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वैज्ञानिकों के नए दावे:फेफड़े और किडनी को चोटिल कर रहा है कोरोनावायरस, मृतकों के अंगों पर मिले खून के थक्के; 6 और बड़ी जानकारियां भी मिलीं

एक वर्ष पहले
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  • इंग्लैंड में हुई इस स्टडी में 22 से 97 साल की उम्र के 10 मरीजों का पोस्टमॉर्टम एग्जामिनेशन किया गया था
  • सभी मरीजों को बुखार आया था और कम से कम दो रेस्पिरेटरी लक्षण थे, ज्यादातर की तीन हफ्ते में हो गई थी मौत

द लैंसेट माइक्रोब में प्रकाशित कोरोनावायरस स्टडी में पता चला है कि वायरस के कारण मरने वाले मरीजों में फेफड़ों और किडनियों पर चोट के निशान थे। इंग्लैंड में कोविड 19 मरीजों पर हुई पोस्टमार्टम एग्जामिनेशन को इंपीरियल कॉलेज लंदन और इंपीरियल कॉलेज हेल्थकेयर एनएचएस ट्रस्ट ने किया था। स्टडी में जांच किए गए मरीजों की संख्या कम थी, लेकिन इसे इंग्लैंड में अब तक कोविड 19 मरीजों के हुए पोस्टमार्टम एग्जामिनेशन की सबसे बड़ी स्टडी कहा जा रहा है। स्टडी में 10 एग्जामिनेशन किए गए थे।

9 मरीजों के अंगों पर मिले खून के थक्के

  • स्टडी में 10 जांचें की गईं थीं, जिनमें से 9 मरीजों के कम से कम एक बड़े अंग (दिल, फेफड़े और किडनी) में थ्रोम्बोसिस (खून का थक्का) मिले। हालांकि टीम 10वें मरीज में थ्रोम्बोसिस की जांच नहीं कर सकी। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस स्टडी से क्लिनीशियन्स को मरीजों के इलाज में मदद मिलेगी।
  • स्टडी के सह लेखक और इंपीरियल कॉलेज लंदन में ऑनरेरी क्लिनीकल सीनियर लेक्चरर, इंपीरियल कॉलेज हेल्थकेयर एनएचएस ट्रस्ट में कंसल्टेंट पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर माइकल ऑस्बर्न ने कहा, "कोविड 19 नई बीमारी है और हमारे पास ऑटॉप्सी में टिश्यू को एनलाइज करने के लिए सीमित मौके थे, ताकि हम मरीज की बीमारी के कारण को रिसर्च के लिए बेहतर तरीके से समझ सकें।"
  • उन्होंने कहा, "यह अपनी तरह की देश की पहली स्टडी है जो डॉक्टर्स और शोधकर्ताओं की पहले से चल रही उन थ्योरीस का समर्थन करती है, जिनमें कहा जा रहा था कि फेफड़ों की चोट, थ्रोम्बोसिस और इम्यून सेल का कम होना कोविड 19 के गंभीर मामलों की सबसे बड़ी खासियत है।"
  • डॉक्टर ऑस्बर्न ने कहा, "जांच किए जा रहे मरीजों में हमने किडनी की चोट और आंतों की सूजन भी देखी। ये और रिसर्च की दूसरी प्राप्तियां क्लिनीशियन्स की मरीजों को संभालने के लिए नई रणनीति बनाने में मदद करेंगी।"

22 से 97 साल उम्र के मरीजों पर हुई स्टडी

  • शोधकर्ताओं की टीम ने इंपीरियल कॉलेज एनएचएस ट्रस्ट के अस्पतालों में मार्च से जून के बीच पोस्टमार्टम एग्जामिनेशन किए। इस स्टडी में 22 से 97 साल की उम्र के 7 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल थे। 6 मरीज BAME बैकग्राउंड से थे और 4 श्वेत थे।
  • मरीजों की मौत के पीछे सबसे आम कारण हाई ब्लड प्रेशर और क्रोनिक ऑबस्ट्रेक्टिव पल्मोनरी डिसीज (फेफड़ों में होने वाली परेशानियों का समूह, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है) थी। सभी मरीजों को बुखार आया था और बीमारी के शुरुआती दौर में कम से कम दो रेस्पिरेटरी लक्षण नजर आए थे। जैसे- खराश और सांस लेने में तकलीफ। ज्यादातर मरीजों की मौत तीन हफ्तों के अंदर हो गई थी। हालांकि सभी समूहों में इलाज अलग थे।

