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सर्वे में खुलासा:10 में से 9 महिलाएं मेंस्ट्रुअल हेल्थ में नहीं लेतीं डॉक्टर की सलाह, मेंस्ट्रुअल साइकिल पर पड़ रहा है कोरोना का असर

एक महीने पहले

कोरोना ने महिलाओं की सेहत को खासा प्रभावित किया है। कोरोना के तनाव के कारण भारतीय महिलाओं का मेंस्ट्रुअल साइकिल अनियमित हो गया है। वहीं 10 में से 9 महिलाएं अपने मेंस्ट्रुअल हेल्थ से जुड़े किसी भी कंसर्न के लिए डॉक्टर की सलाह नहीं लेती हैं।

महिला हाइजीन से जुड़ी एवरटीन ने अपने छठे सालाना माहवारी स्वच्छता सर्वे की रिपोर्ट में खुलासा किया है कि कोरोना के तनाव के कारण भारतीय महिलाओं की मेंस्ट्रुअल साइकिल अनियमित हो गई है।

41% महिलाओं को मेंस्ट्रुअल साइकिल अनियमितता की शिकायत
इस साल कोरोना और लॉकडाउन का महिलाओं की माहवारी पर असर का विशेष तौर पर अध्ययन किया गया। जिसके तहत 41 फीसदी महिलाओं ने इस दौरान मेंस्ट्रुअल साइकिल में अनियमितता की बात कही। जबकि इस सर्वे में भाग लेने वाली महिलाओं में से महज 13.7 प्रतिशत महिलाएं ही कोरोना संक्रमित थीं।

इस सर्वे को देश के बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता में 18 से 35 आयु वर्ग की करीब 5000 महिलाओं के बीच किया गया।

11% महिलाएं ही मेंस्ट्रुअल हेल्थ पर खुलकर बात करती हैं
वहीं एक अन्य सर्वे में पता चला है कि 10 में से 9 महिलाएं अपने मेंस्ट्रुअल हेल्थ से जुड़े किसी भी कंसर्न के लिए डॉक्टर की सलाह नहीं लेती हैं। इस सर्वे में ये बात भी सामने आई है कि देश में करीब 11 प्रतिशत महिलाएं ही पीरियड्स और मेंस्ट्रुअल हेल्थ के बारे में किसी से बात करने में कम्फर्टेबल महसूस करती हैं। यह सर्वे रियो पैड्स ने क्रिएटिव एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफॉर्मेशन कंपनी श्बांग के साथ मिलकर किया है।

मेंस्ट्रुएशन हाइजीन प्रोडक्ट्स खरीदने में कम्फर्टेबल महसूस नहीं करती महिलाएं
रिपोर्ट्स के मुताबिक 34 साल से अधिक उम्र वाली केवल 44 प्रतिशत महिलाएं ही मेंस्ट्रुएशन हाइजीन प्रोडक्ट्स खरीदने में सहज महसूस करती हैं। जबकि 34 साल से कम उम्र की 74 प्रतिशत महिलाएं ये प्रोडक्ट खरीदने में कम्फर्टेबल महसूस करती हैं।

धार्मिक गतिविधियों में महिलाओं को शामिल होने की इजाजत नहीं
मेंस्ट्रुएशन इतना टैबू है कि करीब 53 प्रतिशत महिलाओं को आज भी पीरियड्स के दौरान धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेने दिया जाता है। हालांकि 34 साल से कम उम्र की 76 प्रतिशत महिलाएं पीरियड्स के दौरान ऐसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए खुद को अनप्योर या अपवित्र नहीं मानती हैं।

यंग जनरेशन पीरियड्स को लेकर अवेयर है
सर्वे के हिसाब से कुल 64 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि उन्हें पीरियड्स के दौरान बहुत क्रिटिकल क्रैम्प्स होते हैं। इस पर डॉक्टरों का कहना है कि जहां एक तरफ मेंस्ट्रुएशन को लेकर देश में हालत कुछ ठीक नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर यंग जनरेशन की इसके प्रति अवेयरनेस हल्की राहत दे सकती है।

आज भी गलत मेंस्ट्रुअल प्रैक्टिस से होने वाले खतरे को नहीं जानतीं महिलाएं
सर्वे में ये बात भी सामने आई है कि बहुत सारी ग्रामीण और शहरी महिलाओं को आज भी गलत मेंस्ट्रुअल प्रैक्टिस से होने वाले खतरों के बारे में नहीं पता है। इससे निपटने के लिए एजुकेशन ही सबसे अच्छा तरीका है। महिलाओं की सेहत के लिए उन्हें शुरू से ही सही मेंस्ट्रुअल प्रैक्टिस के बारे में बताना सबसे ज्यादा जरूरी है।

PCOD भी भारतीय महिलाओं में बड़ी समस्या
भारत में 12-45 ऐज ग्रुप की लड़कियों में हर 5 से 10% महिलाओं को इस बीमारी का सामना करना पड़ता है और 70% तो ऐसी महिलाएं हैं जिन्हें जानकारी भी नहीं है कि वे PCOD यानी पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिजीज से पीड़ित हैं।