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फ्यूचर में कैसा होगा कंप्यूटर:क्या थ्योरी ऑफ एवरिथिंग बना सकता है कंप्यूटर? जानिए वैज्ञानिकों की राय

4 महीने पहले
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क्या कंप्यूटर हर चीज की थ्योरी बना सकता है? वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब हां में देते हुए कहते हैं कि यह कभी भी हो सकता है। लेकिन, इसकी कोई गारंटी नहीं कि मनुष्य इसके रिजल्ट को समझ पाएं। एक बार महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आईंस्टीन ने कहा था कि साइंटिफिक थ्योरी इंसान के दिमाग का मुफ्त इनवैंशन (फ्री इनवैंशन ऑफ द ह्यूमन माइंड) है।

1980 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के कॉस्मोलॉजिस्ट और वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने अपने लेक्चर में कहा था कि तथाकथित थ्योरी ऑफ एवरिथिंग को पाया जा सकता है। इसे कंप्यूटर की मदद से पूरा किया जा सकता है। साथ ही उनका दावा था कि थ्योरिटिकल फिजिक्स का अंत नहीं हो सकता।

वैसे थ्योरी ऑफ एवरिथिंग अभी स्पष्ट नहीं है। यह बस एक हाईपोथिसिस है। कंप्यूटर मनुष्य की जिंदगी से जुड़ी हर चीज कर रहे हैं। जैसे- किसी भी भाषा को ट्रांसलेट करना, चेहरों की पहचान करना, कार ड्राइव करना या फिर किसके साथ डेट करना है, यह बताना। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि यह हॉकिंग और आइंस्टीन की सोच से भी आगे निकल जाए। लेकिन, सवाल वहीं आ जाता है कि जब टेक्नोलॉजी आगे निकल ही गई है तो फंडामेंटल पार्टिकल को ढूंढ क्यों नहीं पा रहे हैं? दूसरी गैलेक्सी का पता क्यों नहीं लगा पाए है? जैसा ‘इंटरेस्ट ट्रेलर’ फिल्म में दिखाया गया है।

ऐसी मशीन बनाने की तैयारी, जो फिजिक्स की तरह सोचे

  • मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी के प्रोफेसर डॉ. टेगमार्क ने इंस्टीट्यूट फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड फंडामेंटल इंटरेक्शन खोला है। यह इंस्टीट्यूट अमेरिका में सात फाउंडेशन में से एक है। इसका हिस्सा यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर है, जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के काम को आगे बढ़ाने में सहयोग करता है। सभी इंस्टीट्यूट को पांच साल में एक बार 20 मिलियन डॉलर का अनुदान भी मिलता है।
  • इस इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर थैलर जो पूरी तरह फिजिक्स को समर्पित हैं। उनके साथ एमआईटी, हॉवर्ड, नॉर्थ इस्टर्न यूनिवर्सिटी के दो दर्जन से ज्यादा वैज्ञानिक जुड़े हैं। यह सभी फिजिक्स की अलग-अलग फील्ड से हैं।
  • थैलर कहते हैं कि वह एक ऐसी जगह बनाना चाहते हैं, जहां फिजिक्स, कंप्यूटर साइंस, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की फील्ड से रिसर्चर आएं। यह सभी एक साथ मिलकर काम करें और एक दूसरे की चीजों को जानें। आखिर में हम ऐसी मशीन बनाना चाहते हैं, जो फिजिक्स की तरह ही सोचे।

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थ्योरी ऑफ एवरिथिंग क्या है?

  • सरल भाषा में समझें तो इसे हर चीज का सिद्धांत या सबकुछ का सिद्धांत या फिर सर्वत्व का सिद्धांत भी कहा जाता है। यह फंडामेंटल फिजिक्स का हाईपोथेटिकल प्रिंसिपल है। इससे यूनिवर्स में घट रही चीजों को साइंटिफिक्ट नजरिए से समझा जा सकता है।
  • अगर प्रिंसिपल स्पष्ट होता है, तो ऐसा कोई एक्सपेरिमेंट नहीं होगा जिसकी पहले से भविष्यवाणी न की जा सके। जिन प्रिंसिपल की खोज की जा चुकी है, उन्हें थ्योरी ऑफ एवरिथिंग एक दूसरे से जोड़ने में मदद कर सकती है। इस प्रिंसिपल को ढूंढने की मुख्य वजह क्वांटम मैकेनिक्स और थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी के बीच में तालमेल बनाना है।

