दंगल गर्ल को है मिर्गी की बीमारी:शेफाली जरीवाला को भी पड़ते थे दौरे; क्या है इसका इलाज?

14 दिन पहलेलेखक: अलिशा सिन्हा

दंगल गर्ल फातिमा सना शेख को तो आप जानते ही हैं। एक्ट्रेस ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि उन्हें मिर्गी की बीमारी है। वो इसे एक्सरसाइज और मेडिसिन की मदद से ठीक करने की कोशिश कर रही हैं। दंगल के सेट पर उन्हें इस बीमारी के बारे में सबसे पहले पता चला। वो अब इस बीमारी के साथ जीना सीख गई हैं।

नवंबर का महीना राष्ट्रीय मिर्गी जागरूकता माह (National Epilepsy Awareness Month) के रूप में मनाया जाता है।कल यानी 17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस भी है।

ऐसे में मिर्गी से जुड़े कुछ सवालों का जवाब जानते हैं और साथ ही यह समझते हैं कि जूते सूंघाओ, झाड़-फूंक करवाना होगा, इससे शादी कौन करेगा, अब ऐसे तमाम मिथ की असली सच्चाई क्या है?

खबर में आगे बढ़ने से पहले इस पोल पर अपनी राय दे दीजिए-

अब पढ़ें 3 कहानी, ऐसी लड़कियों की जिन्हें मिर्गी के दौरे की वजह से, कभी रिजेक्शन झेलनी पड़ी, तो कभी जिंदगी बहुत कुछ सिखा गई…

कहानी नंबर -1
मानसी ने मिर्गी के दूसरे पेशेंट को देखकर बदली अपनी जिंदगी-

मैं मानसी। मेरी जिंदगी का सबसे कठिन समय तब आया, जब मैं 13 साल की थी। एक दिन जब मैं कार्टून देखकर हंस रही थी। तभी अचानक मुझे लगा की टेलीविजन मुझे अपनी तरफ खींच रहा है। जब मैंने अपनी आंखें खोली तो, मैं अपने परिवार वालों और एक पड़ोसन से घिरी हुई थी। पड़ोसन नर्स थी, उसने बताया कि मुझे मिर्गी का दौरा आया। परिवार को झटका लगा। इलाज के दौरान कई डॉक्टर्स बदले गए। एक दिन जब मैं एग्जाम दे रही थी, तब एक लड़की बाहर फर्श में गिरी और उसे भी मिर्गी का दौरा आया। इस घटना ने मेरी पूरी जिंदगी बदल दी। मैंने मिर्गी के साथ आगे बढ़ने का सोचा और आज भी मैं दवाएं ले रही हूं। खुश हूं, संतुष्ट हूं और मैंने खुद को अपनाना सीख लिया है। भीड़भाड़ और ब्राइट रोशनी को अवॉएड करती हूं। मिर्गी पर लोगों को जागरूक करती हूं। बस इसी तरह मैंने जीना सीख लिया है और इसे बहुत हद तक कंट्रोल कर लिया है।

कहानी नंबर- 2
इंटरव्यू देने पहली बार गई थी, वहां पड़ गया दौरा, नहीं मिली जॉब

मैं अपना नाम नहीं बताना चाहती। आपको नहीं पता, पढ़े-लिखे लोग भी हमारा साथ नहीं देते। उन्हें लगता है कि हम नॉर्मल लाइफ जी ही नहीं सकते। पेरेंट्स ने हमेशा जिंदगी में पॉजिटिव रहना सिखाया है। मेरी बीमारी को भी मुझ पर हावी होने नहीं दिया। बस वो मुझे अपने से दूर जाने नहीं देना चाहते थे। मेरा डॉक्टरी इलाज चल रहा था। इसके बावजूद साल में एक या दो बार दौरा पड़ जाता था। मैं फैशन डिजाइनर बनना चाहती थी। कोर्स भी पूरा किया, इंटर्नशिप अपने ही शहर में की। जॉब के लिए ट्राई कर रही थी। मुंबई से एक ऑफर आया। पहली बार सपनों की नगरी में इंटरव्यू देने गई। इंटरव्यू वाले दिन मैं बहुत नर्वस थी। ऐसा सबके साथ होता है। पापा-मां मेरा हौसला बढ़ा रहे थे। आधे घंटे इंतजार के बाद जब मेरा टर्न आया तो कुर्सी से उठते ही मुझे अटैक आ गया। मैं नीचे गिर पड़ी। उसके बाद कुछ याद नहीं। कुछ घंटों के बाद मैं पास के अस्पताल में थी। HR की टीम का एक बंदा वहां था, उसने बोला मैडम आप दिल्ली वापस लौट जाएं। इतनी दूर नौकरी करने का रिस्क मत लीजिए।

कहानी नंबर -3
कांटा लगा सॉन्ग हिट हुआ, मिर्गी की वजह से मैं ज्यादा काम नहीं कर सकती थी

