दिल को बच्चा न समझें:हार्ट अटैक से मरने वाले 10 में से 4 की उम्र 45 से कम, फैमिली हिस्ट्री है, तो GenNext को खतरा दोगुना

2 महीने पहले

हार्ट अटैक से किसी की मौत होने के बाद अक्सर एक लाइन सुनने को मिलती है- 'उसकी जान बच सकती थी, अगर समय पर CPR दे दी जाती।' आखिर CPR है क्या?

कई लोग इसके बारे में जानते होंगे। कुछ लोगों ने इसकी ट्रेनिंग भी ली होगी। वहीं कुछ ऐसे भी होंगे, जिन्हें CPR के बारे में ज्यादा कुछ जानकारी नहीं है।

हर साल 27 जुलाई को नेशनल CPR डे सेलिब्रेट किया जाता है। इस मौके पर इसके इंपॉर्टेंस यानी महत्व पर चर्चा होती है। फिर सब भूल जाते हैं।

आज 29 सितम्बर को वर्ल्ड हार्ट डे मनाया जाता है। इस मौके पर हम CPR की बात क्यों कर रहे हैं। वो इसलिए क्योंकि अगर आम लोगों को CPR की ट्रेनिंग दी जाए, तो ‘हार्ट अटैक’ से कुछ लोगों की बचाई जा सकती है।

चलिए जरूरत की खबर में मेदांता अस्पताल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ नरेश त्रेहन की CPR और हार्ट से जुड़ी कुछ बातों को पढ़ते, समझते और फॉलो करते हैं।

सवाल- आखिर अचानक हार्ट अटैक आता क्यों हैं?
डॉ. नरेश त्रेहन- अगर पेशेंट के हार्ट आर्टरी में ब्लॉकेज आ जाए और उसे इस बात का पता न चले तो ऐसा होता है I

जैसे आजकल कई सेलिब्रिटी को पता नहीं चल रहा है और वो एक्सरसाइज करते रहते हैं। एक्सरसाइज करने पर खून की डिमांड बॉडी में बढ़ जाती है, लेकिन ब्लॉकेज की वजह से पंपिंग ठीक से नहीं हो पाती, इसलिए लोग कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो जाते हैं।

सवाल- आंकड़े कहते हैं कि हार्ट अटैक के बाद पेशेंट को CPR देने पर जान बचने की संभावना बढ़ जाती है?
डॉ नरेश त्रेहन
- अगर किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आए, तो CPR देने पर उसकी जान बचाई जा सकती है। हालांकि CPR देने के 2 नोमेनक्लेचर हैं। पहला बेसिक और दूसरा एडवांस लाइफ सपोर्ट।

बेसिक लेवल का CPR देकर पेशेंट की जान बचाई जा सकती है। यह भी समझ लें कि इस उपाय से 100% किसी की जान नहीं बचाई जा सकती, लेकिन बहुत हद तक बचाई जा सकती है।

सवाल- CPR होता क्या है?
डॉ नरेश त्रेहन- CPR का फुलफॉर्म कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन है। यह एक लाइफ सेविंग टेक्नीक है, जिसका इस्तेमाल हार्ट अटैक (दिल का दौरा) के दौरान किया जाता है। अगर किसी इंसान के दिल की धड़कन बंद हो जाए, तो घर से अस्पताल जाने के दौरान CPR लाइफ सेविंग का काम करता है।

इन 3 सिचुएशन में CPR देने की जरूरत पड़ती है

  1. कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाए और वह सांस न ले पा रहा हो।
  2. किसी एक्सीडेंट के दौरान व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ हो।
  3. अगर कोई व्यक्ति पानी में डूब गया हो, तो उसे बाहर निकालने के बाद

याद रखें- CPR देने के बाद पेशेंट को जल्द से जल्द अस्पताल लेकर जाएं।

नीचे दिए ग्राफिक में समझ लें कि बच्चों और बड़ों दोनों को CPR देने के तरीके अलग-अलग होते हैं।

बच्चे को CPR देने का तरीका बड़ों से अलग होता है

  • बच्चे को पीठ के बल सीधा लेटा दें और उसके पास घुटने के बल बैठें।
  • बच्चे को CPR देने के लिए दो उंगलियों का इस्तेमाल करें।
  • चेस्ट (छाती) पर हल्का प्रेशर दें, 1/2 से 2 इंच तक ही प्रेशर डालें।

याद रखें- बच्चे को जल्दी से जल्दी अस्पताल पहुंचाएं।

सवाल– CPR देने का क्या फायदा होता है?
डॉ नरेश त्रेहन
- इसकी मदद से पेशेंट को सांस लेने में सहायता मिलती है। हार्ट और ब्रेन में ब्लड सर्कुलेशन में मदद मिलती है। जैसा पहले भी बता बता चुका हूं कि कई मामलों में CPR की सहायता से व्यक्ति की जान बच जाती है।

