहासिक रास्ता है।

     

    - इसे तय करने में करीब 3 से 4 दिन लगते हैं। नया रास्ता बालटाल से अमरनाथ गुफा तक जाता है। यह 14 किमी लंबा है। इससे गुफा तक पहुंचने में बस एक दिन लगता है। आजकल ज्यादातर यात्री इसी का इस्तेमाल करते हैं। 

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