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नई स्टडी में दावा:फेस शील्ड और वाल्व वाले मास्क आरामदायक, लेकिन सुरक्षित नहीं; इनकी तुलना में कपड़े का मास्क बेहतर

3 महीने पहले
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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ नहीं से कुछ होना बेहतर है। खांसी या छींक से निकले बड़े कणों को रोक लेती हैं फेस शील्ड्स।
  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फेस शील्ड खांसी या छींक से निकले बड़े पार्टिकल्स को रोकते हैं, एयरोसोल्स को नहीं
  • मास्क के साथ फेस शील्ड को पहनना अच्छा उपाय, लेकिन अकेले पहनने पर मिलेगी न के बराबर सुरक्षा

तारा पार्कर पोप. महामारी के दौरान क्या अगर आप भी खुद को संक्रमण से बचाने के लिए फेस शील्ड या वाल्व मास्क का सहारा ले रहे हैं तो सावधान हो जाएं। क्योंकि नई स्टडी के मुताबिक, ज्यादा आरामदायक नजर आने वाले ये दोनों मास्क वायरल पार्टिकल्स के खिलाफ कम प्रभावी नजर आ रहे हैं।

इससे पहले सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन भी प्लास्टिक फेस शील्ड और वेंट वाले मास्क या वाल्व के इस्तेमाल को लेकर मना कर चुकी है। हालांकि, लेजर के जरिए हुई नई स्टडी में यह साफ हुआ है कि पार्टिकल्स के बड़े कण फेस शील्ड या वेंटेड मास्क से निकलकर बाहर जा सकते हैं।

वर्जीनिया टेक में सिविल और एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर लिंसे मार ने कहा, "मुझे लगता है कि ये विजुअल वास्तव में जनता को समझने में मदद करने के लिए ताकतवर है कि क्या हो रहा है।"

टीचर्स और छात्र फेस शील्ड ही पसंद करते हैं
आमतौर पर टीचर्स और स्टूडेंट्स फेस शील्ड्स पहनना पसंद करते हैं। क्योंकि इसे वे आरामदायक तरीके से लंबे समय तक पहन सकते हैं। इन्हें आसानी से साफ कर लिया जाता है और बातचीत के दौरान भी सहायक होते हैं। क्योंकि, इन्हें पहनकर बात करने से आवाज भी नहीं अटकती और चेहरे के हावभाव नजर आते हैं।

वाल्व मास्क सांस लेने में आसानी और जर्म्स को अंदर आने से रोकने के लिए तैयार किए गए थे। इस मास्क में नमी आने में वक्त लगता है। हालांकि, जर्नल फिजिक्स ऑफ फ्लुड्स में प्रकाशित नई रिसर्च दिखाती है कि फेस शील्ड और वाल्व वाले मास्क बड़े पार्टिकल्स को नहीं रोकते हैं और आसपास में मौजूद लोगों को जोखिम में डालते हैं।

रिसर्च में यह नहीं देखा गया कि शील्ड और मास्क पहनने वाले को किस स्तर की सुरक्षा देते हैं। हालांकि, इससे यह पता चलता है कि इन्हें पहनने वाले लोगों को वायरस के संपर्क में आने का खतरा हो सकता है।

कैसे हुई स्टडी
रिसर्च के लिए फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अलग-अलग तरीके से चेहरे को कवर किए हुए खोखले प्लास्टिक के सिर का इस्तेमाल किया। उन्होंने छींक या खांसी के लिए ग्लिसरीन और डिस्टिल्ड वॉटर के घोल का उपयोग किया। इसके बाद उन्होंने लेजर्स का इस्तेमाल कर इनके चलने वाले रास्ते का पता लगाया।

दो अलग-अलग स्टडीज में शोधकर्ताओं ने दिखाया कि सबसे अच्छे मास्क से भी कुछ पार्टिकल्स बाहर निकल सकते हैं। टेस्ट के वीडियो में N95 मास्क में से भी नाक के उस तरफ से कुछ पार्टिकल्स निकलते नजर आ रहे हैं, जहां फिटिंग कमजोर है। शोधकर्ताओं ने पाया कि N95, कपड़े के मास्क सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे एक व्यक्ति को अच्छी सुरक्षा देते हैं।

जब फेस शील्ड या वाल्व मास्क का उपयोग किया गया, तो परिणाम अच्छे नहीं रहे। फेस शील्ड ने खांसी से निकलने वाले पार्टिकल्स के शुरुआती फैलाव को रोक लिया, लेकिन लेजर से पता चला कि एयरोसोल वाले पार्टिकल्स शील्ड के नीचे से बाहर आ गए। फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी में ओशियन और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर सिद्धार्थ वर्मा ने कहा, "मास्क फिल्टर्स का काम करते हैं और असल में उन ड्रॉपलेट्स और दूसरे पार्टिकल्स को रोकते हैं, जो हमने छोड़े हैं। शील्ड ऐसा नहीं कर पाती।

अगर ड्रॉपलेट्स का आकार बड़ा होगा तो शील्ड उन्हें रोक लेगी, लेकिन अगर कण 10 माइक्रॉन या इससे छोटे आकार के हुए तो वे शील्ड की साइड या नीचे से बाहर निकल जाएंगे। निकाली गई हर चीज की कमरे में फैलने की संभावना बढ़ जाती है।"

N95 ने किया बेहतर प्रदर्शन
टेस्टिंग के दौरान जब N95 मास्क की जांच की गई तो पाया कि पार्टिकल्स का एक बड़ा बादल वाल्व के जरिए बाहर आ गया। हालांकि, मास्क में मौजूद वेंट के कारण ये पार्टिकल्स नीचे की तरफ निकल गए। कई बार कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के काम आने वाला स्टैंडर्ड N95 मास्क ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन के मानकों पर खरा उतरा।

