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5 साल तक के बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए लगाए जाते हैं मुफ्त टीके

2 वर्ष पहले
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यूटिलिटी डेस्क . इस योजना के अंतर्गत बच्चे के जन्म लेने से लेकर उसके पांच वर्ष के होने तक कई तरह के टीके सरकार की ओर से मुफ्त में लगाए जाते हैं। यह संपूर्ण टीकाकरण अभियान शहर, गांवों, कस्बों व टोलों में सामूहिक रूप से चलाया जाता है। जो बच्चेकिसी कारण टीका लगवाने से छूट गए हैं, उनके लिए मध्यावधि टीकाकरण अभियान भी चलाया जाता है। इस में 7 बीमारियों- डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटेनस, पोलियो, टीबी, खसरा और हेपेटाइटिस-बी जैसी जानलेवा बीमारियों से लड़ने के लिए वैक्सीनेशन की व्यवस्था की गई है। ये सात बीमारियां ऐसी हैं, जिनसे बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। यदि समय पर बच्चों को ये टीके लगा दिए जाएं, तो उनके जीवन को सुरक्षित रखा जा सकता है।
 

1) इस योजना से जुड़ी खास बातें...

यह योजना इंद्रधनुष के सात रंगों को प्रदर्शित करती है। इसलिए यहां सात रंगों का मतलब सात जानलेवा बीमारियों से बच्चे को सुरक्षा देने से है। समय पर टीका लगवाने से बाल मृत्युदर में कमी आई है। योजना में अभी तक 20 लाख से ज़्यादा टिटेनस के टीके गर्भवती महिलाओं को लगाए गए। साथ ही 75 लाख बच्चों को टीके लगाए जा चुके हैं। संपूर्ण टीकाकरण 20 लाख बच्चों का हो चुका है। पीएम मिशन इंद्रधनुष अभियान योजना 25 दिसंबर 2014 को हर वर्ग तथा हर समुदाय के लिए शुरू की गई थी। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2020 तक ‘संपूर्ण टीकाकरण’ कार्यक्रम पूरा करना है। और जानकारी चाहते हैं तो अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर चले जाएं।

शहर, गांवों, कस्बों में जिस दिन टीके लगने होते हैं, उस दिन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी तथा नर्स सभी तैयारियां सुनिश्चित करते हैं। जैसे ही टीकाकरण की जानकारी मिलती है, आप अपने शून्य से 5 वर्ष तक के बच्चे को वहां ले जाएं। 

- उनके पूछने पर माताओं को बताना चाहिए कि बच्चे को कब-कब कौन से टीके लग चुके हैं। यदि आप नहीं बता पाएं तो हर बच्चे के नाम का एक कार्ड स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के पास तथा दूसरा माताओं को दिया जाता है। उसमें पूरी जानकारी भरी जाती है। आप वह कार्ड बता सकती हैं। 

- सुरक्षा की दृष्टि से नर्स द्वारा एक टीके के लिए एक ही सिरिंज का इस्तेमाल किया जाता है। उस सिरिंज से दूसरे बच्चे को टीका नहीं लगाया जा सकता। यदि कोई कर्मचारी ऐसा करे तो आप विरोध करें और अपने बच्चे को तब तक टीका न लगवाएं जब तक नई सिरिंज का उपयोग न किया जाए। 

- टीका लगाने के बाद बच्चे को आधे घंटे के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों की निगरानी में रखना जरूरी होता है। क्योंकि टीका लगाने के बाद बच्चे को हल्का बुखार हो सकता है। या किसी और तरह से उसकी तबीयत बिगड़ सकती है। इसके उपचार के लिए क्या करना चाहिए, यह नर्स को पता होता है। इसके बाद जरूरी निर्देश देकर बच्चे को उसकी मां के हवाले कर दिया जाता है। 

- बच्चे के उपचार के बाद उसकी मां को मौखिक रूप से समझाया जाता है कि अगला टीका कब लगेगा। साथ ही बच्चे के टीकाकरण कार्ड में भी अगले टीके की तारीख दर्ज कर दी जाती है। 

- अंत में इस्तेमाल की गई सभी सुइयों और सिरिंज को सुरक्षित तरीके से नष्ट करना जरूरी होता है। प्राथमिकता वाले राज्य: जिन राज्यों में बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ है या आंशिक रूप से हुआ है, वहां सरकार ज्यादा ध्यान दे रही है। इन राज्यों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड शामिल हैं।  

प्रति वर्ष 5 लाख बच्चों की मौत 7 बीमारियों से हो जाती है। इस का उद्देश्य समय पर टीके लगाकर इन बच्चों का जीवन बचाना है। टीकाकरण बीमारी को बड़े पैमाने पर फैलने से बचाता है। 

- मिशन इंद्रधनुष के अंतर्गत हेमोफिलस इन्फ्लूएन्जा टाइप-बी (HIB) व जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) के टीके उन राज्यों में दिए गए हैं, जहां इसका प्रकोप ज्यादा है। 

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