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बच्चों की झिझक कैसे खत्म करें:दुनिया में हर 10 में से 1 बच्चा अपनी भावनाएं शेयर करने में झिझकता है, पैरेंट्स ऐसे कर सकते हैं मदद

एक महीने पहले
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  • बच्चों में इमोशनल इंटेलिजेंस डेवलप करें, बातों को साझा करने के लिए उन्हें प्रेरित करें
  • ज्यादा इंट्रोवर्ट बच्चों को पैरेंट्स डायरी में अपनी भावनाएं लिखकर व्यक्त करने को कह सकते हैं

शनिसिया बोसवेल. बचपन सीखने-समझने और चीजों को एक्सप्लोर करने का सबसे अच्छा दौर होता है। एक इंसान अपनी पूरी लाइफ में जितना सीख पाता है, उसका 50% अपने बचपन में सीखता है। लेकिन, कुछ ऐसे बच्चे भी होते हैं, जो बहुत कम बोलते हैं। वे इंट्रोवर्ट हो जाते हैं। वे अपने मन की बात को दिल में ही रखते हैं। दुनिया में हर 10 में से 1 बच्चा अपनी भावनाओं, जरूरतों और समस्याओं को किसी से साझा करने में झिझक महसूस करता है।

यह एक बड़ी समस्या है, उम्र के साथ जब मानसिक दबाव बढ़ता है तो भी ऐसे लोग अपनी बात को किसी से साझा नहीं कर पाते। कई टीनएजर डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। बच्चों को फ्रैंक बनाने और झिझक खत्म करने में पैरेंट्स की भूमिका सबसे अहम होती है। अगर आपका बच्चा खुलकर अपनी भावनाओं को साझा नहीं कर पा रहा है तो आप उसे ज्यादा बोलने के लिए प्रेरित करें।

इमोशनल इंटेलिजेंस एंड सोशल इंटेलिजेंस किताब के राइटर डेनियल गोलेमन के मुताबिक, 'अपने बच्चों में कोई भी पॉजिटिव चेंज देखने के लिए पैरेंट्स के तौर पर आपको सबसे पहले उनकी फीलिंग्स को समझना होगा।'

पहले यह जानें कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं?

  • फैमिली थेरेपिस्ट लेनाया स्मिथ कहती हैं कि 'मैं फैमिली सेशन से पहले लोगों का फीलिंग चेक करना शुरू कर देती हूं। मैं ये जानना चाहती हूं कि पूरे हफ्ते हमारे क्लाइंट्स का अनुभव कैसा रहा है। उसने कैसा महसूस किया।'
  • लेनाया स्मिथ बताती हैं कि 'पैरेंट्स को भी अपने बच्चों की फीलिंग चेक करनी चाहिए। ऐसा रोज करना चाहिए और आप इसे तब-तक कर सकते हैं, जबतक कि आपके बच्चे बड़े न हो जाएं।'
  • राइटर डेनियल गोलेमन के मुताबिक, 'सेल्फ अवेयरनेस भी बहुत जरूरी है। जैसे- आप कैसा महसूस कर रहे हैं और क्यों? यह हमारी फीलिंग का सबसे जरूरी एलिमेंट होता है। इसलिए इस बारे में जानकारी रखना हमारे लिए जरूरी होता है। बिना इस एलिमेंट को ढूंढ़े हम अपनी फीलिंग्स को कंट्रोल नहीं कर सकते।'
  • हमारे रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसे कई मौके आते हैं, जब हमें अपनी फीलिंग्स को कंट्रोल करना पड़ता है। आप अपने बच्चे में यदि बदलाव लाना चाहते हैं तो सबसे पहले उसकी फीलिंग्स को समझना होगा।'

