बॉडी बिल्डर खरीदकर पी रहे मां का दूध:नई मां के बाएं ब्रेस्ट में पानी होता है, दाएं में खाना; साइंस इसे नहीं मानता

16 दिन पहलेलेखक: एकता सिन्हा

पिछले दिनों एक खबर आई थी केरल के कोझिकोड़ से, जहां मां-बाप के झगड़े में फंसे 12 दिन के बच्चे को रम्या नाम की महिला पुलिसकर्मी ने अपना दूध पिलाया। वहीं रम्या ने कहा कि उन्होंने कोई असाधारण काम नहीं किया है। वो पुलिसकर्मी बाद में हैं, पहले एक मां हैं।

पुलिसकर्मी एमआर रम्या को केरल पुलिस ने सम्मानित किया।
पुलिसकर्मी एमआर रम्या को केरल पुलिस ने सम्मानित किया।

यह तो हुई रम्या की बात। वापस लौटते हैं मां-बाप की लड़ाई और बच्चे पर। दरअसल बच्चे की मां ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका बच्चा लापता है। पति के साथ विवाद है और वह बच्चे को ले गया है। वह उसे अपने साथ बेंगलुरु ले गया है जहां वह नौकरी करता है। बॉर्डर पर गाड़ियों की जांच के दौरान पुलिस ने बच्चे और पिता को ढूंढ निकाला। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां पता लगा कि ब्रेस्ट फीडिंग यानी स्तनपान न करवाने की वजह से बच्चे का शुगर लेवल घट गया है।

आज जरूरत की खबर में ब्रेस्टफीडिंग की बात करेंगे। साथ ही उसके उन फायदों को भी दोहराएंगे जिसे हमारी दादी-नानी बताया करती थीं। हमारी एक्सपर्ट हैं गुड़गांव की सीनियर कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट रितु सेठी और कोकिलाबेन हॉस्पिटल, मुंबई की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. वैशाली जोशी।

सवाल 1– ब्रेस्ट फीडिंग की कमी से क्या वाकई बच्चे का शुगर लेवल घट सकता है?
जवाब- मां के दूध में बहुत सारे गुण होते हैं। यह बच्चे के शुगर लेवल को कंट्रोल रखता है। करीब 6 महीने तक ब्रेस्टफीडिंग कराने से डायबिटीज का खतरा 30 प्रतिशत तक कम हो जाता है। बच्चे को प्रोटीन, विटामिन और कैल्शियम भी मां के दूध से मिलता है।

यही नहीं, ब्रेस्ट फीडिंग इंसुलिन की सेंसिटिविटी को बढ़ाता है इसलिए यह उन महिलाओं के ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को सुधारता है जिन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज की समस्या होती है। 2-5 महीने से अधिक समय तक ब्रेस्ट फीडिंग कराने से इन मांओं में भी टाइप 2 डीएम का रिस्क काफी हद तक कम हो जाता है।

सवाल 2 - बच्चे को कितने दिन तक मां के दूध की जरूरत होती है?

जवाब- WHO क्या कहता है, इस बात पर एक नजर डाल लीजिए-

  • 6 महीने तक के बच्चे को पूरी तरह से ब्रेस्ट फीड कराना चाहिए। यानी उसे मां का दूध ही पिलाएं।
  • 2 साल तक के बच्चों को बाहर के दूध के साथ ब्रेस्ड फीड करवाना चाहिए।
  • 6 महीने तक बच्चे की खुराक पूरी तरह से मां के दूध पर डिपेंड करती है इसलिए मांओं को अपने खानपान पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

सवाल 3- बच्चे के जन्म के बाद पहली बार मां को अपना दूध कब पिलाना चाहिए?
जवाब- जब पहली बार बच्चे को मां गोद में ले, तभी दूध पिलाने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चे को जन्म देने के बाद मां के शरीर में खास दूध बनता है, जिसे कोलोसट्रम कहते हैं। यह दूध बच्चे को कई तरह के इन्फेक्शन से सुरक्षित रखता है।

सवाल 4- दूध पिलाते वक्त मां का पॉश्चर कैसा होना चाहिए?

जवाब- इसका जवाब हम आपको पॉइंट्स में बता रहे हैं ताकि आप इसे अच्छी तरह से समझ सके।

  • मां गोद में लेकर ही बच्चे को दूध पिलाएं।
  • शुरुआती दिनों में मां लेड बैक पोजिशन यानी पीठ को टेक देकर बैठ सकती है।
  • इस पोजिशन को 40 डिग्री से ज्यादा न रखें।
  • बच्चे का पेट मां के पेट से जुड़ा रहना चाहिए।
  • बच्चे का सिर मां के सीने से जुड़ा रहना चाहिए।
  • अब एक हाथ से बच्चे का मुंह अपने निप्पल के पास लाएं।
  • दूसरे हाथ से ब्रेस्ट को सपोर्ट दें।
  • इस बात का ध्यान दें कि बच्चे का मुंह केवल निप्पल नहीं, बल्कि एरिओला (ब्रेस्ट और निप्पल के बीच का काला भाग) को भी कवर करें।
  • इस पोजिशन में बच्चे को पकड़ने में मां को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती।

