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ऑनलाइन पढ़ाई को कैसे बेहतर बनाएं:देश में 24 करोड़ बच्चे 6 महीने से स्कूल नहीं जा रहे, ऑनलाइन घर पर कर रहे पढ़ाई; जानिए ई-लर्निंग के किस प्लेटफार्म पर क्या पढ़ें

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: आदित्य सिंह
  • देश में 62% पैरेंट्स कोरोनावायरस के डर से आज भी अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते
  • एक्सपर्ट्स का सुझाव- बच्चों और पैरेंट्स को ध्यान देना होगा कि पढ़ाया जा रहा कंटेंट क्रेडिबल है या नहीं

कोरोनावायरस का सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ा है। यूनेस्को के मुताबिक, दुनिया में 1 करोड़ से ज्यादा लड़कियों का दोबारा स्कूल लौटना मुश्किल है। शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 24 करोड़ से ज्यादा बच्चे स्कूल जाते हैं। लेकिन, ये सभी मार्च से स्कूल नहीं जा रहे हैं।

लोकल सर्किल सर्वे के मुताबिक, देश में 62% पैरेंट्स ऐसे हैं, जो आज भी अपने बच्चों को कोरोना के डर से स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं। ऐसे में बच्चे लंबे समय से ऑनलाइन पढ़ाई करने को मजबूर हैं। धीरे-धीरे उन्हें इसकी आदत भी पड़ती जा रही है। हालांकि, बच्चों के स्कूल नहीं जाने से पैरेंट्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज के हेड और प्रोफेसर डॉक्टर धनंजय चोपड़ा बताते हैं कि मैं खुद भी लंबे समय से बच्चों की ऑनलाइन क्लास ले रहा हूं। कोरोना के बाद ऑनलाइन पढ़ाई टीचर्स और बच्चों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। क्योंकि, इससे पहले हम इस वीडियो टेक्नोलॉजी के महत्व को इतनी गंभीरता से नहीं लेते थे। पर अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, ई-लर्निंग वेबसाइट्स और चैनल ने पढ़ाई-लिखाई को बहुत आसान बना दिया है। भारत में ई-लर्निंग के कई सरकारी और प्राइवेट प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं।

कंटेंट क्रेडिबिलिटी पर पैरेंट्स और बच्चों को ध्यान देना होगा

डॉ. चोपड़ा बताते हैं कि ई-लर्निंग के कई प्लेटफॉर्म और कई शिक्षक हैं, ऐसे में बच्चों और उनके पैरेंट्स को इस बात का विशेष ध्यान देना चाहिए कि जो उनको पढ़ाया जा रहा है, वह सही (क्रेडिबल) है या नहीं। ई-लर्निंग में किसी भी क्लास या लेक्चर को शुरू करने से पहले उससे जुड़ी जानकारी बच्चों के साथ शेयर करनी चाहिए। जिससे बच्चे भी मानसिक रूप से तैयार हो सकें।

ई-लर्निंग में शोध और एक्सपेरिमेंट नहीं कर सकते

डॉ. चोपड़ा के मुताबिक, स्कूलों और कॉलेजों के कैंपस शोध और प्रयोग के लिए जरूरी होते हैं। हम ई-लर्निंग में शोध और एक्सपेरिमेंट नहीं कर सकते। स्कूलों और कॉलेजों में हम बच्चों से सीधे रू-ब-रू होते हैं। जिस बच्चे को जिस तरह की जरूरत होती है, हम उसकी उसी तरह से काउंसलिंग करते हैं। यह सब ई-लर्निंग में संभव नहीं है।

ई-लर्निंग के किस सरकारी प्लेटफॉर्म पर क्या मिलेगा?

  • स्वयं- यह इंजीनियरिंग, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंस, लॉ और मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों सहित सभी विषयों में स्कूली (कक्षा 11वीं से 12वीं) और उच्च शिक्षा (स्नातक, स्नातकोत्तर कार्यक्रम) दोनों को कवर करने वाले 1900 पाठ्यक्रमों के स्टडी मेटेरियल मुहैया कराने वाला राष्ट्रीय ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म है।
  • स्वयं प्रभा- इस प्लेटफॉर्म के डी2एच पर 32 ऐसे टीवी चैनल हैं, जिन पर पूरे सप्ताह 24 घंटे शिक्षा संबंधी कार्यक्रमों का प्रसारण होता है। इन चैनलों को पूरे देश में डीडी फ्री डिश और एंटीना के जरिये देखा जा सकता है। ये चैनल स्कूली शिक्षा (कक्षा 19वीं से 12वीं) और उच्च शिक्षा (स्नातक, स्नातकोत्तर) दोनों को कवर करते हैं। इन पर आर्ट, साइंस, कॉमर्स, परफार्मिंग आर्ट, सोशल साइंस, प्रौद्योगिकी, लॉ, मेडिकल, एग्रीकल्चर, ह्यूमैनिटीज विषयों की क्लास लगती हैं।
  • दीक्षा- दीक्षा कार्यक्रम के तहत देश की तमाम भाषाओं में 12वीं कक्षा के लिए सीबीएसई, एनसीआरटी और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा तैयार की गई 80 हजार ई-बुक्स उपलब्ध हैं। स्टडी मेटेरियल को क्यूआर कोड के माध्यम से भी देखा जा सकता है। इस ऐप को IOS और गूगल प्ले स्टोर के जरिये डाउनलोड किया जा सकता है।
  • ई-पाठशाला- एनसीआरटी ने इस वेब पोर्टल पर कक्षा 1 से 12वीं तक के लिए विभिन्न भाषाओं में 1 हजार 886 ऑडियो, 2 हजार वीडियो, 696 ई-बुक्स और 504 फ्लिप बुक अपलोड किए हैं। इसे यहां (epathshala.nic.in) पर डाउनलोड कर एक्सेस कर सकते हैं।

