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यूरोप में काऊ थैरेपी का नया ट्रेंड:सुकून चाहिए तो गाय के साथ वक्त बिताएं; अकेलापन और तनाव भी दूर होगा

एक महीने पहलेलेखक: गौरव पांडेय
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  • नीदरलैंड्स में लोग गायों के साथ वक्त बिताने के लिए एनिमल फार्म हाउस जा रहे
  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक- जानवरों से आप जितना जुड़ेंगे, उतना ज्यादा खुश रहेंगे

हर किसी को जिंदगी में सुकून की तलाश होती है। इसी को हासिल करने के लिए नीदरलैंड्स में एक नया ट्रेंड शुरू हुआ है। नाम है 'काऊ नफलेन'। मतलब गायों काे गले लगाइए और सुकून पाइए।

लोग गायों को गले लगाने के लिए किसी फार्म हाउस जाते हैं और वहां किसी एक गाय के साथ घंटों सटकर बैठते हैं। लोगों का कहना है कि इससे उन्हें मानसिक शांति मिलती है। नीदरलैंड से निकलकर अब यह ट्रेंड धीरे-धीरे यूरोप के कई और देशों में भी मशहूर हो रहा है। एक्सपर्ट्स इसे काऊ थैरेपी भी बता रहे हैं।

इस बारे में हमने हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल में कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रज्ञा रश्मि से बात की। वह कहती हैं कि यह बात तो सच है कि घरेलू जानवरों में भावनाएं पाई जाती हैं। यदि इंसान उनसे जुड़ता है तो नॉन वर्बल रिलेशन बनाता है तो लोगों को सुकून का एहसास होता है।

इसलिए आप जितना ज्यादा पशु-पक्षियों के साथ रहेंगे, उतना खुश रहेंगे। आपका तनाव कम होगा। जैसे आप जब नदी या झील के किनारे बैठते हैं तो पैसिव इंट्रैक्शन होता है, उसी तरह जानवरों के साथ बैठने से एक्टिव इंट्रैक्शन होता है।

जानवरों के भय को दूर करने से स्‍वभाव में विनम्रता आती है
डॉक्टर प्रज्ञा कहती हैं जानवरों के साथ रहने से हमें अकेलेपन का एहसास नहीं होता है। आप बच्चों को जिम्मेदारी का एहसास दिलाने के लिए भी गाय, बकरी, कुत्ता या कोई और भी जानवर घर में रख सकते हैं। उनकी देखभाल की जिम्मेदारी बच्चों को दे सकते हैं। जानवरों को जब सहलाते हैं तो उनका भय दूर होता। इससे आपके स्वभाव में विनम्रता आती है।

भारत में तो यह सदियों पुरानी परंपरा है
यूरोपीय देशों में ये चीजें अब हो रही हैं, भारत में तो ये सदियों पुरानी परंपरा है। पहले हर घर में गाय होती थी। हमारे देश में गायों को पालने और उनके साथ रहने का कल्चर है। हम गाय को रोटी देते हैं। हालांकि अब ये चीजें कम हो रही हैं।

काऊ थेरेपी क्या है?

  • गाय की पीठ थपथपाना और उसके साथ सटकर बैठना या उसे गले लगा लेना, चूमना ये सब इस काऊ थेरेपी का हिस्सा है।
  • अगर गाय पलटकर आपको चाटती है तो वो बताती है कि आपके और उसके बीच विश्वास कितना गहरा है।
  • गाय के शरीर का गर्म तापमान, धीमी धड़कनें और बड़ा आकार सटकर बैठने वालों के मन को शांति का एहसास देता है। खुशी मिलती है।
  • सटकर बैठने से गायों को भी अच्छा महसूस होता है। ये चीजें उनकी पीठ खुजलाने जैसा है।

गायों के पास बैठने से इंसान में ऑक्सीटोसिन हार्मोन निकलता है

  • कुछ रिसर्च में पाया गया है कि गायों को गले लगाने, उनके पास बैठने से लोगों के शरीर में ऑक्सीटोसिन निकलता है और इससे उन्हें अच्छा महसूस होता है। ये हार्मोन तब निकलता है, जब आप किसी सुखद संपर्क में आते हैं। ऑक्सीटोसिन से मन में संतुष्टि का भाव आता है। इससे तनाव भी कम होता है।
  • 2017 में हुए शोध के मुताबिक गायों को जब उनकी गर्दन और पीठ के कुछ खास हिस्सों पर मसाज किया गया तो वो शांत हुईं। गायें फैलकर लेटी और उनके कान भी नीचे गिर गए। इस वक्त जाे लोग उनके पास थे, उनके मन को सुकून मिला। ये शोध एप्लाइड एनिमल बिहेवियर साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ था। हालांकि भारत में ये बात बहुत कॉमन है।

गायों के पास बैठकर अमेरिका, स्विट्जरलैंड में लोग तनाव दूर कर रहे
करीब एक दशक पहले नीदरलैंड्स के ग्रामीण इलाकों में जानवरों के साथ समय बिताने की ये संस्कृति शुरू हुई थी। अब वहां इस चीज को बड़ी संख्या में लोग फॉलो कर रहे हैं। इसके जरिए लोग खुद को गांवों से जोड़ रहे हैं। यही काम स्विट्जरलैंड, अमेरिका में भी लोग कर रहे हैं। यहां लोगों का कहना है कि यह थैरेपी जैसी है, इससे उनका तनाव कम होता है।

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