पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

ब्लडप्रेशर को हल्के में न लें:नॉर्मल लगने पर भी हाई हो सकता है ब्लडप्रेशर, हार्ट के लिए है खतरनाक; जानें क्या है इसकी वजह?

एक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • जामा कार्डियोलॉजी में पब्लिश हुई नई स्टडी के मुताबिक, कभी-कभी ब्लडप्रेशर ज्यादा होने के लक्षण में भी ब्लड प्रेशर नॉर्मल आता है

क्या आप को लगता है कि आप का ब्लडप्रेशर नॉर्मल है? आप फिर से सोचिए। एक आइडियल ब्लडप्रेशर सिस्टोलिक प्रेशर के पारे का 120 मिलीमीटर होता है। यानी जब हमारा हार्ट बीट करता है या धड़कता है तो उससे ब्लड हमारे बॉडी के अन्य हिस्सों में फैलता है।

इससे ब्लड में एक तापमान भी जनरेट होता है और इस तापमान पर हमारा ब्लडप्रेशर 120 एमएम होनी चाहिए। हम आमतौर पर जिस ब्लडप्रेशर को मेजर करते या करवाते हैं उस प्रेशर के अलावा भी एक और ब्लडप्रेशर होता है जिसे सिस्टोलिक प्रेशर कहते हैं।

हाई ब्लडप्रेशर के लक्षण तो हैं, लेकिन ब्लडप्रेशर नॉर्मल है तो क्या करें?

  • जामा कार्डियोलॉजी में जून में छपी एक स्टडी के मुताबिक, जब सिस्टोलिक ब्लडप्रेशर समान्य से 90 एमएम बढ़ जाता है यानी जब यह 120 एमएम से 210 एमएम तक पहुंच जाता है तो कॉरोनरी आर्टरीज के डैमेज होने का रिस्क भी बढ़ जाता है। कॉरोनरी आर्टरीज हार्ट का वह पार्ट है, जो ऑक्सीजन युक्त ब्लड को हार्ट मसल्स में ट्रांसपोर्ट करता है।
  • इसलिए हमें जब भी जरूरत से ज्यादा ब्लडप्रेशर हाई होने के लक्षण दिखाई दे रहे हों और रीडिंग में हमारा ब्लडप्रेशर नॉर्मल आ रहा हो तो हमें अपने सिस्टोलिक प्रेशर की जांच भी करा लेनी चाहिए। इस अध्ययन में सामने आए नए फैक्ट्स हमें यह बताते हैं कि हमें इन चीजों को और भी गंभीरता से लेने की जरूरत है।
  • जामा में छपी स्टडी के यहां तक कहती है कि ब्लडप्रेशर का लेवल जिसे हम आमतौर पर नॉर्मल मानते हैं वह हाई भी हो सकता है। जो हार्ट से जुड़ी कई समस्याओं की वजह भी बन सकती है। हार्ट एक्सपर्ट्स का मानना है कि गैर औद्योगिक जगहों पर जहां प्रदूषण का स्तर कम होता है वहां के लोगों का सिस्टोलिक ब्लडप्रेशर 90 होता है। ज्यादा से ज्यादा यह 120 तक ही हो सकता है।

उम्र बढ़ने के साथ हार्ट से जुड़े रिस्क फैक्टर बढ़ जाते हैं

  • अध्ययन कार्डियोलॉजिस्ट के एक्सपर्ट डॉ. सिएमस और प्रोफेसर पी. व्हेलटन के निर्देशन में किया गया था। जिसमें करीब 1 हजार 500 ऐसे मिडल एज महिला और पुरुषों रखा गया था, अध्ययन में पाया गया कि उन्हें हार्ट से जुड़ी कोई समस्या नहीं है।
  • जैसे-जैसे लोगों की उम्र बढ़ती जाती है लोगों में हार्ट से जुड़े रिस्क फैक्टर बढ़ने लगते हैं। इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ हर तरह की दवाइयों के खाने से होने वाले साइड इफेक्ट कभी-कभी हमारे ब्लडप्रेशर को बढ़ा देते हैं।
  • बढ़ती उम्र में मेडिटेशन, एक्सरसाइज और डाइट पर जरूर फोकस करना चाहिए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि उम्र के साथ वजन तो कतई नहीं बढ़ना चाहिए। मोटापे से डाइबिटीज और हाइपरटेंशन होने की संभावना बढ़ जाती है जो बाद में हाई सिस्टोलिक ब्लडप्रेशर जैसी समस्याओं की वजह बन सकता है।

सिर्फ ब्लडप्रेशर पर ही फोकस नहीं करना है

  • हार्ट एक्सपर्ट डॉ. व्हेलटन के मुताबिक, यह गलत होगा कि हम सिर्फ ब्लडप्रेशर पर ही फोकस करें। उन्होंने कहा कि जिनका ब्लडप्रेशर हाई होता है उनके पास और भी समस्याएं हो सकती हैं। हमें उन्हें भी साथ ही साथ कंट्रोल करने पर फोकस करना होगा।
  • उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि हाई ब्लडप्रेशर वालों का कोलस्ट्रॉल और ग्लूकोज लेवल भी हाई हो सकता है जो हार्ट से जुड़े समस्याओं की वजह बन सकता है। डॉ. व्हेलटन कहते हैं कि सबसे अच्छी रोकथाम यह होगी कि हम ब्लडप्रेशर के अलावा दूसरे रिस्क फैक्टर पर भी ध्यान दें।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- घर-परिवार से संबंधित कार्यों में व्यस्तता बनी रहेगी। तथा आप अपने बुद्धि चातुर्य द्वारा महत्वपूर्ण कार्यों को संपन्न करने में सक्षम भी रहेंगे। आध्यात्मिक तथा ज्ञानवर्धक साहित्य को पढ़ने में भी ...

और पढ़ें