फंडामेंटल लॉ को रि-डिस्कवर करना होगा

  • जिस तरह की मशीन की कल्पना प्रोफेसर थैलर कर रहे हैं। वह एक तरह की आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का ही हिस्सा है। जिसे न्यूरल नेटवर्किंग कहा जाता है। यह आईबीएम के वॉटसन सिस्टम की तरह नहीं होते हैं, जिनमें ह्यूमिनिटी और साइंटिफिक नॉलेज फीड होती है।
  • न्यूरल नेटवर्क को मनुष्य के दिमाग की तरह डिज़ाइन किया गया है। यह टेक्नीक सभी पार्टिकल के अंदर छुपे हुए डाटा का एनलिसिस करके जानवरों में भेद, चेहरों की पहचान करना, मनुष्य की तरह बोलना जैसे काम आसानी से करती है।
  • वहीं टेगमार्क का कहना है कि हम फिजिक्स के नए लॉ की खोज की उम्मीद कर रहे हैं। हम इस बात को पहले ही साबित कर चुके हैं कि फिजिक्स के लॉ की खोज दोबारा की जा सकती है।
  • टेगमार्क और उनके स्टूडेंट ने रिचर्ड फेयमेन की लिखी किताब द फेयमैन लेक्चर ऑन फिजिक्स में 100 से ज्यादा इक्युएशन निकाली। इसे न्यूरल नेटवर्क में फीड करने के बाद जनरेट किया। फिर डाटा को पैटर्न और रेगुलरटी के हिसाब से शिफ्ट किया। इसके बाद इन सभी फॉर्मूलों को रिकवर कर लिया गया।
  • वहीं एक दूसरे एक्सपेरिमेंट में डॉ टेगमार्क और उनके साथियों ने न्यूरल नेटवर्क को एक वीडियो दिखाया और पूछा कि यह क्या हो रहा है? आखिर में कंप्यूटर ने मोशन की इक्युएशन को डिस्कवर किया।
  • टेगमार्क का कहना है कि सर्न के हैड्रोन कोलाइडर पर नए तरीकों से पार्टिकल को ढूंढना प्रभावी होगा। AI बिग डाटा पसंद करते हैं। कोलाइडर में एक सेकेंड में हजारों टेराबाइट्स का डाटा रन करता है। हो सकता है कि 2012 में हिग बोसोन की डिस्कवरी न होने पर सर्न का डाटा नए पार्टिकल न ढूंढ पाए।
  • उनका कहना है कि दस सालों में मशीन लर्निंग फिजिक्स के लिए जरूरी हो जाएगा। फिलहाल इसकी सीमाएं अभी सीमित है।
  • टेगमार्क कहते हैं कि AI कुछ वक्त बाद आर्टिफिशियल जनरल इंटेलीजेंस तक पहुंच जाए। अगर सुपर पावरफुल AI टेक्नॉलोजी बना ली गई तो हमें नही पता कि इसपर कैसे काम कर पाएंगे।

मशीन और मनुष्य के बीच बातचीत हो सकती है?

  • एमआईटी के निदेशक डॉ. थैलर का कहना है कि वह AI को लेकर उलझन में थे, लेकिन अब उसके सबसे बड़े प्रमोटर हैं। उनका कहना है कि मशीन के अंदर नॉलेज इनकोड कर सकते हैं। इसकी मदद से उसे इंटरप्रेट करने में आसानी होती है। मनुष्य और मशीन के बीच कम्युनिकेशन होना बहुत उत्साहित करता है। वह इसे AI कहना पसंद नहीं करते हैं। इसमें मैथ्य, स्टेटिक्स और कंप्यूटर साइंस का मुख्य आधार है।
  • थैलर कहते हैं कि मशीन आपको हर चीज का बेहतर सॉल्यूशन देती है। अगर अपने लक्ष्य के बारे में AI को बताएं तो वह इसका बेहतर जवाब दे सकती है।
  • हाल ही में थैलर और उनके सहकर्मियों ने एक न्यूरल नेटवर्क में लार्ज हैड्रोन कोलाइडर का डेटा फीड किया। प्रोटोन जो एटोमिक मेटर का बिल्डिंग ब्लॉक्स है। उसके अंदर दो पार्टिकल हैं। पहला क्वार्क और ग्लूओन। जब प्रोटोन कोलाइड होता है तो यह छोटे-छोटे पार्टिकल में अलग होता है। इस प्रोसेस को अच्छे से समझने के लिए सिस्टम से इन पार्टिकल को अलग करने कहा था।
  • थैलर का कहना है कि वह क्वांटम फील्ड के बारे में कुछ समझा नहीं रहे है। न ही ग्लूओन और क्वार्क फंडामेंटल लेवल बता रहे हैं। बस इतना बताना चाहते हैं कि इससे उन्हें इतना मिक्स डाटा मिला है कि इसे दो कैटेगरी में अलग करना होगा।
  • जब सिस्टम से इस क्वार्क और ग्लूओन के डाटा को अलग करने को कहा तो उसने आसानी से अलग कर दिया। जबकि, सिस्टम को यह पता ही नहीं था कि यह क्या है? अगर हम सिस्टम से थर्ड टाइप डाटा के बारे में पूछें तो वह क्वार्क की प्रॉपर्टी का पता लगाने में लग जाएगा, क्योंकि क्वार्क भी दो हिस्सों में बंट सकता है। पहला अप क्वार्क और दूसरा डाउन क्वार्क। ऐसे में इसी तरह के कुछ एक्सपेरिमेंट और रिसर्च के आधार पर माना जा रहा है कि थ्योरी ऑफ एवरिथिंग को कंप्यूटर पूरी तरह से स्पष्ट कर सकता है, जो साइंस और टेक्नोलॉजी को फिजिक्स की फील्ड में अलग लेवल पर ले जा सकती है।

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