बच्चों को सिखाएं कि कैसे शांत रहें

  • डॉ. गोलेमन के मुताबिक बच्चों को यह बताना कि कैसे शांत रहा जाए बहुत जरूरी है। उनको हमेशा बताइए कि अपने लक्ष्य पर फोकस करें और असफल होने के बाद भी उम्मीद न छोड़ें।
  • गोलेमन कहते हैं, “जब मेरी बेटी परेशान होती है और खुद की समस्या को बताने की कोशिश करती है तो मैं उससे कहता हूं कि बोलने से पहले वो एक लंबी सांस ले। जब हम किसी गंभीर मुद्दे पर बात करते हैं तो उस वक्त कुछ और नहीं करते। पहले कुछ देर शांत रहते हैं फिर बातें करते हैं। छोटे बच्चों में इमोशन को मैनेज करने की क्षमता होती है।'
  • बच्चों को किसी अच्छे खुले मैदान या पार्क में ले जाएं, उन्हें वहां घास पर लेटने को कहें और फिर सांस लेते और छोड़ते हुए उनकी कमर को ऊपर नीचे करने में मदद करें। यह एक एक्सरसाइज है, जिससे बच्चे इमोशनली मजबूत होते हैं।
  • जब बच्चे शांत हो जाएं तो आप उनसे बात करने का प्रयास करें। लेकिन, एक बात का ध्यान रखें कि खुद कम बोलें और बच्चे को ज्यादा बोलने के लिए प्रेरित करें। ऐसा करने से कम बोलने वाले बच्चे भी अपनी भावनाओं को साझा करना सीख जाएंगे।

बच्चों को लेकर पैरेंट्स अपनी लिमिट तय करें

  • अमेरिकी महिला क्विकी कहती हैं कि बच्चों के साथ एक लिमिट सेट करना जरूरी होता है। इससे आप बच्चों के ऊपर जरूरत से ज्यादा रिएक्ट नहीं कर पाएंगे। यहां एक ऐसी बाउंड्री हो, जिसमें आपकी रिएक्शन कैद हो न कि बच्चे के साथ कम्यूनिकेशन गैप हो।
  • क्विकी कहती हैं इस तरह की एक आदर्श सीमा बनाने से आपका बच्चा आपसे खुल कर बोल पाएगा। अपनी हर छोटी बड़ी समस्या को साझा कार पाएगा। छोटे बच्चों के लिए यह बहुत जरूरी है कि उनकी अप-ब्रिंगिंग इस तरह से हो कि वे बोलना और अपनी भावनाओं को साझा करना सीख सकें।

बच्चों की भावनाओं को पहचानें

  • लेनाया स्मिथ कहती हैं कि, “अगर आपका बच्चा रो रहा है तो उनसे कुछ सीधे सवाल पूछें। जैसे- उसे क्या महसूस हो रहा है, उसके साथ जो कुछ भी हुआ वो कैसे हुआ। कई बार बच्चे अपने भावनाओं को दुखी होकर या गुस्से में भी व्यक्त करते हैं।”
  • स्मिथ कहती हैं, “मैंने अपनी बेटी से कई बार कहा की वो सोने के समय रात के कपड़े पहन लिया करे। मैंने दो बार गुस्से में भी उसे बोला। इसके चलते बेटी दुखी हो गई, इसके बावजूद वो हमेशा मुझसे कहती कि मैं आपको दुखी नहीं करना चाहती।”
  • स्मिथ के मुताबिक, हमें अपने बच्चों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। अगर हम उन्हें लगातार गुस्सा दिलाते हैं या दुखी करते हैं तो वे अपनी बातों को खुलकर कभी नहीं रख पाएंगे। हमें बच्चों की भावनाओं को पहचाना चाहिए और उसी के हिसाब से व्यवहार करना चाहिए।

बच्चों को भावनाएं लिखने के लिए प्रेरित करें

  • कभी-कभी स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि बच्चे बता ही नहीं पाते कि वो क्या महसूस कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में पैरेंट्स को बच्चे को प्रेरित करना चाहिए कि वो अपनी भावनाओं को लिखकर बताएं कि कैसा महसूस कर रहे हैं।
  • स्मिथ कहती हैं कि वो और उनकी बेटी एक डायरी रखती हैं, जिसके जरिये दोनों एक-दूसरे से रोज की कुछ बातें साझा करती हैं। इसलिए माफी मांगने जैसी स्थिति में लिखकर अपनी भावनाओं को साझा करना बहुत ही कारगर तरीका है। हम वह सबकुछ साझा कर सकते हैं, जो आमतौर पर हम बोल नहीं सकते। बच्चों को हर चीज के लिए वोकल बनाने के लिए भी यह अच्छा तरीका है। इसके लिए बच्चों को प्रेरित करना जरूरी होता है।
  • अगर आपका बच्चा बोलने में घबरा रहा है तो अभी देर नहीं हुई है। उसे आप लिखकर अपनी भावनाओं को बताने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

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