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लॉकडाउन में खिलौने बने खतरा:साल भर में बच्चा 18 किलो से ज्यादा प्लास्टिक के खिलौने जमा करता है, इनमें मौजूद खतरनाक केमिकल कैंसर का खतरा भी बढ़ाते हैं

एक महीने पहले
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लॉकडाउन के दौरान घरों में बंद बच्चे भाग-दौड़ से दूर हो गए, तो एंटरटेनमेंट का सहारा बने मोबाइल, लैपटॉप और खिलौने। प्लास्टिक के खिलौने बनाने वाली फैक्ट्री के लिए यह मौका किसी अवसर से कम नहीं था। टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव राजीव बत्रा ने बताया कि मांग पूरी करने के लिए रात-दिन फैक्ट्रियां चलीं और काफी मात्रा में खिलौने बनाए गए। सवाल ये है कि जिन बच्चों को वायरस से बचाने के लिए लोगों ने घरों से बाहर नहीं निकलने दिया, उनके लिए क्या ये प्लास्टिक के खिलौने पूरी तरह से सुरक्षित हैं?

एक इंटरनेशनल स्टडी में रिसर्चर्स ने पाया है कि खिलौने बनाने में 100 से ज्यादा ऐसे केमिकल इस्तेमाल होते हैं, जो बच्चों के लिए जानलेवा हो सकते हैं। टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क के क्वानटेटिन सस्टेनविलिटी रिसर्चर पीटर का कहना है कि हार्ड, सॉफ्ट और फोम प्लास्टिक मटेरियल से बने खिलौनों में करीब 419 केमिकल पाए गए। इसमें से 126 केमिकल ऐसे हैं, जो बच्चों में कैंसर जैसी कई बड़ी बीमारियों की वजह बन सकते हैं।

खिलौनों में इस्तेमाल होने वाले जानलेवा केमिकल फ्लेम रिटार्डेंट को लेकर अमेरिका के वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे कैंसर हो सकता है। स्टडी में पता चला कि यह खतरा पॉलिस्टर टनल के साथ भी है। पॉलिस्टर टनल बच्चों के खेलने और आराम करने का एक पाइप नुमा पॉलिस्टर का टेंट होता है। आजकल यह काफी चलन में है। इसमें उपयोग किए गए मटेरियल में फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल होता है।

खिलौनों का फ्लेम रिटार्डेंट बच्चों का IQ लेवल कम कर सकता है

फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल का कॉमर्शियल और कंज्यूमर प्रोडक्ट में इस्तेमाल 1970 में फ्लेम एबिलिटी स्टैंडर्ड के साथ शुरू हुआ। हालांकि बाजार में उपलब्ध सभी फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल से बने प्रोडक्ट में हेल्थ का रिस्क नहीं होता। वैज्ञानिकों की चिंता उस फॉर्मुलेशन से है जिसमें क्लोरीनेट, ब्रोमाइड या फॉस्फोरस होता है।

फ्लेम रिटार्डेंट को आग से जुड़ने की क्षमता रखने वाले उत्पादों में जोड़ा जाता है। इसमें फर्नीचर, बच्चों के प्रोडक्ट, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, बिल्डिंग और कंस्ट्रक्शन मटेरियल, कपड़े, कार की सीट और वाहनों के इंटीरियर शामिल हैं। इसमें मौजूद केमिकल से बने उत्पादों से बच नहीं सकते हैं। यह स्किन में जा सकते हैं। धूल में जमा हो सकते हैं।

जानवरों की लैब में हुई एक रिसर्च में सामने आया है कि तरह-तरह के फ्लेम रिटार्डेंट से कई तरह के हेल्थ इश्यू हो सकते हैं। ब्रोमिनेटेड केमिकल से जानवरों और मनुष्यों में कैंसर, हार्मोन डिसरप्टिव, रिप्रोडक्टिव सिस्टम और न्यूरो डेवलपमेंट प्रॉब्लम भी हो सकती है।

