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बात पते की है:100 में से 20 मरीजों में पोस्ट कोविड सिंड्रोम आ रहे, जानिए दूसरी बार कोरोना कितना खतरनाक

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: गौरव पांडेय
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  • कोरोना होने के दो-तीन महीने बाद भी 64% मरीजों में सांस की समस्या, 55% को थकान की परेशानी- रिपोर्ट
  • कोरोना मरीजों के ऑर्गन्स डैमेज हो रहे, कईयों के फेफड़े सही से काम नहीं कर रहे, ए-सिम्प्टमेटिक में भी ये लक्षण

कोरोना से ठीक हो चुके मरीज, अब दूसरी बार भी संक्रमित हो रहे हैं। हाल ही में महाराष्ट्र में 4 डॉक्टर दूसरी बार कोरोना संक्रमित हो गए। देश और दुनिया में इस तरह के मामले अब रोज आ रहे हैं। रिसर्च के मुताबिक, दूसरी बार कोरोना पहली बार की तुलना में ज्यादा खतरनाक है।

एम्स दिल्ली में रुमेटोलॉजी डिपॉर्टमेंट की हेड डॉ. उमा कुमार कहती हैं कि कोरोना से ठीक हो चुके 100 में से 20 लोगों में पोस्ट कोविड-19 सिंड्रोम देखने का मिल रहा है। मतलब मरीज कोरोना से ठीक तो हो रहे हैं, लेकिन उनमें कोरोना का कोई न कोई लक्षण बाकी रह जा रहा है।

री-इंफेक्शन्स के भी ज्यादा केस आ रहे हैं। हालांकि, हर किसी में यह सीरियस ही होगा, यह कहना थोड़ा मुश्किल है। इसलिए वे लोग जो कोरोना से ठीक हो चुके हैं, उन्हें भी सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और हाथ धोने जैसी बेसिक गाइडलाइन का पालन पहले की ही तरह करना चाहिए।

ठीक हुए मरीजों को क्या दिक्कतें हो रही हैं?

दोबारा कोरोना होने को लेकर जो रिसर्च रिपोर्ट आ रही हैं, वो डराने वाली हैं। ब्रिटेन में हुई एक स्टडी में पता चला है कि कोविड-19 के मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी कई लक्षणों का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीजों में दो-तीन महीनों तक सांस फूलने, थकान, चिंता और अवसाद जैसे लक्षण दिख रहे हैं।

रिसर्च में क्या पता चला?

  • ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना होने के दो-तीन महीने बाद भी 64% मरीजों में सांस की समस्या, 55% मरीजों में थकावट की परेशानी देखी गई। MRI स्कैन में 60% मरीजों के फेफड़ों, 29% की किडनी, 26% के दिल और 10% मरीजों के लीवर असमान्य दिखे, यानी उनके शरीर के ये अंग ठीक तरह से नहीं काम कर रहे थे।
  • ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने जिन 58 कोरोना मरीजों पर रिसर्च की है, उनमें से कई लोगों के ऑर्गन एबनॉर्मल पाए गए। आर्गन्स में सूजन भी देखने को मिली।
  • ब्रिटेन के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना से ठीक होने के बाद भी संक्रमण का असर लंबे समय तक रह सकता है। यह शरीर और दिमाग पर भी गहरा असर डाल रहा है।
  • अमेरिका में न्यूजर्सी के डॉक्टरों ने दावा किया है कि कोरोना से ठीक होने के बाद जब दूसरी बार किसी को संक्रमण होता है तो मरीज की स्थिति बहुत गंभीर हो जाती है।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ नवादा में डॉक्टर मार्क पैंडोरी का कहना है कि एक बार कोरोना से संक्रमित होने का मतलब यह कतई नहीं है कि अब दोबारा संक्रमण का खतरा नहीं है। दूसरी बार कोरोना होने की संभावना आपकी इम्युनिटी पर निर्भर करती है।

आर्गन्स पर क्या असर छोड़ रहा है कोरोना?
डॉ. उमा कहती हैं- कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों का सीटी स्कैन करने पर कई चौंकाने वाली चीजें भी देखने को मिल रही हैं। ठीक हुए मरीजों के आर्गन्स पर संक्रमण का गहरा असर हो रहा है। उनके आर्गन्स डैमेज भी हो रहे हैं। कई मरीजों के लंग्स सही से काम नहीं कर रहे हैं। ए-सिम्प्टमेटिक (जिनमें लक्षण दिखाई नहीं देते) मरीजों में भी ये लक्षण देखने को मिल रहे हैं।

दोबारा कोरोना क्यों हो रहा है?
डॉ. उमा कहती हैं कि कोई भी वायरस जब ज्यादा समय तक वातावरण में रहता है, तो वह माइल्ड होगा या ज्यादा खतरनाक होगा। रिस्क दोनों तरह का होता है। कोरोना से ठीक हुए कुछ मरीजों में एंटीबॉडीज डेवलप नहीं हो पा रही हैं। कुछ मरीजों में एंटीबॉडीज डेवलप हो रही हैं, पर तीन-चार महीने में खत्म भी हो जा रही हैं।

आइए समझते हैं कि कोरोना कैसे दोबारा हो रहा है?

अमेरिका में 25 साल के एक लड़के को दो बार कोरोना हुआ। दूसरी बार लक्षण बहुत ज्यादा गंभीर थे। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। फेफड़ा शरीर में कम मात्रा में ही ऑक्सीजन सप्लाई कर पा रहा था। इस लड़के की केस स्टडी लैंसेट मैगजीन में प्रकाशित हुई है। इसे ऐसे समझते हैं...

25 मार्च- गले में खराश और खांसी शुरू हुई। सिर दर्द और डायरिया भी हो गया।

18 अप्रैल- जांच में पॉजिटिव रिपोर्ट आई।

27 अप्रैल- शुरुआती सिंप्टम्स पूरी तरह से गायब हो गए।

9 और 26 मई- दो बार टेस्ट कराया दोनों बार निगेटिव आया।

28 मई- दूसरी बार सिम्पटम्स दिखाई दिए। इस बार बुखार, सिर दर्द, खांसी, जुकाम, डायरिया हुआ।

5 जून- दूसरी बार पॉजिटिव आया। सांस लेने में भी दिक्कत थी।

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