जरूरत की खबर:जेल में सिद्धू की सुबह की शुरुआत रोजमेरी चाय से और सोने के पहले ले रहे हैं कैमोमाइल टी, जानिए इनके फायदे

एक महीने पहले

पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को रोडरेज केस में एक साल की सजा सुनाई गई है। वे इस समय पटियाला जेल में हैं। जेल जाने से पहले उनकी मेडिकल जांच की गई है।

मेडिकल जांच के बाद...

  • मेडिकल बोर्ड ने लंबी डाइट प्लान की एक लिस्ट जिला अदालत में पेश की।
  • रिपोर्ट के अनुसार सिद्धू को वजन कम करने और हर रोज 30 से 45 मिनट व्यायाम करने की सलाह दी गई है।
  • जेल में सिद्धू को रोजमेरी की चाय और रात को कैमोमाइल चाय लेने के लिए भी कहा गया है।
पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान चाय पीते नवजोत सिंह सिद्धू (बाएं)।
पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान चाय पीते नवजोत सिंह सिद्धू (बाएं)।

आखिर क्यों सिद्धू के लिए लंबी-चौड़ी डाइट प्लान तय की गई है?

दरअसल, सिद्धू के लीवर की चर्बी बढ़ गई है। फेफड़ों में खून के थक्के मिले हैं। इसलिए उन्हें कड़ी डाइट के साथ-साथ दवाइयां भी लेनी होंगी।

सिद्धू की डाइट में शामिल रोजमेरी और कैमोमाइल चाय के फायदे आज हम जानते हैं…

सबसे पहले जानते हैं रोजमेरी क्या है
रोजमेरी एक खुशबूदार और सदाबहार पौधा है। भारत में आमतौर से इसे गुलमेहंदी के नाम से जाना जाता है। इस पौधे का इस्तेमाल जड़ी-बूटी के तौर पर किया जाता है। बाजार में आपको आसानी से इसकी सूखी टहनियां, पत्ते, बीज और तेल मिल सकते हैं।

सुबह रोजमेरी चाय क्यों पीना चाहिए?
खाली पेट दूध वाली चाय पीने से पाचन संबंधी समस्याएं होने का खतरा रहता है। रोजमेरी चाय जड़ी-बूटियों से तैयार हर्बल टी है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल, एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-ऑक्सीडेंट्स आदि गुण पाए जाते हैं। ऐसे में इसे पीने से पाचन दुरुस्त होता है।

रोजमेरी का चाय घर पर बनाने की विधि

इन चीजों की जरूरत होगी

  • एक चम्मच रोजमेरी का पत्ता या पाउडर
  • एक कप पानी
  • एक चम्मच शहद या शक्कर (ऑप्शनल)

ऐसे बनाएं

  • एक बर्तन में पानी उबलने के लिए चढ़ाएं और आंच धीमी कर दें।
  • पानी में रोजमेरी के पत्ते या पाउडर डालें। 5-6 मिनट उबलने दें।
  • चाय छानकर कप में डाल लें और शक्कर या शहद मिलाकर पिएं।

रोजमेरी चाय के साइड इफेक्ट

  • जिन लोगों को एस्पिरिन या सैलिसिलेट ( Salicylate ) दवाओं से एलर्जी है, उन्हें रोजमेरी से भी एलर्जी हो सकती है।
  • प्रेग्नेंट महिलाएं अगर ज्यादा मात्रा में रोजमेरी की चाय पिएं तो मिसकैरेज भी हो सकता है।
  • अगर आप बहुत ज्यादा रोजमेरी चाय पीते हैं तो मिर्गी का दौरा भी पड़ सकता है।

अब जानते हैं कि कैमोमाइल चाय के बारे में, जिसे सिद्धू रोजाना रात को सोने से पहले लेते हैं।

क्या है कैमोमाइल?
कैमोमाइल चाय को हिंदी में बबूने के फूल की चाय भी कहते हैं। कैमोमाइल में फ्लेनोइड नाम का एक कंपाउंड पाया जाता है। इसकी वजह से इसमें सेहत से जुड़े कई फायदे होते हैं।

कैमोमाइल चाय रात में पीने क्यों जरूरी है?
कैमोमाइल चाय में एपिजेनिन (apigenin) है, जो अच्छी नींद लाने में मदद करता है। इसमें दिमाग को शांत करने वाले एंटीकन्वल्सेंट (anticonvulsant) गुण भी पाए जाते हैं।

कैमोमाइल चाय पीने के बाद दिमाग शांत हो जाता है और आपको अच्छी नींद आती है।

कैमोमाइल चाय बनाने की विधि

इन चीजों की जरूरत होगी

  • एक कप या उससे ज्यादा पानी ले सकते हैं।
  • एक चम्मच सूखे कैमोमाइल फूल या पाउडर

ऐसे बनाएं

  • पानी को उबाल लें।
  • फूल या पाउडर को उबलते पानी में डालकर 5 मिनट के लिए छोड़ दें।
  • अब चाय छानकर पी सकते हैं।
  • इसमें शक्कर न डालें।

कैमोमाइल चाय के साइड इफेक्ट

  • जिन लोगों को डेजी परिवार के फूलों (गुलबहार) से एलर्जी है, उन्हें कैमोमाइल चाय से भी एलर्जी हो सकती है। कैमोमाइल भी इसी परिवार का हिस्सा है।
  • प्रेग्नेंट महिलाओं को कैमोमाइल चाय नहीं पीना चाहिए। प्रेग्नेंसी में इससे यूरिन मसल्स टाइट हो सकती हैं। इससे गर्भवती और गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान होने का डर रहता है।
  • कैमोमाइल चाय से खून पतला होता है। इसलिए जो लोग खून को पतला करने वाली दवाइयां लेते हैं। वे डॉक्टर की सलाह पर ही इसे लें।

सिद्धू की डाइट चार्ट

सुबह के नाश्ते में– रोजमेरी चाय, जूस, लैक्टोस फ्री दूध, पांच-छह बादाम, अखरोट, सीड्स (फ्लैक्स, सूर्यमुखी, तरबूज और चिया)

मिड मॉर्निंग मील– एक गिलास जूस या कोई एक फल जैसे तरबूज, कीवी, अमरूद आदि। अंकुरित हरे या काला चने में खीरा, टमाटर, आधा नींबू और एवोकैडो।

दोपहर का खाना– एक कटोरी खीरा, हरी सब्जियों के साथ ज्वार, सिंघाड़ा या रागी के आटे की चपाती।

शाम– कम वसा वाले दूध के साथ एक कप चाय और 25 ग्राम पनीर या टोफू।

रात का खाना– मिक्स वेज, दाल या काले चने का सूप, भुनी हुई हरी सब्जियां।

सोने से पहले– एक कप कैमोमाइल चाय और एक बड़ा चम्मच इसबगोल की भूसी।

बता दें, नवजोत सिंह सिद्धू लीवर की बीमारी से पीड़ित हैं और उनका डीप वेन थ्रॉम्बोसिस का इलाज चल रहा था।

सोर्स- डायटीशियन अंशुल जयभारत , फोर्टिस अस्पताल, जर्नल ऑफ एग्रीकल्चर एंड केमिस्ट्री में पब्लिश रिसर्च, नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन