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डेंगू का डर:टाइगर मच्छर लोगों को कर रहा बीमार, डेंगू और कोरोना के कई लक्षण एक जैसे हैं, जानिए डेंगू से कैसे बचें

12 दिन पहलेलेखक: गौरव पांडेय
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  • डेंगू का मच्छर दिन में और मलेरिया का मच्छर रात में काटता है, दिन में फुल स्लीव शर्ट पहनें
  • सरकार ने जारी की गाइडलाइन, डेंगू में मांसपेशियों में दर्द होता है और चिकनगुनिया में जोड़ों में दर्द होता है

देश में कोरोनावायरस के साथ डेंगू के केस भी बढ़ रहे हैं। अकेले दिल्ली में अब तक डेंगू के 316 मामले आए हैं। वहीं, केंद्र सरकार ने कोविड-19 के को-इंफेक्शन और डेंगू, मलेरिया, फ्लू, चिकनगुनिया जैसी सीजनल बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए गाइडलाइन जारी की है। सरकार का कहना है कि इस समय कोरोना और सीजनल बीमारियों के लक्षण को पहचानने में काफी दिक्कत हो रही है, क्योंकि इनके सिंप्टम्स एक जैसे ही हैं।

एम्स दिल्ली में रुमेटोलॉजी डिपार्टमेंट की हेड डॉक्टर उमा कुमार कहती हैं कि डेंगू का मच्छर दिन में और मलेरिया का मच्छर रात में काटता है। इसे टाइगर मच्छर भी कहते हैं। इसलिए दिन में भी फुल-स्लीव शर्ट और पैंट जरूर पहनना चाहिए। डेंगू में मांसपेशियों में दर्द होता है और चिकनगुनिया में जोड़ों में दर्द होता है। इस वक्त हर सीजनल बीमारियों में भी बुखार जरूर आ रहा है। कोरोना के भी ज्यादातर मरीजों को बुखार, सिर दर्द, जोड़ो में दर्द हो रहा है। ऐसा डेंगू में भी हो रहा है। इसलिए डॉक्टरों को दोनों में अंतर करने में भी दिक्कत हो रही है।

डेंगू चार वायरसों के कारण होता है

  • डेंगू को हड्डी तोड़ बुखार के नाम से भी जाना जाता है। एक फ्लू जैसी बीमारी है, जो डेंगू वायरस के कारण होती है। यह तब होता है, जब वायरस वाला एडीज मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है।
  • डेंगू 4 वायरसों के कारण होता है। इनके नाम - डीईएनवी-1, डीईएनवी-2, डीईएनवी-3 और डीईएनवी-4 हैं।

इलाज में किन बातों का ध्यान रखें

डॉक्टर उमा कहती हैं कि डेंगू का बस सपोर्टिव इलाज ही है। इसका कोई खास इलाज नहीं है। इसमें सबसे ज्यादा जरूरी बात प्लेटलेट्स को मॉनिटर करना होता है, क्योंकि अचानक ये बहुत नीचे तक गिर जाती हैं। बुखार को कंट्रोल करना भी जरूरी होता है। यदि बुखार आ रहा है तो पैरासिटामॉल ही लें, दर्द की दवा कतई न लें।

यदि दूसरी बार डेंगू हुआ तो ज्यादा खतरा है
जिन्हें पहली बार डेंगू होता है, उन्हें उतना खतरा नहीं होता है। खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है, जिन्हें यह बुखार पहले भी हो चुका है। डेंगू हड्डियों को खोखला और कमजोर करता है। दूसरी बार होने पर यह बुखार अधिक घातक साबित हो सकता है।
मरीज के खाने-पीने का कैसे रखें ध्यान

  • डेंगू के मरीज को सादा पानी, नींबू पानी, दूध, लस्सी, छाछ और नारियल पानी देना चाहिए, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
  • ध्यान रखें कि मरीज के शरीर में हर दिन 4 से 5 लीटर लिक्विड जरूर जाना चाहिए। हर 1 से 2 घंटे में कुछ न कुछ खाने-पीने के लिए देते रहें।
  • मरीज के यूरीन की स्थिति पर ध्यान दें। यदि पेशंट हर 3 से 4 घंटे में एक बार पेशाब जा रहा है तो मतलब खतरे की बात नहीं है।
  • यदि पेशाब की मात्रा या फ्रीक्वेंसी कम है तो मरीज को तुरंत लिक्विड डाइट पर ध्यान देना चाहिए और डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

100 डिग्री से अधिक बुखार होने पर क्या करें?

  • यदि मरीज को डेंगू है और बुखार 102 डिग्री या इससे ज्यादा है तो माथे पर सादे पानी की पट्टियां रखें।
  • मरीज के कमरे में हल्की रोशनी रखें। कम स्पीड पर सीलिंग फैन या कूलर भी चला सकते हैं।
  • डेंगू के मरीज के बेड पर मच्छरदानी जरूर लगाएं।
  • मरीज की पर्सनल हाइजीन का पूरा ध्यान रखें। उसके कपड़े नियमित रूप से बदलें।
  • हाथ-पैर धोने या नहाने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल कराएं।

डेंगू में इन 3 तरह के बुखार से जान को खतरा होता है

  1. हल्का डेंगू बुखार- इसके लक्षण मच्छर के काटने के करीब एक हफ्ते बाद देखने को मिलते हैं, यह बेहद घातक होता है।
  2. डेंगू रक्तस्रावी बुखार- लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे कुछ दिनों में गंभीर हो सकते हैं।
  3. डेंगू शॉक सिंड्रोम - यह डेंगू का एक गंभीर रूप है, यह मौत का कारण भी बन सकता है।

2019 में भारत में 67 हजार से ज्यादा लोगों को डेंगू हुआ था
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दुनिया में हर साल करीब 5 लाख लोगों को डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है। अकेले भारत में पिछले साल 67 हजार से ज्यादा डेंगू केस आए थे।

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