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क्या बच्चों के विकास में मुसीबत है मास्क:12 साल से कम उम्र के बच्चों को चेहरा और आवाज पहचानने में मुश्किल होगी; एक्सपर्ट्स की सलाह- इशारों में बात करें पैरेंट्स और टीचर

2 महीने पहले
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एक्सपर्ट्स की टीचर्स को सलाह- बच्चों के साथ बातचीत के दौरान इशारों को और ज्यादा प्रभावी बनाएं और अपनी टोन का खास ध्यान रखें।
  • बच्चों को मास्क के कारण इंसान, आवाज को पहचानने और बात समझने में मुश्किल हो सकती है
  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक- बच्चे बहुत जल्दी चीजे एडाप्ट कर लेते हैं, पैरेंट्स और टीचर्स को करनी होगी मदद

पैरी क्लास. हमें कोरोनावायरस संक्रमण से बचाने में मास्क बड़ी भूमिका निभा रहा है। हाल यह है कि मास्क अब रोज की जरूरतों का हिस्सा बन चुका है, लेकिन क्या ऐसा भी है कि मास्क बच्चों के विकास को रोक रहा है? अब जब बच्चों के स्कूल शुरू हो चुके हैं तो पैरेंट्स के लिए यह सवाल और भी जरूरी बन गया है। उन्हें चिंता है कि मास्क के कारण बच्चों के बोलने, भाषा और लोगों से बातचीत करने में परेशानी तो नहीं आएगी।

चेहरा, आवाज पहचानने में होगी मुश्किल

  • यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो में एप्लाइड साइकोलॉजी और ह्यूमन डेवलपमेंट के प्रोफेसर कैंग ली मास्क के चलते बच्चों के सामने आने वाली तीन बातों का जिक्र करते हैं। उन्होंने कहा कि पहला तो यह है कि 12 साल से कम उम्र के बच्चों को लोगों को पहचानने में परेशानी हो सकती है।
  • दूसरा, उन्होंने कहा "हम काफी सारी भावनात्मक जानकारी चेहरे की मसल्स के जरिए जाहिर करते हैं। अब जब इस तरह से दी जाने वाली जानकारी मास्क के कारण सही तरीके से नहीं पहुंच पाई, तो हो सकता है बच्चे को सामाजिक बातचीत और भावनात्मक तौर पर चीजों को पहचानने में दिक्कत हो।" तीसरा उन्होंने कहा कि बच्चों को भाषा पहचानने में दिक्कत हो सकती है।
  • हस्किंस लैबोरेट्रीज और येल चाइल्ड स्टडी सेंटर में सीनियर साइंटिस्ट डेविड ल्यूकोविच ने बच्चों में लिप-रीडिंग को लेकर स्टडी की है। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चे कुछ विजुअल संकेतों को मिस करेंगे, जिनके देखभाल करने वालों ने मास्क पहना होगा। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को यह जानने में मुश्किल होगी कि कौनसी आवाज किसकी है।

इशारों के जरिए बातचीत करें पैरेंट्स और टीचर्स
डॉक्टर डेविड कहते हैं "छोटे बच्चों के मामले में बातचीत के लिए मास्क सही नहीं हैं।" वे कहते हैं कि जब बच्चा घर पर बिना मास्क वाले लोगों के साथ वक्त बिताता है तो इससे उनकी विजुअल संकेतों को पहचानने की प्रैक्टिस होती है। यहां हमारे पास क्रिएटिव होने का एक मौका होता है और हम बच्चों की पूरी जानकारी को समझने में मदद कर सकते हैं। डॉक्टर डेविड माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों से इशारों में बात करने की सलाह देते हैं।

बातचीत करने का तरीका सीख लेंगे बच्चे
मास्क के भीतर छिपी जानकारी को बच्चे कैसे समझेंगे, इस बात की स्टडी करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चे बातचीत का तरीका खोज लेंगे। इसमें पैरेंट्स और टीचर्स उनकी मदद कर सकते हैं। कई वैज्ञानिकों का मानना है कि ऑटिज्म जैसे न्यूरो डेवलपमेंट परेशानियों से जूझ रहे बच्चों को खास मदद और देखभाल की जरूरत होगी।

ड्यूक यूनिवर्सिटी में साइकोलॉजी और न्यूरोसाइंस की असिस्टेंट प्रोफेसर सारा गैटहर कहती हैं "अब जब कई स्कूलों में मास्क पहनना जरूरी है तो बच्चों और बड़ों को अपनी भावनाएं तेज आवाज में जाहिर करने की आदत डालनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि इससे बच्चे लोगों की आंखें पढ़ने में बेहतर हो जाएंगे और आवाज की टोन की मदद से बात समझ जाएंगे। पैरेंट्स को बच्चों के साथ घर में फेस-टू-फेस गतिविधियों और बातचीत को बढ़ाना चाहिए।

इस तरीकों से टीचर कर सकते हैं मदद
डॉक्टर ली ने कहा कि बच्चे जल्दी समझ जाएंगे, लेकिन मास्क पहनने वाले टीचर्स को एक जैसा चश्मा, एक जैसी हेयरस्टाइल या विशेष कपड़े पहनकर उनकी मदद करनी होगी। भावनात्मक रूप से बातचीत के मामले में डॉक्टर ली शिक्षकों को आवाज की टोन और इशारों पर जोर देने की सलाह देते हैं।

इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मास्क पहनने वाले बच्चे चेहरे पहचानने में कमजोर होते हैं

  • हॉन्गकॉन्ग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में एसोसिएट प्रोफेसर ईवा चेन कहती हैं कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ज्यादा चेहरा कवर करने वाली संस्कृति से आने वाले बच्चे, चेहरे या भावनाएं पहचानने में कमजोर होते हैं।
  • हॉन्गकॉन्ग और एशिया में कई जगहों पर प्रदूषण और बीमारी के खिलाफ सुरक्षा को लेकर मास्क पहनना आम बात है। डॉक्टर चेन ने कहा "सांस्कृतिक तौर पर यहां इस तरह की चिंता नहीं है। इस बात को जानने की जल्दी नहीं है कि मास्क बच्चों के विकास में दखल देता है, जैसा कि हमारे यूरोपियन और अमेरिकी सहकर्मियों से सुना।"
  • बच्चों के दिमाग को देखते हुए यह सोचा जा सकता है कि मास्क पहने और मास्क पहने हुए लोगों के बीच वक्त गुजारने से उनके दूसरे संकेतों को समझने की क्षमता बढ़ेगी। डॉक्टर ली ने कहा "बच्चे बहुत एडाप्टिव होते हैं और हमसे ज्यादा एडाप्टिव होते हैं। वे बहुत जल्दी सीखते हैं। मुझे नहीं लगता कि पैरेंट्स को ज्यादा चिंतित होना चाहिए।"

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