आगे बढ़ने से पहले एक नजर इन आंकड़ों पर डाल लीजिए-

  • CPR देने से 10 में से 4 लोगों की जान बचाई जा सकती है।
  • अमेरिका में 20% लोग CPR में ट्रेंड हैं।
  • भारत में केवल 2% लोगों को CPR देना आता है।

सवाल- 40 साल से कम उम्र के बहुत से लोगों की हार्ट अटैक से जान जा चुकी है, क्या इसके कोई आंकड़े हैं?
डॉ नरेश त्रेहन-
अगर हम मेंदाता में 5 हजार से ज्यादा लोगों का हार्ट बाईपास या ऑपरेशन करते हैं, तो उनमें से 10% लोग 40 साल से कम उम्र के होते हैं।

(बाईपास में दिल में ब्लड पहुंचाने वाली ब्लॉक धमिनियों को काटे या साफ किए बगैर, ब्लड वेसल यानी ग्राफ्ट के जरिए एक नया रास्ता बनाया जाता है। इसके लिए स्वस्थ ब्लड वेसल हाथ, छाती या पैर से लिया जाता है और फिर इफेक्टेड धमनी से जोड़ दिया जाता है।)

अब दो और रिसर्च हार्ट से रिलेटेड पढ़ लें। थोड़ी पुरानी है, लेकिन इसे पढ़ने से आप अपने दिल का शायद पहले से ज्यादा ख्याल रख पाए
1. अमेरिका के एक रिसर्च जनरल में छपी रिपोर्ट कहती है कि 2015 तक भारत में 6.2 करोड़ लोगों को दिल से जुड़ी बीमारी हुई। इसमें से 2.3 करोड़ लोग ऐसे थे, जिनकी उम्र 40 साल से कम थी। यानी 40% दिल के मरीजों की उम्र 40 साल से कम है।

2. दूसरी स्टडी 2018 की है। साइंस जर्नल लैंसेट ने दिल की बीमारियों से जुड़े 1990 से 2016 तक के आंकड़े जुटाए थे। जिसमें कहा गया कि 1990 में भारत में होने वाली कुल मौतों में से 15.2% का कारण दिल से जुड़ी बीमारियां थीं। 2016 में ये आंकड़ा बढ़कर 28.1% पर आ गया।

हार्ट अटैक आने पर आसपास के लोग कौन सी गलतियां कर देते हैं। अगर ये गलतियां न हों तो किसी भी व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है-

  • घबराकर अस्पताल में कॉल करते हैं और पेशेंट के आसपास भीड़ लगाकर खड़े हो जाते हैं। CPR देने का ख्याल ही मन में नहीं आता है।
  • अगर किसी को CPR देने का ख्याल आ भी जाए, तो वो डर की वजह से पेशेंट को CPR नहीं देता है।

CPR देते वक्त कौन-कौन सी सावधानियां रखनी चाहिए?

  • CPR देते वक्त अपनी कोहनी और दोनों हाथों को सीधा रखें।
  • बच्चे या बड़े को जमीन पर पीठ के बल लेटाकर ही CPR दें।
  • पेशेंट का हाथ या पैर कुछ भी मुड़ा हुआ नहीं होना चाहिए।

चलते-चलते

अगर इन लोगों को दिल का दौरा पड़ने के बाद समय पर CPR दिया जाता, तो बच सकती थी जान

  • सिंगर केके का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने कहा था कि उनकी लेफ्ट वाली मेन कोरोनरी में 80% ब्लॉकेज था, जबकि बाकी धमनियों में छोटे ब्लॉकेज थे, कोई भी ब्लॉकेज 100% नहीं था। उन्हें तुरंत CPR दिया गया होता, तो उन्हें बचाया जा सकता था।
  • संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर आदित्य कपूर के अनुसार, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को बचाया जा सकता था, अगर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, शिलाँग के ऑडियंस में से किसी एक ने भी उन्हें CPR दिया होता।
  • प्रोफेसर आदित्य कपूर के अनुसार, एक्टर रीमा लागू को भी CPR मिला होता, तो उन्हें बचाया जा सकता था।

अंत में एक हाल का वीडियो देखते हैं, जहां CPR की वजह से जान बच गई

पिछले दिनों चेन्नई एयरपोर्ट पर एक यात्री को कार्डियक अरेस्ट आ गया। इस दौरान वहां मौजूद CISF के जवान ने बिना देर किए CPR देकर उनकी जान बचाई। डॉक्टरों का कहना है कि जवान ने सही समय पर CPR देकर उसकी जान बचा ली। CPR से मरीज की पल्स रेट में सुधार हुआ।

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