स्टडी में मिली 6 बड़ी जानकारियां

  1. सभी मरीजों का था डिफ्यूज एल्वियोलर डैमेज (DAD): DAD का इस्तेमाल वायरल इंफेक्शन के कारण फेफड़ों पर लगी चोट के पैटर्न को समझाने में किया जाता है। इस तरह की चोट ऑक्सीजन और कार्बन डाय ऑक्साइड दोनों तरह के गैस एक्सचेंज और खून के बहाव को प्रभावित कर सकती है।
  2. थ्रोम्बोसिस: 10 में 9 मरीज की पूरी तरह जांच करने पर पता चला की उनके किसी एक बड़े अंग पर खून के थक्के बने हुए हैं। थ्रोम्बोसिस सर्कुलेट्री सिस्टम में खून के सामान्य बहाव को रोकता है और यह स्ट्रोक और हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। शोधकर्ताओं को 8 मरीजों को फेफड़ों, 5 मरीजों के दिल और 4 मरीजों की किडनी पर थ्रोम्बी मिला।
  3. रेनल ट्यूब्युलर चोट: सभी मरीजों में रेनल ट्यूब्युलर चोट के सबूत मिले। यह किडनी की चोट होती है और किडनी फेल या डैमेज का कारण बन सकती है। इसके मुख्य कारण किडनी तक खून का धीमा बहना और गंभीर संक्रमण होते हैं। यह आमतौर पर अस्पताल और आईसीयू में भर्ती मरीजों को प्रभावित करती है।
  4. टी लिंफोसाइट डिप्लीशन (TLD): यह भी रिसर्च के दौरान मरीजों के लिम्फ नोड्स और स्प्लीन में लगातार नजर आई। टी लिंफोसाइट (व्हाइट ब्लड सेल्स) इम्यून सिस्टम के बड़े हिस्से होते हैं और संक्रमण को खत्म करने में भूमिका निभाते हैं। हीमोफागोसाइटोसिस भी मरीजों के इस समूह में देखा गया। ऐसा तब होता है जब इम्यून सिस्टम किसी संक्रमण के खिलाफ ज्यादा प्रतिक्रिया देकर अपने खुद के सेल्स खत्म कर देता है।
  5. पेन्क्रिएटाइटिस: शोधकर्ताओं को दो मरीजों में गंभीर पेन्क्रिएटाइटिस के सबूत मिले। पेन्क्रिएटाइटिस में व्यक्ति की आंतों पर सूजन आ जाती है। नसों में तरल के जरिए इसका इलाज हो सकता है, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर परेशानियां डेवलप कर सकती है और ऑर्गन फैलियर भी हो सकता है। कोविड 19 के मरीजों में आंतों का खराब होना इससे पहले नहीं देखा गया, लेकिन इस स्टडी में यह साफ नहीं है कि मरीजों में पेन्क्रिएटाइटिस का कारण संक्रमण या कुछ और था।
  6. दुर्लभ फंगल इंफेक्शन: शोधकर्ताओं को एक मरीज में म्यूकर माइकोसिस नाम का एक दुर्लभ फंगल इंफेक्शन भी मिला। म्यूकर माइकोसिस एक तरह का संक्रमण है जो शरीर के दूसरे हिस्सों को प्रभावित करने के लिए खून के जरिए फैलता है। गंभीर संक्रमण में फेफड़े, दिमाग और किडनी, स्प्लीन और दिल शामिल हो सकते हैं।
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