मेरा नाम शेफाली जरीवाला है। 2002 में जब कांटा लगा गाना रिलीज हुआ, तब लोगों को लगा यह बहुत अच्छा काम करेगी। ऐसा हो नहीं सका। मैं लाइमलाइट से दूर हो गई। मुझे मिर्गी के दौरे पड़ते है। इस वजह से ज्यादा काम का लोड नहीं ले सकती। ऐसा मेरे साथ 15 साल की उम्र से हो रहा है। तब मुझ पर पढ़ाई में अच्छा करने का प्रेशर था। जैसे ही ज्यादा स्टेस लेती, एंग्जाइटी होने लगती। इस वजह से मिर्गी के दौरे पड़ते। फिर डिप्रेशन में रहने लगी। इससे भी मिर्गी के दौरे पड़ने लगे। क्लासरूम, बैक स्टेज, रोड पर...कई जगहों पर दौरे पड़े हैं मुझे। आज मैंने डिप्रेशन, पैनिक अटैक्स और मिर्गी पर काबू किया है। इसमें मेडिटेशन और योगा ने भी मदद की है।

अब कुछ सवालों के जवाब पढ़िए...

सवाल- मिर्गी क्या है?
जवाब-
ये दिमाग से जुड़ी एक तरह की बीमारी है। ब्रेन के सर्किट में स्पार्किंग ज्यादा होने की वजह से इसके मरीज को मिर्गी के दौरे पड़ते हैं। मेडिकल साइंस में इसके दौरे को न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर कहा जाता है।

सवाल- दुनियाभर में और भारत में मिर्गी के मरीजों की संख्या कितनी है?
लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार…

  • दुनिया भर में लगभग 5 करोड़ लोग मिर्गी की बीमारी से जूझ रहे हैं।
  • इनमें से लगभग एक से 1.2 करोड़ लोग भारतीय हैं।

सवाल- गांव के लोग मिर्गी को छूआछूत से जोड़कर देखते हैं, टोने-टोटके से इसे ठीक करने की कोशिश करते हैं, इससे बीमारी ठीक हो सकती है या नहीं?
जवाब-
मेडिकल साइंस इन सारी चीजों को बिल्कुल भी नहीं मानता है। साइंस की मानें, तो इससे मरीज की हालत ठीक होने के बजाय और बिगड़ सकती है। इसलिए झाड़-फूंक या टोना-टोटका के चक्कर में न पड़ें।

सवाल- डॉक्टर मिर्गी के दौरे की पहचान कैसे करते हैं?
जवाब-
MRI और EEG टेस्ट के जरिए मिर्गी की पहचान आसानी से डॉक्टर कर सकते हैं।

सवाल- मिर्गी के दौरे अगर किसी व्यक्ति को आते हैं, तो उसमें कैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं?
जवाब-
मिर्गी के दौरे अलग-अलग तरह के आते हैं, दौरे के हिसाब से इसके लक्षण दिखाई देते हैं। हम यहां पर कुछ कॉमन लक्षण बता रहे हैं-

  • अचानक गुस्सा आना
  • कंफ्यूजन फील होना
  • डर
  • एंग्जाइटी
  • अचानक खड़े-खड़े गिर जाना
  • कुछ समय के लिए कुछ भी याद नहीं रहना
  • चक्कर आना
  • लगातार ताली बजाना या हाथ रगड़ना
  • चेहरे, गर्दन और हाथ की मांसपेशियों में बार-बार झटके आना

सवाल- अक्सर कहा जाता है खुले में शौच करने से भी मिर्गी की बीमारी हो सकती है, ये बात कितनी सच है?
जवाब-
दरअसल, बहुत सारे लोगों में मिर्गी होने की वजह ब्रेन में कीड़ा होना भी है। जिसे न्यूरो सिस्टीस सरकोसिस के नाम से जानते हैं। यह खुले में शौच करने के कारण होता है। खुले में शौच करने से पेट में मौजूद टेप वॉर्म यानी कृमि बाहर आ जाता है। यह खेतों में मौजूद सब्जी या पानी में मिल जाता है।

AIIMS की डॉ. मंजरी त्रिपाठी के अनुसार, जब ये सब्जियां आपके घर पर जाती हैं और इसे अच्छी तरह धोए बगैर मोमोज और बर्गर जैसी चीजों में इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे टेपवर्म के आंखों से न दिखने वाले सिस्ट पेट से होकर ब्रेन में पहुंचता है, जो मिर्गी की वजह बनता है।

सवाल- जिन लड़कियों या महिलाओं को मिर्गी का दौरा पड़ता है, वो कभी मां बन सकती हैं?
जवाब-
बिल्कुल, बन सकती हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी के पहले मिर्गी को कंट्रोल कर लिया जाए, तो प्रेग्नेंसी में किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है। प्रेग्नेंसी के सालभर पहले से ही सही दवाइयां शुरू कर देने से बच्चे पर भी बुरा असर नहीं पड़ता है। आज ऐसी दवाएं उपलब्ध है, जिनसे गर्भ के समय मां और बच्चे को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता है।

