साबूदाना फल है या बीज:कभी सोचा है आपने ये बनता कैसे है? कहीं नकली साबूदाना तो नहीं खा रहे; 3 ट्रिक से चेक करें

2 महीने पहले

साबूदाना। जैसे ही कोई व्रत-उपवास आता है, सबके खाने में यह शामिल हो जाता है। साबूदाने की टिक्की, खिचड़ी, खीर उपवास में यह हमारे एक वक्त के खाने में होता ही होता है। कभी सोचा है कि जो साबूदाना आप हर व्रत-त्योहार में खा रहे हैं, वो बनता किस चीज से है।

दिखता तो बीज की तरह है। क्या वाकई यह कोई बीज है? कुछ ने कहा नहीं यह फल है, तभी तो फलहारी कहा जाता है इसे, एक ने तर्क दिया नहीं, नहीं मैंने तो सुना है इसे फैक्टरी में बनाया जाता है। अब इतनी सारी बातें सुन ली कि उपवास में मेरा सिर पूरी तरह घूम गया।

किसी ने कहा- अरे फास्ट है इसलिए चक्कर आ गए होंगे। साबूदाने की खिचड़ी बनी है ऑफिस की कैंटीन में, ले आऊं तुम्हारे लिए… मैंने जवाब दिया नहीं, अब तो तभी खाऊंगी, जब जान जाऊं कि ये है क्या।

तो चलिए आज जरूरत की खबर में जानते हैं साबूदाना वाकई है क्या, यह असली है या नकली। इसकी पहचान कैसे करना चाहिए, इसको ज्यादा खाने से कोई नुकसान तो नहीं...

सवाल: साबूदाना क्या है? यह कैसे बनता है?
जवाब: साबूदाना को इंग्लिश में सागो कहते हैं। यह एक तरह का स्टार्च है।

यह ट्रॉपिकल पाम सागो की स्टेम से निकलता है। पाम सागो के तने के बीच से टैपिओका रूट को निकाला जाता है। इसे कसावा भी कहते हैं। कसावा एक तरह का कंद है, जो शकरकंद की तरह दिखता है। इसे काटकर बड़े बर्तन में रखा जाता है। इसमें रोजाना पानी डालते हैं।

इस प्रोसेस को कई दिनों तक दोहराया जाता है। फिर इसके गूदे को मशीनों में डालकर साबूदाना तैयार किया जाता है। बनने के बाद इसे सुखाया जाता है। फिर इसे ग्लूकोज और स्टार्च से बने पाउडर से पॉलिश कर चमकाया जाता है।

सवाल: साबूदाना भारत में बनता है या किसी दूसरे देश से मंगवाया जाता है?
जवाब: कसावा के पौधे अमेरिका में पाए जाते थे। वहां से यह अफ्रीका पहुंचा। 19वीं सदी के बाद यह भारत आया। केरल, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु में इसकी खेती होने लगी।

ऐसा नहीं कि इसके सिर्फ फायदे ही हैं, कोई भी चीज ज्यादा खाना हमेशा ही नुकसानदेह होता है। चलिए इसके नुकसान के बारे में अब जान लेते हैं…

  • इसे अगर ठीक से पकाया नहीं गया, तो पेटदर्द हो सकता है।
  • इसमें फाइबर ज्यादा होता है। इसलिए ज्यादा खाने से गैस, पेट में सूजन की प्रॉब्लम होगी।
  • जिन लोगों को कब्ज की प्रॉब्लम है, उन्हें इसे खाने से बचना चाहिए, समस्या बढ़ जाएगी।
  • साबूदाने में ग्लाइसिमिक इंडेक्स ज्यादा होता है, जो आपके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाता है।

आजकल हर कुछ मिलावटी हो गया है। मार्केट में साबूदाना भी मिलावटी मिल रहा है। कभी आपने सोचा कि जो साबूदाना आप इन दिनों नवरात्रि के व्रत में खा रहे हैं, वो असली है या नकली।

नकली साबूदाना बनाने में सोडियम हाइपोक्लोराइट, कैल्शियम हाइपोक्लोराइट, ब्लीचिंग एजेंट, फॉस्फोरिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड जैसे केमिकल्स यूज होते हैं।

साबूदाने को स्टोर करने का तरीका

  • स्टोर करने के लिए एयरटाइट डिब्बे का इस्तेमाल करें, ताकि हवा लगने की वजह से सीले नहीं।
  • ऐसी जगह पर स्टोर करें, जहां नमी न हो, इसे गीले हाथ और चम्मच से न निकालें।
  • महीनों तक साबूदाना रखना चाहते हैं, तो शीशे की जार या मर्तबान में भरकर ठंडी जगह पर रखें।
  • साबूदाने में अगर कीड़े लगने का डर है, तो उसकी जार में नीम के पत्ते डालें।
  • सूखा साबूदाना फ्रिज में स्टोर न करें। अगर इसकी खीर बनाई है, तो दो दिन के भीतर खा लें।

साबूदाना खरीदते वक्त इन 4 बातों का ध्यान रखें

  • बहुत ज्यादा चमकता हुआ साबूदाना न खरीदें। इसे वाइट एजेंट्स डालकर सफेद बनाया जाता है।
  • इसे खरीदते वक्त साइज पर भी ध्यान रखना चाहिए। बहुत छोटे साइज वाले साबूदाने नकली हो सकते हैं।
  • बड़े और गोल-गोल साबूदाने ही खरीदें, टूटे हुए दाने आपके जायके को खराब करेंगे।
  • साबूदाना खुले में खरीदते हैं और वो अगर थोड़ा गीला है, तो बिल्कुल न खरीदें।

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