डिजिटल तकनीक / अब आसानी से कर सकेंगे नकली नोट की पहचान, RBI लाएगा ऐप



rbi will bring new app to identify fake currency
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rbi will bring new app to identify fake currency

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2019, 06:55 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. नोटबंदी के बाद 2000 और 500 के नोटों का चलन काफी बढ़ गया है। इन बड़े नोटों के चलन में आने के कारण नकली नोटों का डर भी बढ़ गया है। और ये नकली नोटों को पहचानना भी आसान नहीं होता। इसकी वजह से लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। लोगों को इस परेशानी से निजात दिलाने के लिए सरकार एक डिजिटल तकनीक पर काम कर रही है। सरकार एक ऐसा मोबाइल ऐप लाने की तैयारी कर रही है जिससे नकली नोटों की पहचान की जा सकेगी। इस ऐप को बनाने की जिम्मेदारी RBI को सौंपी गई है। देश में करीब 80 लाख नेत्रहीन लोग हैं। RBI की इस पहल से उन्हें लाभ होगा।

नेत्रहीनों को नोट पहचानने में मिलेगी मदद

  1. ‘इंटाग्लियो प्रिंटिंग’ की मदद से पहचाने जाते हैं नोट

    रिजर्व बैंक ने कहा कि नेत्रहीन लोगों के लिए नकदी आधारित लेनदेन को सफल बनाने के लिए बैंकनोट की पहचान जरूरी है।

     

    - नोट को पहचानने में नेत्रहीनों की मदद के लिए ‘इंटाग्लियो प्रिंटिंग’ आधारित पहचान चिह्न दिए गए हैं। यह चिह्न 100 रुपए और उससे ऊपर के नोट में हैं।

     

    - नवबंर 2016 में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने के बाद अब चलन में नए आकार और डिजाइन के नोट मौजूद हैं।

  2. तस्वीर खींचते ही बता देगा नोट की वेल्यू

    केंद्रीय बैंक ने कहा है कि रिजर्व बैंक नेत्रहीनों को अपने दैनिक कामकाज में बैंक नोट को पहचानने में आने वाली दिक्कतों को लेकर संवेदनशील है।

     

    - बैंक मोबाइल एप विकसित करने के लिए वेंडर की तलाश कर रहा है। यह एप महात्मा गांधी श्रृंखला और महात्मा गांधी (नई) श्रृंखला के नोटों की पहचान करने में सक्षम होगा।

     

    - इसके लिए व्यक्ति को नोट को फोन के कैमरे के सामने रखकर उसकी तस्वीर खींचनी होगी।

     

    - यदि नोट की तस्वीर सही से ली गई होगी तो एप ओडियो नोटिफिकेशन के जरिए नेत्रहीन व्यक्ति को नोट के मूल्य के बारे में बता देगा।

     

    - अगर तस्वीर ठीक से नहीं ली गई या फिर नोट को रीड करने में कोई दिक्कत हो रही है तो एप फिर से कोशिश करने की सूचना देगा।

  3. पहले बैंक छापते थे नोट

    पेपर करंसी छापने की शुरुआत 18वीं शताब्दी में हुई। सबसे पहले बैंक ऑफ बंगाल, बैंक ऑफ बॉम्बे और बैंक ऑफ मद्रास जैसे बैंकों ने पेपर करंसी एक्ट 1861 के बाद करंसी छापने का पूरा अधिकार भारत सरकार को दे दिया गया। 1935 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना के बाद यह काम उसे सौंप दिया गया।

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