मेरा चार्जर नहीं मिल रहा:ये परेशानी होगी कम, एक ही चार्जर से घर के सारे डिवाइस होंगे चार्ज; पर्यावरण भी रहेगा सेफ

4 महीने पहलेलेखक: एकता सिन्हा

फोन का अलग चार्जर है, ईयरफोन का अलग, लैपटॉप का अलग, फिटनेस बैंड का अलग, पॉवर बैंक रखो तो उसका अलग चार्जर है। परिवार के हर सदस्य के पास अपना-अपना चार्जर है। जिस सदस्य के पास जितने अलग और ज्यादा गैजेट, उतने ही चार्जर होते हैं। पापा का चार्जर बेटा यूज नहीं कर सकता, बेटे का मम्मी। बहन के पास तो OnePlus है, इसका मतलब उसका चार्जर परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए बेकाम का।

ये सब पढ़कर कंफ्यूज हो गए न आप! चलो फिर एक अच्छी खबर सुनाती हूं…

पिछले कुछ दिनों से एक खबर आ रही थी कि अब एक कॉमन चार्जर से ही आपका मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्टफोन और दूसरे डिवाइस चार्ज हो जाएंगे। अब इन तमाम चीजों के लिए अलग-अलग चार्जर की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस बारे में 17 अगस्त, यानी आज मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स एक मीटिंग करने जा रही है।

ऐसे में आपके मन में भी कुछ सवाल होंगे कि आखिरकार यह कदम उठाने की जरूरत सरकार को क्यों पड़ रही है? इसके बाद क्या iphone वालों को भी C टाइप चार्जर यूज करना होगा? इन सारे सवालों का जवाब आज जरूरत की खबर में जानेंगे।

सवाल 1– सरकार क्यों चाहती है कि एक ही चार्जर से सारे गैजेट चार्ज हों? यानी सरकार को यह कदम उठाने की जरूरत क्यों पड़ी?
जवाब-
दरअसल पिछले साल नवंबर में ग्लासगो में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन यानी COP 26 में प्रधानमंत्री मोदी ने LIFE यानी पर्यावरण के लिए लाइफस्टाइल कॉन्सेप्ट की घोषणा की थी। सरकार लगातार ई-कचरे को कम करने के लिए काम कर रही है। सरकार चाहती है कि 2030 तक GDP के इमिशन इंटेंसिटी यानी उत्सर्जन तीव्रता को 45% कम कर दिया जाए।

सवाल 2– ई-कचरा किसे कहते है?
जवाब–
E-Waste या फिर Electronic Waste उन्हीं electrical goods को कहा जाता है, जिन्हें हम यूज करने के बाद dump या discard कर देते हैं। जैसे-जैसे पॉपुलेशन बढ़ रही है, वैसे-वैसे हमारी जरूरतें भी बढ़ रही हैं। घर के हर सदस्य के पास पर्सनल गैजेट है। इस वजह से E Waste की संख्या भी बढ़ रही है।

आपको लग रहा होगा कि ई-वेस्ट से सिर्फ पर्यावरण को नुकसान होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं, इसकी वजह से आपकी हेल्थ भी बिगड़ सकती है। ई-वेस्ट से निकलने वाले केमिकल से इन चीजों पर इफेक्ट पड़ सकता है। जैसे-

  • लिवर और किडनी से जुड़ी बीमारियां
  • कैंसर और लकवा का खतरा

सवाल 3 – 17 अगस्त को होने वाली मीटिंग में कौन-कौन शामिल होंगे?
जवाब–
मिनिस्ट्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स इनोवेशन कंसोर्टियम (EPIC) फाउंडेशन के प्रतिनिधि, यानी रिप्रेजेंटेटिव के साथ दूसरे स्टेक होल्डर को बुलाया है।

  • सूचना प्रौद्योगिकी के लिए निर्माता संघ (MAIT)
  • फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI)
  • भारतीय उद्योग परिसंघ (CII)
  • एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (ASSOCHAM)
  • उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरण निर्माता संघ (CIAMA)
  • इंडियन इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AEEMA)

इनके अलावा, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT कानपुर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (BHU), और इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन को भी बुलाया है।

सवाल 4– एक ही चार्जर यूज करने के नियम पर किस कंपनी पर ज्यादा असर पड़ेगा?
जवाब–
चूंकि सभी फोन, लैपटॉप, ईयरबड्स आदि को चार्ज करने के लिए एक ही चार्जर को यूज करने की बात कही जा रही है, ऐसे में माना जा रहा है, Apple पर इसका ज्यादा असर होगा। अभी Apple के iPhone चार्जिंग के लिए लाइटिंग पोर्ट यूज हो रहा है। इसके लिए Android फोन की तुलना में एक अलग केबल की जरूरत होती है।

  • यदि आपके पास एक iPhone और एक MacBook Air M1 है, तो आपको दो अलग-अलग चार्जर की जरूरत होगी।
  • वहीं आपके पास नया iPad और MacBook है, तो आप उन दोनों को एक ही टाइप-C केबल से चार्ज कर सकते हैं।
  • जबकि Apple ने MagSafe चार्जिंग को नए M2- ऑपरेटेड मैकबुक पर फिर से शुरू किया है, इसे यूज करने के लिए टाइप-C चार्जिंग की जरूरत होती है।

