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एनबीएफसी के जरिए बैंक कृषि क्षेत्र को 10 लाख और एमएसएमई को 20 लाख तक का लोन दे सकेंगे

एक वर्ष पहले
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यूटिलिटी डेस्क. रिजर्व बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर बने वित्तीय दबाव को कम करने और बिजनेस में तेजी लाने के उद्देश्य से बैंकों को एनबीएफसी के माध्यम से प्राथमिक क्षेत्रों को ऋण देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही आरबीआई ने कई क्षेत्रों को प्राथमिक क्षेत्र में शामिल किया है। इस तरह के लोन के लिए कृषि क्षेत्र में इस सीमा को 10 लाख रुपए और सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों (एमएसएमई) के लिए 20 लाख रुपए रखा गया है। आवास क्षेत्र के लिए यह व्यवस्था पहले से थी जिसे 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए किया गया है।
 
मौद्रिक समीक्षा बैठक के बाद जारी बयान में आरबीआई ने कहा कि प्राथमिक क्षेत्रों के लिए कर्ज की मांग में इजाफा करने से निर्यात बढ़ाने और रोजगार पैदा करने में मदद मिलेगी। आरबीआई ने कहा कि एक अप्रैल 2019 से बड़े एनबीएफसी में निवेश को बैंकों की टियर-1 पूंजी के 15 प्रतिशत पर सीमित किया गया था जिसे अब बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में कोई बैंक अपनी टीयर-1 पूंजी का अधिकतम 15 प्रतिशत एक ही एनबीएफसी को दे सकता है। 

1) प्राथमिक क्षेत्र में किसान, छोटे उद्यमी एवं छोटे मकान खरीदार शामिल

उसने कहा कि बैंकों को पंजीकृत एनबीएफसी के माध्यम से 10 लाख रुपए के कृषि ऋण, छोटे उद्यमियों को 20 लाख रुपए तक के ऋण और प्रति ग्राहक 20 लाख रुपये तक के आवास ऋण को प्राथमिक क्षेत्र में शामिल किया गया है।

  • अब तक 10 लाख रुपए तक के आवास ऋण इस श्रेणी में शामिल था। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश चालू महीने के अंत तक जारी किये जायेंगे।
  • केन्द्रीय बैंक ने कहा कि एक अप्रैल 2019 से बड़े एनबीएफसी में निवेश को बैंकों की टियर-1 पूंजी के 15 प्रतिशत पर सीमित किया गया था जिसे अब बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है।

वहीं अर्थव्यवस्था पर दबाव कम करने के उद्देश्य से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की तरलता और ऋण उठाव बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को कई उपायों की घोषणा की।

  • केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बुधवार को समाप्त तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक में ये फैसले किये गये। बैठक के बाद विकास एवं विनियमन पर जारी बयान में कहा गया है कि किसी एक ही एनबीएफसी को बैंकों द्वारा दिये जाने वाले ऋण की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
  • वर्तमान में कोई बैंक अपनी टीयर-1 पूँजी का अधिकतम 15 प्रतिशत एक ही एनबीएफसी को दे सकता है। एनबीएफसी के अलावा अन्य क्षेत्रों की एक ही कंपनी के लिए यह सीमा 20 प्रतिशत है जिसे विशेष परिस्थितियों में बैंक के बोर्ड की सहमति से 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। एनबीएफसी के लिए अभी अब इस सीमा को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का फैसला किया गया है।

इसके अलावा वाणिज्यिक बैंक प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए एनबीएफसी के माध्यम से भी ऋण दे सकेंगे। कृषि क्षेत्र के लिए इस तरह के ऋण की सीमा 10 लाख रुपये और सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए 20 लाख रुपए रखी गयी है।

  • आवास क्षेत्र के लिए यह व्यवस्था पहले से थी जिसकी सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए की गयी है। बयान में कहा गया है कि निर्यात एवं रोजगार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने और प्राथमिकता वाले चुनिंदा क्षेत्रों के लिए ज्यादा ऋण उपलब्ध कराने के लिए एनबीएफसी की भूमिका को स्वीकारते हुये यह कदम उठाया गया है।
  • आरबीआई ने क्रेडिट कार्ड के ऋण को छोड़कर एनबीएफसी द्वारा दिये गये अन्य उपभोक्ता ऋणों का जोखिम भारांक 125 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया है। इससे भी एनबीएफसी का बैलेंस शीट सुधारने में मदद मिलेगी। इनके उपायों के बारे में दिशा-निर्देश अगस्त के अंत तक जारी किये जायेंगे।
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