सवाल 5- क्या मां को सोते हुए बच्चे को दूध पिलाना चाहिए?
जवाब- नहीं ऐसा नहीं करना चाहिए। अब आप कहेंगी कि नवजात तो ज्यादा समय तक सोता रहता है ऐसे में एक मां कब दूध पिलाएंगी? इसका जवाब है कि हर चार घंटे पर उसे उठाकर दूध पिलाएं। अगर दूध पिलाते वक्त भी वो सो जाएं तो उसे आराम से लिटा दें। याद रखें कि नवजात कुछ मिनट या फिर एक घंटे तक लगातार दूध पी सकता है। इन आदतों को देखकर परेशान न हो क्योंकि वो दूध पीने की सही आदत को समझ रहा है।

सवाल 6- क्यों नई मां अपना दूध बच्चे को पिलाने से कतराती हैं?
जवाब: इसका सबसे बड़ा कारण न्यूक्लियर फैमिली और डिब्बे वाले दूध का ऐडवर्टाइजमेंट है। पहले जॉइंट फैमिली होती थी, तब मां के अलावा बच्चे की देखरेख करने के लिए और भी फैमिली मेंबर हुआ करते थे। अब न्यूक्लियर फैमिली में सिर्फ माता-पिता ही होते हैं। ऐसे में कई लोगों को फॉर्मूला मिल्क आसान विकल्प लगता है।

दूसरा कारण महिलाओं का वर्किंग होना और उनकी कंपनी के पास किसी तरह का बेबी जोन न होना भी है। ज्यादातर महिलाएं डिलीवरी के कुछ ही महीने बाद ऑफिस जाना शुरू कर देती हैं। इस वजह से मां अपने बच्चे को भरपूर दूध नहीं पिला पाती हैं। उन्हें फॉर्मूला मिल्क देकर निश्चिंत हो जाती हैं।

दूध पिलाने वाली मां की सुबह से रात तक की डाइट इस तरह की होनी चाहिए

  • सुबह से रात तक मां की डाइट में तीन मेजर मील और 3 स्नैक्स होने चाहिए।
  • ह्यूमन मिल्क में 90% पानी होता है, जितना पानी मां पिएगी, मिल्क की सप्लाई अच्छी रहेगी।
  • हरी पत्तेदार सब्जियां खाने से आयरन मां में बने रहेंगे, एनिमिया की प्रॉब्लम नहीं होगी और यह सब दूध के जरिए बच्चे को मिलेगा।
  • हाई प्रोटीन डाइट से एनर्जी बनी रहेगी, मां को सुस्ती नहीं होगी, बच्चा भी हेल्दी रहेगा।
  • दलिया, साबूदाना, मसूर दाल, ये सब दूध की क्वांटिटी और क्वालिटी बढ़ाते हैं, इसे रोज खाएं।
  • ब्रेस्ट फीड करवाने वाली महिलाओं को डेयरी प्रोडक्ट से दूर रहना चाहिए। इससे पेट फूलने की और गैस की प्रॉब्लम होती है। इसलिए दही खाएं। दही प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर होती है। साथ ही इसमें प्रोबायोटिक प्रॉपर्टी भी होती हैं, जिससे ब्रेस्ट फीडिंग कराने के दौरान पाचन बेहतर रहता है। सोर्स– रितु सेठी, गायनेकोलॉजिस्ट, क्लाउड नाइन हॉस्पिटल, गुरुग्राम

सवाल 7- ब्रेस्ट फीडिंग के दाैरान क्या नहीं खाना चाहिए?
जवाब- भूलें नहीं कि खानपान अगर हेल्दी नहीं होगा, तो आपके दूध को भी नुकसान करेगा। जर्नल पीडियाट्रिक्स में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, कैफीन मां के शरीर से होते हुए उसके ब्रेस्ट मिल्क तक पहुंच सकता है। जब बच्चा दूध पीता है, उसका पेट कैफीन को पचा नहीं पाता है। इस उम्र में बच्चे के पेट में उतना गैस्ट्रिक जूस नहीं बनता, जितना बड़ों के पेट में। चॉकलेट, चाय, कोल्ड ड्रिंक, सोडा पीना हेल्दी नहीं है। ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं को अल्कोहल से परहेज करना चाहिए। ब्रेस्ट फीडिंग करवाते वक्त मछली खा सकते हैं, लेकिन कुछ सीफूड जिसमें मर्करी की मात्रा अधिक होती है, उसे नहीं खाना चाहिए, जैसे ट्यूना, सोर्डफिश, मार्लिन, लॉब्स्टर।

