राहत / पार्टनरशिप में कॉलोनी काटने पर अधूरा प्रोजेक्ट नहीं छोड़ पाएंगे कॉलोनाइजर्स



Colonizers will not be able to leave an incomplete project after to start a colony project in partnership
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Colonizers will not be able to leave an incomplete project after to start a colony project in partnership

  • राज्य सरकार प्रदेश में कॉलोनी काटने वाले 21 साल पुराने नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। 
  • इसी माह लागू होने वाले नियमों से कॉलोनाइजर्स तथा प्लॉट/फ्लैट खरीदने वालों को भी फायदा होगा।

Dainik Bhaskar

Sep 04, 2019, 11:23 AM IST

रियल एस्टेट डेस्क/ मध्य प्रदेश. राज्य सरकार प्रदेश में कॉलोनी काटने वाले 21 साल पुराने नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब साझेदारी फर्म में कॉलोनी काटने के बाद कॉलोनाइजर्स अधूरे प्रोजेक्ट में जमीन मालिक या किसानों को छोड़कर नहीं जा सकेंगे। इन्हें विकास मंजूरी से प्रोजेक्ट पूरा होने तक साझेदारी का शपथ-पत्र देना होगा। इसका फायदा प्लाट व फ्लैट खरीदने वालों को मिलेगा, क्योंकि विकास के काम अधूरे नहीं रहेंगे। वहीं विकास अनुज्ञा अब 90 दिन के बजाय केवल 45 दिनों में ऑनलाइन मिलेगी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने (कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्बन्धन तथा शर्तें) नियम 1998 में बदलाव का मसौदा तैयार कर लिया है। इसी माह लागू होने वाले नियमों से कॉलोनाइजर्स तथा प्लॉट/फ्लैट खरीदने वालों को भी फायदा होगा।


नियमों में ये अहम बदलाव होंगे 

  • कॉलोनाइजर की परिभाषा से हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरण बाहर होंगे। 
  • कॉलोनी काटने वाले खुले क्षेत्र में विकास के मापदंड तय करेंगे। 
  • भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर (10 लाख से ज्यादा जनसंख्या) में परमिशन के लिए ढाई लाख रुपए प्रति हेक्टेयर देना होगा, जबकि छोटे शहरों में एक लाख रुपए प्रति हेक्टेयर शुल्क लगेगा। 5 लाख से कम जनसंख्या वाले निकाय में 35 हजार रुपए शुल्क होगा। अभी प्रदेशभर में यह शुल्क एक सामान है। 
  • कॉलोनाइजर को रजिस्ट्रेशन के लिए निकाय दफ्तरों में जाना पड़ता था। नई व्यवस्था में निकायों के पोर्टल से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा। फीस जमा होगी। रजिस्ट्रेशन की अवधि 5 साल होगी। 
  • आश्रय निधि का विकल्प वापस आएगा। अब गरीबों के लिए प्लॉट या फ्लैट की बाध्यता नहीं होगी। 
  • महंगे इलाके वाले प्रोजेक्ट में आश्रय निधि का विकल्प होगा। इस राशि को ईडब्ल्यूएस के दूसरे स्थानों पर बनने वाले मकानों में खर्च किया जा सकेगा। 
  • ईडब्ल्यूएस के लिए बंधक मकान-प्लाट प्रोजेक्ट पूरे होने की बजाय तीन चरण में मुक्त हो सकेंगे। 
  • कॉलोनाइजर्स दो हेक्टेयर से बड़ी कॉलोनी को मंजूरी के बाद तीन चरण में विकास कर सकेंगे। 
  • कॉलोनी या ग्रुप हाउसिंग का प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलते ही रहवासी संघ को हस्तांतरित हो जाएगी। अभी कॉलोनाइजर्स और नगर निगम हेंडओवर के चक्कर में विकास कार्य नहीं करते थे। 
  • कॉलोनी में डामर के साथ ही सीमेंट-क्रांकीट सड़क दोनों का विकल्प रहेगा। 
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