नियमों में बदलाव / टैक्स चोरी और 25 लाख तक टीडीएस बकाया होने पर नहीं चलेगा केस, सीबीडीटी ने बदले नियम



tax ; no prosecution in cases of not depositing tds up to rs 25 lakh
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tax ; no prosecution in cases of not depositing tds up to rs 25 lakh

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2019, 01:13 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के आयकरदाताओं को बड़ी राहत दी है। सीबीडीटी ने कहा है कि 25 लाख तक का टैक्स बकाया होने पर अब करदाताओं पर क्रिमिनल एक्शन नहीं लिया जाएगा।  सीबीडीटी के एक नए सर्कुलर में यह कहा गया है कि 25 लाख रुपए तक का टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) तय समयसीमा के 60 दिन बाद तक भी करदाता पर कोई मुकदमा नहीं चलाया जाएगा।

मुकदमेबाजी में आएगी कमी

  1. क्या कहा गया है सर्कुलर में?

    सीबीडीटी की ओर से 9 सितंबर को इस संबंध में एक सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलर में टीडीएस डिफाल्ट को लेकर प्रोसिडिंग और प्रोसीक्यूशन की समय सीमा नए सिरे से तय की गई है। 

    • इस सर्कुलर में कहा गया है कि यदि कोई करदाता 25 लाख रुपए या इससे कम का टीडीएस जमा नहीं करता है या तय सीमा के बाद 60 दिन के अंदर जमा कराता है तो उस पर किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। 
    • हालांकि, जो करदाता जानबूझकर या आदतन टीसीएस जमा नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ कोलेजियम की सिफारिश पर मुकदमा चलाया जा सकता है। 
    • कोलेजियम में सीनियर रैंक के दो अधिकारियों की मंजूरी जरूरी है। यह सर्कुलर 9 सितंबर से प्रभावी हो गया है और ऐसे पेंडिंग मामले जिनमें कानूनी कार्रवाई चल रही है वह भी इसके दायरे में होंगे।

  2. यह हुआ बदलाव

    सीबीडीटी ने 25 लाख रुपए तक का टैक्स नहीं जमा करने या तय समयसीमा निकलने के बाद 60 दिनों के अंदर टीडीएस जमा करने पर कानूनी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है। ऐसा नहीं करने पर सेक्शन 276बी के तहत तीन माह से लेकर 6 साल तक कठिन कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है।

    • यदि कोई व्यक्ति आयकर रिटर्न के समय 25 लाख रुपए तक की आय या आय पर 25 लाख रुपए तक के टैक्स की जानकारी नहीं देता है तो उसके खिलाफ कोलेजियम की सिफारिश के बाद ही कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। सेक्शन 276सी(1) के तहत ऐसे मामलों में 3 माह से लेकर 7 साल तक कठिन कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
    • यदि कोई व्यक्ति जिसकी आय 25 लाख रुपए तक है और आईटीआर फाइल नहीं करता है तो उसके खिलाफ कोलेजियम की सिफारिश के बाद ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आईटीआर फाइल न करने के मामलों में सेक्शन 276सीसी के तहत 3 माह से लेकर 7 साल की सजा और जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
       

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