चार्जिंग पर लगाया मोबाइल, अकाउंट से 16 लाख गायब:रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट पर फोन चार्ज करने पर होगी जूस जैकिंग, इससे कैसे बचें

4 महीने पहलेलेखक: अलिशा सिन्हा

हैदराबाद में एक कंपनी के CEO को 16 लाख रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। दरअसल, वे किसी पब्लिक प्लेस पर अपना मोबाइल USB पोर्ट के जरिए चार्ज कर रहा थे। बाद में पता लगा कि उनके अकाउंट से 16 लाख रुपए उड़ा लिए गए।

इससे पहले नई दिल्ली की एक महिला ने भी ऐसी ही शिकायत की थी। दिल्ली एयरपोर्ट पर उनके फोन की बैटरी कम हो गई। इसके बाद उन्होंने एयरपोर्ट पर मौजूद USB चार्जिंग स्टेशन पर फोन चार्ज में लगा दिया। कुछ ही घंटे के बाद महिला के मोबाइल पर एक मैसेज आया, जिसमें उसे पता चला कि बैंक अकाउंट से 1 लाख 20 हजार रुपए निकाल लिए गए।

इस महीने ओडिशा पुलिस ने भी एक ट्वीट किया, जिसमें कहा- अपने मोबाइल को पब्लिक प्लेस जैसे मोबाइल चार्जिंग स्टेशन या USB पावर स्टेशन पर चार्ज न करें। साइबर फ्रॉडर्स मोबाइल से आपकी पर्सनल जानकारी चुराने और Malware इन्स्टॉल करने की कोशिश कर रहे हैं।

आपको पता है कि इस तरह के फ्रॉड को 'जूस जैकिंग' कहते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि पब्लिक प्लेस पर तो हम भी फोन चार्ज करते हैं। हमारे साथ भी ऐसी घटना हो सकती है, फिर इससे बचने के उपाय क्या हैं... तो चलिए आज जरूरत की खबर में इसके बारे में बात करते हैं।

हमारे एक्सपर्ट हैं- क्रिप्टो/ ब्लॉकचैन कम्युनिकेशन्स एंड डिजिटल सेफ्टी के एक्सपर्ट जसकरन सिंह मनोचा

सवाल- क्या है जूस जैकिंग?
जवाब-
यह एक तरह का साइबर या वायरस अटैक होता है। इसमें क्रिमिनल पब्लिक प्लेस जैसे- एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या मॉल में इस्तेमाल होने वाले USB चार्जिंग पोर्ट के जरिए किसी भी मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या दूसरे डिवाइस में मालवेयर इन्स्टॉल करके पर्सनल डेटा चुरा लेते हैं। इस प्रोसेस को जूस जैकिंग कहते हैं।

सवाल- ये Malware क्या है, जिसका जिक्र अक्सर साइबर एक्सपर्ट और इस बार ओडिशा पुलिस ने भी अपने ट्वीट में किया है?
जवाब-
इसे Malicious Software भी कहा जाता है। इसे कम्प्यूटर सिस्टम या मोबाइल में इन्स्टॉल करके पर्सनल डेटा है किया जाता है। Malware कोई फाइल या कोड हो सकता है। जिसे किसी नेटवर्क के थ्रू आपके सिस्टम में डिलीवर किया जाता है। जैसे ही ये आपके मोबाइल या लैपटॉप में इन्स्टॉल होगा, आपका सिस्टम स्लो हो जाएगा और कई एरर मैसेज दिखाई दे सकते हैं।

ध्यान रखें- AC Power Socket के जरिए डेटा ट्रांसफर या चोरी की समस्या नहीं आती है। चार्जर के जरिए आपके मोबाइल के साथ डेटा कम्युनिकेशन नहीं किया जा सकता, लेकिन डायरेक्ट USB To USB के जरिए डेटा ट्रांसफर किया जा सकता है।