सवाल- इस बीमारी में मेडिसिन कितने दिनों तक खानी पड़ सकती है?
जवाब-
ये मरीज की बीमारी पर डिपेंड करता है। जरूरी नहीं कि हर मरीज की मेडिसिन 3-5 साल के अंदर बंद हो जाए। कुछ मरीजों को 6 महीने, 1 साल या फिर 1 हफ्ते ही मेडिसिन खाने की जरूरत पड़ती है। कुछ मरीजों को जिंदगी भर मेडिसिन खाने की जरूरत पड़ सकती है।

खबर में आगे बढ़ने से पहले क्यूआरजी हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नजीब उर रहमान क्या कहते हैं, जान लीजिए-

  • मिर्गी से जुड़ी गलत जानकारियों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
  • अच्छे डॉक्टर्स से इसका इलाज करवाना चाहिए।
  • मरीज को अपनी इस बीमारी को फैमिली और डॉक्टर से नहीं छिपाना चाहिए।
  • अच्छे से इलाज लेने पर इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है।

सवाल- अगर किसी को मिर्गी का दौरा पड़े, तो आसपास के लोग, फैमिली या फ्रेंड्स क्या करें और क्या नहीं ?
जवाब-
ऐसे करें मरीज की मदद-

  • गले के कॉलर को ढीला कर मरीज को बाएं करवट में लेटाएं।
  • जबरदस्ती मरीज के शरीर को पकड़ने या फिर दबाने से बचें।
  • मरीज को कुछ भी खिलाएं-पिलाएं नहीं।
  • जूता सुंघाना या फिर हाथ में लोहा पकड़वाने से बचें।

सोर्स- डॉ. प्रभात कुमार सिंह, पूर्व डायरेक्टर, AIIMS

चलिए अब मिर्गी से जुड़े कुछ मिथ की सच्चाई भी बता देते हैं-

मिथ नंबर 1- मिर्गी को ठीक करने के लिए डॉक्टर्स जो दवा देते हैं, उसके बहुत से साइड इफेक्ट्स हैं-
सच्चाई-
इसकी दवा के कुछ साइड इफेक्ट्स हैं। जैसे- सुस्ती, नॉर्मल से ज्यादा नींद आना, वजन बढ़ जाना, लेकिन ये इफेक्ट्स इस बीमारी से बड़े नहीं हैं। हालांकि, जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाइयां बदल भी देते हैं।

मिथ नंबर 2- जिन लोगों को मिर्गी का दौरा पड़ता है, वो एक तरह से पागल होते हैं-
सच्चाई-
ऐसा नहीं है। मिर्गी के मरीज पागल नहीं होते हैं। यह न्यूरो से जुड़ी बीमारी होती है। जिसका सही इलाज मिलने पर मरीज नॉर्मल लाइफ जी सकते हैं।

मिथ नंबर 3- मिर्गी ठीक होने वाली बीमारी नहीं है, इसलिए जिस लड़की को मिर्गी आए, उससे शादी नहीं करनी चाहिए-
सच्चाई-
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। मिर्गी का इलाज संभव है और ये पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है।

मिथ नंबर 4- मिर्गी का मरीज ठीक हो भी जाए, तब भी कई तरह दिक्कतें आती रहती हैं-
सच्चाई-
बिल्कुल नहीं। मिर्गी का मरीज नॉर्मल लाइफ जी सकता है। बस उसे ड्राइविंग, स्विमिंग या एडवेंचर स्पोर्ट्स जैसी कुछ चीजों से परहेज करना पड़ेगा।

मिथ नंबर 5- जब किसी को मिर्गी का दौरा पड़े, तो मरीज को जोर से पकड़ लेना चाहिए-
सच्चाई-
ऐसा न करें। मरीज को कभी भी दबाना नहीं चाहिए। बल्कि उसके आसपास से कोई भी खतरनाक सामान को हटा दें। उसके मुंह को सीधा रखें, कपड़े ढीले कर दें, अगर चश्मा पहना है, तो उसे हटा दें। उसमें मुंह में कुछ भी डालने की कोशिश न करें। जल्द से जल्द अस्पताल ले जाएं।

चलते-चलते

WHO के ये आंकड़े पढ़ लीजिए-

  • मिर्गी की बीमारी से जूझ रहे 80% लोग लोअर और मिडिल इनकम वाले देशों में रहते हैं।
  • अगर ठीक से मरीज की देखभाल और इलाज कराया जाए, तो लगभग 70% लोग इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं।

आज की स्टोरी के एक्सपर्ट थे- डॉ. आत्मा राम बंसल, मिर्गी एक्सपर्ट एंड न्यूरोलॉजिस्ट, मेदांता हॉस्पिटल, गुरुग्राम, डॉ. राजीव गुप्ता, सीके बिरला हॉस्पिटल, सीनियर कंसल्टेंट, गुरुग्राम, डॉ. रोहित गुप्ता, न्यूरोलॉजिस्ट, मेट्रो हॉस्पिटल।

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