इसके बाद भी वाल्व वाले मास्क को मेडिकल हालातों में स्टेराइल करने की अनुमति नहीं है, क्योंकि ये पहनने वाले के जर्म्स को बाहर निकलने का मौका देते हैं। महामारी के दौरान वाल्व वाले की मास्क बाजार में नजर आए, लेकिन सही दिखने वाले वाल्व भी वास्तव में काम नहीं कर रहे थे।

वाल्व वाले मास्क के मामले में जब आप सांस छोड़ते हैं तो एक छोटी डिस्क ऊपर उठती है और हवा को बाहर निकलने देती है, लेकिन जब आप सांस अंदर खींचते हैं तो यह डिस्क टाइट हो जाती है और हवा को अंदर नहीं आने देती।

स्टडी के सह लेखक और यूनिवर्सिटी के ओशियन और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के चेयरमैन मनहार आर धानक ने कहा, "हमने जो पाया है वह यह है कि उस वाल्व के जरिए सबकुछ बाहर निकल जाता है। कुछ गैर N95 मास्क में वाल्व केवल कॉस्मैटिक का काम करता है। ये वाल्व काम नहीं कर पाते, क्योंकि खराब क्वालिटी के होते हैं। ऐसे में डिस्क अंदर और बाहर नहीं निकलती, जैसा कि हम उम्मीद करते हैं।"

स्टडी के जरिए वैज्ञानिकों ने अलग-अलग मास्क और शील्ड के प्रभाव की तुलना की। स्टडी में शामिल मैथड ने कितने पार्टिकल बचकर निकलते हैं, इसकी संख्या नहीं बताई है।

6 साल पुरानी स्टडी में बताया गया था फेस शील्ड को असरदार
2014 में आई एक स्टडी को आमतौर पर फेस शील्ड के ज्यादा सुरक्षा देने के सबूत के तौर पर उपयोग किया जाता था। हालांकि, इस स्टडी में भी पता चला था कि फेस शील्ड के फायदे सीमित हैं। जब फेस शील्ड पहनने वाले को बड़े पार्टिकल्स से सुरक्षा देती है, वहीं यह छोटे पार्टिकल्स और एयरोसोल्स के मामले में कम असरदार है। खांसी के बाद बड़े पार्टिकल्स जमीन पर ठहर जाते हैं, जबकि छोटे कण पूरे रूम में फैल जाते हैं। फेस शील्ड सांस के जरिए एयरोसोल्स के अंदर जाने की संभावना को केवल 23 फीसदी कम करती है।

शोधकर्ताओं ने लिखा था "फेस शील्ड हेल्थ केयर वर्कर्स के बड़े पार्टिकल्स के संपर्क में आने को काफी हद तक कम कर सकती हैं, लेकिन छोटे पार्टिकल्स हवा में काफी वक्त तक बने रहेंगे और फेस शील्ड के आसपास उड़ते रहेंगे।" शोधकर्ताओं के अनुसार, फेस शील्ड को मास्क के साथ सुरक्षा के तौर पर तो पहना जा सकता है, लेकिन विकल्प के तौर पर नहीं।

फेस शील्ड के मुकाबले मास्क वाले ज्यादा सुरक्षित
स्विट्जरलैंड में स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि होटल में वायरस फैलने के दौरान फेस शील्ड पहने कर्मचारी संक्रमित हुए, जबकि ट्रैडीशनल मास्क पहने कर्मचारी सुरक्षित रहे। डॉक्टर मार ने कहा कि उनकी लैब में भी यह पता चला है कि फेस शील्ड्स एयरोसोल्स के मामले में नहीं के बराबर सुरक्षा देते हैं।

ऐसा माना जाता है कि वायरस फैलने में एयरोसोल्स कण जरूरी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा "यह शायद 5 प्रतिशत तक सुरक्षा देते हैं। हम जिन कणों को लेकर चिंतित हैं, उनके मामले में यह लगभग नहीं के बराबर है।"

कुछ लोगों के लिए जरूरी है फेस शील्ड्स
किसी मजबूरी का शिकार बच्चे मास्क के बजाए फेस शील्ड पहनना ज्यादा पसंद करेंगे। एक साफ प्लास्टिक फेस शील्ड ऐसे केयर टेकर के लिए भी फायदेमंद हो सकती है, जो सुनने में असमर्थ व्यक्ति से बात करते हैं। भले ही प्राप्तियां बताती हैं कि कपड़े या सर्जिकल मास्क ज्यादा सुरक्षा देता है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कुछ नहीं से कुछ बेहतर है और फेस शील्ड भी बड़े कणों को रोकने में मदद करती है।

कुछ लोगों के लिए कम से कम दो परतों वाला और नाक से लेकर ठुड्डी तक कवर करने वाला कपड़े का मास्क अच्छा ऑप्शन है। मास्क के साथ फेस शील्ड ज्यादा सुरक्षा देगा और उन लोगों के लिए ज्यादा मददगार होगा जो रोज बाहर किसी न किसी के संपर्क में आते हैं।

डॉक्टर वर्मा का कहना है, "घर में बना हुआ एक अच्छा कपड़े का मास्क बढ़िया काम करता है। अगर वह आरामदायक है तो उसे लंबे वक्त तक पहना जा सकता है। केवल फेस शील्ड्स और वाल्व वाले मास्क पहनने से बचें।"

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