सवाल 5– इसका मतलब यह है कि इसके बाद iPhone वालों को भी टाइप C चार्जर यूज करना होगा?
जवाब–
हां, बिलकुल सही। उन्हें भी Android फोन वालों की तरह USB-C टाइप चार्जर यूज करना होगा।

सवाल 6– क्या आईफोन अब USB टाइप C चार्जिंग के साथ आएगा?
जवाब–
iPhone पर पोर्ट स्विच करने की बात पर Apple की सोच क्या है इस बारे में पूरी तरह से अभी कुछ कहना सही नहीं है। Macbook और iPad पहले से Type C चार्जिंग पर हैं। Apple ऐसा करेगा इस बारे में काफी दिनों से बातचीत हो रही है। 2022 में ऐसा संभव नहीं हो पाएगा, लेकिन अगर वन फोन, वन चार्जर वाला नियम लागू हो जाता है, तो 2023 में स्विच करना पड़ सकता है।

क्या है USB

  • इसका पूरा नाम– यूनिवर्सल सीरियल बस है।
  • इसकी मदद से सभी केबल एक ही पोर्ट में कनेक्ट किए जा सकते हैं।
  • डेटा और पावर एक डिवाइस से दूसरी डिवाइस तक आसानी से भेज सकते हैं।
  • ये तीन तरह का होता है– A, B, और C
  • USB Type A फ्लैट और बड़ा होता है, इसे माउस, पेन ड्राइव और कीबोर्ड में यूज किया जाता है।
  • USB Type B यह चौकोर और बड़ा होता है। इससे स्कैनर, प्रिंटर और हार्ड ड्राइव लगाए जाते हैं।
  • USB Type C यह छोटा होता है। इससे कैमरा, एमपी--3 प्लेयर आसानी से कंप्यूटर के साथ जोड़े जा सकते हैं।

सवाल 7– अभी मार्केट में कौन-कौन से ब्रांड के फोन Type C चार्जर यूज कर रहे हैं?
जवाब–
सैमसंग, शाओमी, ओप्पो, वीवो और रियलमी, मोटोरोला ने टाइप C चार्जिंग पोर्ट वाले फोन पर स्विच कर लिया है।

सवाल 8– टाइप C पोर्ट और चार्जर की कीमत क्या है? जवाब- 100 से 150 रुपए से कीमत से शुरू होती है।

सवाल 9– अभी क्या किसी और देश ने इस नियम को लागू किया है?
जवाब–
यूरोपीय संघ यानी EU में इस बात पर सहमति बन चुकी है कि साल 2024 से सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस एक जैसा चार्जर इस्तेमाल करेंगें। 2024 तक, USB Type C यूरोपीय संघ में सभी मोबाइल फोन, टैबलेट और कैमरों के लिए चाजिंर्ग पोर्ट बनाया जाएगा।

यूरोपीय संघ का मानना है कि इस फैसले से कंज्यूमर बिना वजह चार्जर खरीद पर हर साल 250 मिलियन यूरो (267 मिलियन डॉलर), यानी 2,075 करोड़ रुपए तक की बचत कर पाएंगे। एक जैसे चार्जर मिलेंगे तो करीब 11 हजार टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा भी कम हो सकता है।

क्या आपको पता है कि

  • एक स्मार्ट फोन को बनाने में 86 किलो ई–वेस्ट निकलता है
  • एक लैपटॉप को बनाने में 1200 किलो ई–वेस्ट निकलता है

सोर्स– रीसाइकलिंग ऑर्गनाइजेशन

चलते-चलते

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर 2020 के मुताबिक…

  • 2019 में करीब 5.36 करोड़ मीट्रिक टन ई-वेस्ट निकला था। 2030 में बढ़कर 7.4 करोड़ मीट्रिक टन पर पहुंच जाएगा।
  • 2019 में अकेले एशिया में सबसे ज्यादा 2.49 करोड़ टन कचरा निकला था।
  • इसके बाद अमेरिका में 1.31 करोड़ टन, यूरोप में 1.2 करोड़ टन, अफ्रीका में 29 लाख टन और ओशिनिया में 7 लाख टन इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट निकला था।

भारत में कितना ई-वेस्ट निकलता है?

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने दिसंबर, 2020 में एक रिपोर्ट जारी की थी, जिससे पता चला है कि 2019-20 में देश ने 10,14,961.2 टन ई-वेस्ट पैदा किया था।

रिपोर्ट में बताया गया कि 2017-18 और 18-19 के लिए ई-कचरा कलेक्शन का लक्ष्य क्रमश: 35,422 टन और 154,242 टन था। हकीकत में कलेक्शन 25,325 टन और 78,281 टन रहा। इसका मतलब यह निकला कि 2018 में केवल 3 फीसदी कचरा कलेक्ट किया गया था। जबकि 2019 में वो केवल 10 फीसदी था।

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