एक रिसर्च जो सवाल छोड़ गया…ब्रेस्ट मिल्क में मिला माइक्रोप्लास्टिक

पिछले महीने की ही खबर है। इटली में एक स्टडी हुई। इसमें 34 हेल्दी मांओं के ब्रेस्ट मिल्क के सैंपल लिए गए। उनमें से 75% में माइक्रोप्लास्टिक पाए गए। इटली में यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक डेले मार्चे में प्रोफेसर डॉ वेलेंटीना नोटरस्टेफानो कहती हैं कि यह आश्चर्यजनक था। ऐसे में सवाल यह है कि-

सवाल 8- माइक्रोप्लास्टिक किस तरह से नवजात को नुकसान पहुंचा सकता है?
जवाब- प्लास्टिक का जरूरत से ज्यादा डेली लाइफ में इस्तेमाल करने की वजह मां के दूध में भी माइक्रोप्लास्टिक मिल लगे। इंसान पर माइक्रोप्लास्टिक का असर कितना गंभीर है इस पर अब भी रिसर्च जारी है। हां इतना जरूर है कि प्लास्टिक में हॉर्मफुल यानी हानिकारक केमिकल होते हैं जैसे- phthalates, जो ह्यूमन सेल लाइन (मानव कोशिका लाइन), लैब एनिमल, समुद्री वन्यजीवों के टॉक्सिक इफेक्ट डाले जाते हैं जो नवजात के लिए डेंजरेस है।

अब ब्रेस्टफीडिंग से जुड़े 3 मिथ यानी मिथक का जवाब जान लेते हैं

मिथ नंबर 1 - ब्रेस्टफीडिंग कराने से मां को दर्द होता है

जवाब- नहीं, ऐसा नहीं है। ब्रेस्ट फीडिंग कराने से कभी भी मां को दर्द नहीं होता। मां को ब्रेस्ट के टिश्यूज में हल्का खिंचाव महसूस हो सकता है। अगर किसी मां को लगतार दर्द हो रहा है तो आप सही तरह से फीड नहीं करा रही हैं या फिर कोई दिक्कत है। कई बार बच्चा निपल्स को दबा देता है। यह भी दर्द का कारण है।

मिथ नंबर 2- मां के बाएं ब्रेस्ट में पानी होता है और दाएं में खाना, इसलिए मां अपने दाहिने ब्रेस्ट से ही दूध पिलाए

जवाब- ऐसा पुराने जमाने में लोग कहते थे। आज ऐसा नहीं है। साइंस ने प्रूव कर दिया है कि दोनों ही ब्रेस्ट में दूध होता है। हां एक बात जरूर है कि जब आप नई-नई मां बनती हैं तो शुरुआत में निकलने वाला दूध थोड़ा पानी जैसा होता है। यह माना जाता है कि यह बच्चे की प्यास का ख्याल रखता है। इसके बाद जो दूध निकलता है वो वसायुक्त होता है जो भूख का ख्याल रखता है। यह बच्चे के वजन को भी बढ़ाता है। अब आप समझ गए होंगे कि बच्चे को फीड दोनों ही ब्रेस्ट से कराना चाहिए।

मिथ नंबर 3- हर फीड के बाद ब्रेस्ट को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए

जवाब- ब्रेस्ट के निपल्स के आसपास के काले गहरे रंग के हिस्से को एरोला कहते हैं। यह लिक्विड पैदा करता है, जिसमें एमनियोटिक द्रव के समान गंध आती है। इस द्रव में ‘अच्छे बैक्टीरिया’ होते हैं जो एरोला और निपल्स को मॉइश्चराइज करने में भी मदद करता है। मां को दूध पिलाने से पहले और बाद में ब्रेस्ट या निपल्स को साफ करने की जरूरत नहीं होती है। याद रखें कि अगर आप बार--बार ऐसा करेंगी तो निप्पल और एरोलर टिश्यूज सूख जाते हैं।

चलते-चलते
बॉडी बनाने के लिए बॉडी बिल्डर खरीद कर पीते हैं मां का दूध

पिछले दिनों डेब्रिटो (Mila De’brito) नाम की एक महिला का वीडियो वायरल हो रहा था। जिन्होंने दावा किया कि पहला बच्चा होने के बाद कई बॉडी बिल्डरों ने उनसे पैसे देकर 'मां का दूध' खरीदा है। अपना दूध बेचकर उन्होंने लाखों कमाया है। बॉडी बिल्डर्स इस दूध से अपनी बॉडी बना रहे हैं। मांसपेशियों के लिए यह फायदेमंद है।

एक्सपर्ट कहते हैं कि यह बात सिर्फ मिथ है। बच्चों के विकास में यह फायदेमंद जरूर है, लेकिन बड़ों को इससे फायदा मिलता है इसका कोई सबूत नहीं।

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