कुछ चुनिंदा लोगों के बीच की गई रिसर्च में पाया कि यह केमिकल रिस्क बढ़ाता है, IQ लेवल कम करता है और बच्चों के व्यवहार में भी बदलाव लाता है। इस साल की शुरुआत में हुई रिसर्च में भी सामने आया था कि ब्रोमिनेटेड फ्लेम IQ Loss का सबसे बड़ा कारण है। जो बच्चों में इंटलेक्चुअल डिसएबिलिटी को बढ़ावा देता है।

बच्चों को इन केमिकल से बचाने का सबसे आसान तरीका है कि उन्हें प्लास्टिक के खिलौनों से दूर रखें

  • रिसर्चर्स के अनुसार विदेशों में बच्चे हर साल औसतन 18.3 किलोग्राम (40 pounds) प्लास्टिक के खिलौने खरीदते हैं या फिर जमा करते हैं।
  • बच्चों को केमिकल्स से बचाने के लिए रिसर्चर्स ने सबसे आसान सलाह ये दी है कि प्लास्टिक के खिलौने खरीदना या तो बंद कर दें या फिर कम कर दें। फिलहाल बच्चों को इससे बचाने का यही एकमात्र तरीका है।
  • हाल ही में हुई एक स्टडी में यह बात भी सामने आई है कि जिन बच्चों के पास जरूरत से ज्यादा खिलौने थे, उनकी क्रिएटिविटी काफी कम थी। वहीं जिन बच्चों के पास कम खिलौने थे, उनमें ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता और क्रिएटिविटी दोनों काफी ज्यादा थी।

बेबी प्रोडक्ट में मिला 80% से ज्यादा फ्लेम रिटार्डेंट

2009 में अमेरिकी डॉ. स्टेपलटन ने एक एनालिसिस किया। जिसमें उन्होंने अपने बेटे के तकिये और अन्य बेबी प्रोडक्ट की जांच की। इसमें दो तरह के फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल मिले। जो पहले कभी नहीं पाए गए थे। इसके बाद उन्होंने अपने सहकर्मियों से कार सीट, तकिये, और बेबी प्रोडक्ट के फोम डोनेट करने को कहा। 2011 में पब्लिश हुई स्टडी में सामने आया कि 100 तरह के प्रोडक्ट की जांच की गई। इसमें 80% से ज्यादा में फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल मिला। इसके अगले साल उन्होंने 100 काउच में 85% फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल पाया।

सामान्य तौर पर बेबी प्रोडक्ट और काउच में क्लोरिनेटे ट्रीस केमिकल पाया गया। हालांकि 40 साल पहले मैन्युफैक्चरर ने बेबी पजामा में इसका उपयोग करना बंद कर दिया था, लेकिन बाद में ये फिर से उपयोग होने लगा।

क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के सर्वे में भी खिलौनों में मिला खतरनाक केमिकल

2019 में क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया यानी QCI ने कुछ इंपोर्टेड खिलौनों को टेस्ट किया था, जिसमें 66.90% खिलौने फेल हो गए थे। इस सर्वे में 121 अलग-अलग तरह के खिलौनों को टेस्टिंग के लिए लैब में भेजा गया था। केवल 33.1% खिलौने ही इस टेस्ट में पास हो पाए।

QCI की रिपोर्ट के मुताबिक जमा किए गए खिलौनों में से 30% प्लास्टिक खिलौने सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें से कई खिलौनों में सीसा जैसे हैवी मेटल की मात्रा मिली। जबकि 80% प्लास्टिक के खिलौने मैकेनिकल और फिजिकल सेफ्टी के मानकों पर फेल हो गए।

रिसाइकिल प्लास्टिक से बने सभी खिलौनों में स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक डायोक्सीन रसायन बेहद ज्यादा मात्रा में मौजूद है। खिलौनों में इसकी मात्र 690 प्रतिग्राम TFQ (टॉक्सिक इक्वीलेंट कोसेंट) तक मिली। इसमें भी ब्रोमिनेटेड डायोक्सीन बहुत अधिक पाया गया। जिसके कारण बच्चों के गंभीर बीमारियों की चपेट में आने का खतरा है।

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