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IRCTC करा रहा गया की यात्रा, 2 दिन -1 रात का रहेगा टूर पैकेज

एक वर्ष पहले
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यूटिलिटी डेस्क. इस साल पितृपक्ष 13 सितंबर से शुरू होगा।  यदि आप इस बार पितृपक्ष में  पिंड दान के लिए गया जाने की योजना बना रहे हैं तो इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज़्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) आपके लिए आकर्षक पैकेज लेकर आया है। पितृपक्ष 13 सितंबर से 28 सितंबर तक चलेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए IRCTC ने Gaya Tarpan Package without Varanasi Darshan नाम के टूर पैकेज की शुरूआत की है। 2 दिन-एक रात के इस टमर पैकेज की शुरूआत वाराणसी से होगी।

1) टूर पैकेज से जुड़ी खास बातें...

इस पैकेज के तहत बोधगया और गया की यात्रा करायी जाएगी। यात्रियों को सुबह 10 बजे वाराणसी रेलवे स्टेशन से ले सड़क के रास्ते गया ओर बोधगया के दर्शन के लिए लेजाया जाएगा। इस पैकेज के तहत पितृपक्ष के दौरान रोज यात्रियों को लेजाया जाएगा।

  • ये टूर पैकेज कुल दो दिन का होगा। पहले दिन यात्रियों को वाराण्सी रेलवे स्टेशन से सड़क के रास्ते लगभग 276 किलोमीटर दूर बोधगया ले जाया जाएगा। ये यात्रा लगभग 06 घंटे की होगी।
  • बोधगया पहुंचने के बाद यात्रियों को लंच कराया जाएगा। बोधगया में यात्रियों को होटल में ठहराया जाएगा। यहां से शाम को यात्रियों को महाबोधी मंदिर और बोधी ट्री दिखाया जाएगा।
  • अगले दिन सुबह वहां से लगभग 16 किलोमीटर दूर यात्रियों को गया ले जाया जाएगा। यहां पिंडदान और पूजा कराई जाएगी। इसका खर्च यात्री को खुद देना होगा। शाम को यात्रियों को फिर से वाराणसी रेलवे स्टेशन पर ले आया जाएगा।

अगर आप सिंगल इस टूर पर जाते हैं तो आपको 18400 रुपए देने होंगे। वहीं डबल शेयरिंग में 9900 और ट्रिपल शेयरिंग में 7200 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क दूना होगा।

  • आपके साथ अगर बच्चा है और आप उसके लिए अलग से बेड लेते हैं तो 6400 रुपए और अगर अलग से बेड नहीं लेते हैं तो 4700 रुपए देने होंगे।

हिन्दू धर्म में मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पितरों को पिंडदान करने से उन्हे मुक्ति मिलती है। वायु पुराण के मुताबिक जब गयासुर बद्रीनाथ से नारायण का कमलासन लेकर उड़ने लगा। तो नारायण ने आकाश में ही गयासुर के केश पकड़कर उसे रोक लिया जिस जगह पर भगवान ने गयासुर को रोका, वह गया कहलाया।

  • इस दौरान नारायण ने गयासुर पर गदा से प्रहार भी किया था लेकिन गयासुर ने नारायण के कमलासन को आगे कर दिया। प्रहार से आसन का एक टुकड़ा बद्रीनाथ के पास गिरा। जो ब्रह्मकपाल के नाम से प्रसिद्ध है। तो वही दूसरा टुकड़ा हरिद्वार में गिरा जिसे नारायणीशिला के नाम से जाना जाता है और तीसरा हिस्सा जो गयासुर के पास रह गया था, उसे लेकर वो गया चला आया था।
  • जहां भगवान विष्णु ने अपने चरणों से उसे धरती में घुसा दिया। जिसके बाद गयासुर ने खुद नारायण से मुक्ति की प्रार्थना की। जिसके बाद भगवान विष्णु ने न सिर्फ उसे मुक्ति दी बल्कि ये भी कहा कि जिन तीन जगहों पर उनका कमलासन गिरा है, वहां पूजा करने से मोक्ष मिलेगा। तभी से ये तीनों स्थल पिंडदान और पितृों के तर्पण के लिए सबसे खास हो गए हैं।

आप रिजर्वेशन काउंटर से इस टूर पैकेज की बुकिंग करा सकते हैं।

  • टूर पैकेज से जुड़ी अधिक जानकरी या इसे ऑनलाइन बुक करने के लिए यहां क्लिक करें
  • अन्य टूर पैकेजों की जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

 

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