सवाल- जूस जैकिंग के जरिए आपसे फ्रॉड हो गया है, जैसे- अकाउंट खाली हो गया है, पर्सनल डेटा चुरा लिया गया है और ब्लैकमेल किया जा रहा है, तब क्या करें?
जवाब-
इस सवाल का जवाब आपने बहुत बार सुना होगा, लेकिन फिर भी कई बार मुसीबत के वक्त लोगों का दिमाग काम करना बंद कर देता है। इसलिए हम इन उपाय को दोहरा रहे हैं। ऐसी सिचुएशन में घबराएं, रोए या गुस्सा करने की जगह ये काम करें-

  • अपने शहर के, जिले के या आसपास के साइबर पुलिस को सूचना दें और केस दर्ज कराएं।
  • पुलिस के पास फोन जमा करना पड़ सकता है। इससे घबराएं नहीं, पुलिस आपकी मदद ही करेगी।
  • जरूरी नहीं है कि साइबर पुलिस स्टेशन में जाकर ही केस दर्ज करवाना पड़े। आप चाहें तो ऑनलाइन भी केस दर्ज करवा सकते हैं।

सवाल- USB से डेटा ट्रांसफर भी तब होता है, जब हम अपने मोबाइल से Data Access की Permission देते हैं, फिर बगैर Permission हैकर्स डेटा कैसे चोरी कर सकते हैं?
जवाब-
ये बात बहुत हद तक सही है, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि आपने USB Charging Point में मोबाइल लगाया जाए और आपने गलती से Permission दे दी। तब तो डेटा आराम से चोरी हो जाएगा।

एक और बात, अगर डेटा ट्रांसफर नहीं भी हो, तो Malware वायरस को हैकर्स आपके फोन में इंस्टॉल कर ही सकते हैं। इसलिए इन सारी समस्याओं से बचने के लिए एक ही उपाय है- अलर्ट रहना।

सवाल- क्या USB पोर्ट से पब्लिक प्लेस पर मोबाइल चार्ज करना बिल्कुल भी सेफ नहीं है?
जवाब-
आप चाहें, तो अपना मोबाइल स्विच ऑफ करके USB पोर्ट से चार्ज कर सकते हैं। क्योंकि मशीन अगर बंद है, तो बहुत हद तक सेफ रह सकती है।

सवाल- क्या जूस जैकिंग के जरिए साइबर अटैक सिर्फ मोबाइल यूजर्स के साथ हो सकता है?
जवाब-
नहीं, ऐसा नहीं है। अगर आप USB पोर्ट के जरिए लैपटॉप और कम्प्यूटर भी पब्लिक प्लेस पर चार्ज करते हैं, तो इनसे भी आपका पर्सनल डेटा चोरी हो सकता है।

चलते-चलते

मोबाइल के अलावा अपने कम्प्यूटर या लैपटॉप को Malware से कैसे बचाएं?

  • सिस्टम में कोई भरोसेमंद एंटीवायरस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करें और अपडेट करते रहें।
  • इंटरनेट के जरिए कोई फाइल जैसे- गाना या फिल्म किसी सही वेबसाइट से ही डाउनलोड करें।
  • वेब ब्राउज करते समय एडवरटाइजमेंट देखने को मिलते हैं, इन पर भूलकर भी क्लिक न करें।
  • अनजान या जिस ईमेल को देखकर अटपटा लगे, उसके किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।
  • किसी अनजान सोर्स के जरिए भी फाइल ओपन ना करें।
  • किसी External Device जैसे पैन ड्राइव, USB को कम्प्यूटर में लगाने से पहले स्कैन कर लीजिए।
  • एंटीवायरस का इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो आप किसी भी External Device को लगाने से बचें।
  • अपने कंप्यूटर के डेटा को Strong पासवर्ड लगाकर सेफ करें।
  • समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहें।

साइबर एक्सपर्ट की कुछ सलाह-

  • कोशिश करें कि मोबाइल में अपने पर्सनल डिटेल न रखें।
  • अगर पर्सनल डिटेल रखना मजबूरी बन जाए, तो 2 मोबाइल रखें।
  • जिस मोबाइल में पर्सनल डिटेल रख रहे हैं, उसे पब्लिक प्लेस में चार्ज न करें।
  • कोशिश ये भी करें कि जिस मोबाइल में पर्सनल डिटेल है, उसका इस्तेमाल कोई और न करे।

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