ई-लर्निंग के किस प्राइवेट प्लेटफॉर्म पर क्या मिलेगा?

  • बाईजू- यह भारत के टॉप ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म में से एक है। बाईजू स्कूल और हायर एजुकेशन के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए, ऑनलाइन क्लासेस और ई- बुक उपलब्ध कराता है। इसका एप्लिकेशन IOS और एंड्रॉइड पर उपलब्ध है।
  • एजुकॉम्प सॉल्यूशन- यह 1994 से अलग-अलग माध्यमों से ई-लर्निंग के क्षेत्र में सक्रिय है। एजुकॉम्प सॉल्यूशन स्कूल से लेकर हायर एजुकेशन तक के लिए, ऑनलाइन क्लासेस और ई- बुक उपलब्ध कराता है। इसे भी इसकी ऑफिशियल वेबसाइट से एक्सेस किया जा सकता है।
  • इग्नू- इंद्रा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी अपना खुद का ई-लर्निंग प्रोग्राम चलाता है। स्कूल से लेकर हायर एजुकेशन तक के लिए ई-बुक और कंटेंट को एक्सेस करने के लिए आप इग्नू की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
  • एनआईआईटी- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी भी अपना खुद का ई-लर्निंग प्रोग्राम चलाता है। स्कूल से लेकर हायर एजुकेशन तक के लिए ई-बुक और कंटेंट को एक्सेस करने के लिए आप एनआईआईटी की वेबसाइट पर भी रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

ई-लर्निंग में औसतन कितना खर्च आता है ?

  • सरकारी ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म- सरकार के सभी ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म हर बच्चे के लिए मुफ्त में उपलब्ध हैं। एक साधारण ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरी करने के बाद आप इसे एक्सेस कर सकते हैं। टीवी पर इस सुविधा का लाभ लेने के लिए रजिट्रेस्शन भी नहीं करना है।
  • प्राइवेट ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म- स्कूल के बच्चों के लिए प्राइवेट ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म का महीने का खर्च 2 से 10 हजार रुपए तक आता है। यह अलग-अलग पैकेज पर निर्भर करता है।
  • स्वायत्त ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म - इग्नू और एनआईआईटी जैसे संस्थाओं की ई-लर्निंग प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए भी साधारण ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा। इन प्रोग्रामों के लिए भी किसी तरह का शुल्क नहीं देना होता है।

ई-लर्निंग के क्या फायदे हैं ?

  • डॉक्टर धनंजय चोपड़ा के मुताबिक ई-लर्निंग का सबसे मजबूत पक्ष उसकी विविधता है। हम दुनिया के किसी भी प्रोफेसर या टीचर से अपने स्टूडेंट्स को जोड़ सकते हैं और अपने स्टूडेंट्स के लिए कोई भी स्टडी मटेरियल उपलब्ध करा सकते हैं। ई-लर्निंग टाइम सेविंग है, हमारा बहुत सारा ऐसा समय इसमें बच सकता है, जो स्कूल या कॉलेज आने-जाने में लगता है। ई-लर्निंग ने न केवल स्टूडेंट्स को, बल्कि शिक्षकों को भी स्कूलों और विश्वविद्यालयों की सीमाओं से मुक्त किया है। जिससे पढ़ने और पढ़ाने की प्रक्रिया में और व्यापकता आई है।

ई-लर्निंग के क्या नुकसान हैं?

  • डॉक्टर चोपड़ा कहते हैं कि 'ई-लर्निंग में शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच का सीधा संबंध टूट जाता है। हम यह नहीं पता कर सकते की बच्चा पढ़ाई पर ध्यान दे रहा है या नहीं। पढ़ने-पढ़ाने में सबसे ज्यादा जरूरी चीज बॉडी लैंग्वेज होती है, जो हमारे कम्युनिकेशन को मजबूत बनाती है। ई-लर्निंग में हमारे चेहरे का एक्सप्रेशन, हाव-भाव और इशारों की भूमिका भी कम हो जाती है।

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