पत्नी से चिकचिक पड़ी भारी:पति को अपना घर छोड़ना होगा, प्रोटेक्शन ऑर्डर के जरिए कोई भी पति हो सकता है बेघर

2 महीने पहलेलेखक: अलिशा सिन्हा

अगर घर में शांति बनाए रखना है तो पति को घर से बाहर निकालना ही एक मात्र रास्ता है। अदालतों को इसका आदेश जारी करना चाहिए। भले ही पति के पास रहने के लिए कोई दूसरा घर नहीं हो। घरेलू हिंसा के मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में ये बात कही है।

चलिए पूरा मामला जान लेते हैं...
पत्नी पेशे से वकील है। तलाक के लिए उसने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद उसने दूसरी याचिका भी दायर की, जिसमें उसने कोर्ट से तलाक होने तक घर में शांति बनाए रखने की अपील की। वो चाहती थी कि कोर्ट पति को घर से बाहर निकलने का आदेश दे। पति ने दावा किया वो एक अच्छा पति है।

कोर्ट ने उसे घर में शांति बनाए रखने को कहा। इस आदेश से पत्नी सहमत नहीं थी। उसने इस पर एक और याचिका दायर की। इस याचिका को जस्टिस मंजुला ने स्वीकार कर लिया और पति को आदेश दिया कि उसे दो हफ्ते के अंदर घर से बाहर निकलना होगा।

(कोर्ट ने कहा- अदालतों को उन महिलाओं के प्रति उदासीन नहीं होना चाहिए जो घर में अपने पति की मौजूदगी से डरती हैं।)

अब फैमिली एंड क्रिमिनल लॉ एक्सपर्ट, एडवोकेट सचिन नायक से समझते हैं कि कब और किन हालातों में कोर्ट इस तरह का फैसला सुना सकती है।

सवाल: क्या ऐसी सिचुएशन में (वकील महिला की तरह) कोई भी घरेलू महिला पति को घर से निकालने के लिए कोर्ट से अपील कर सकती है?
जवाब:
बिल्कुल। चाहे कोई घरेलू महिला हो या नौकरीपेशा। अगर उसका पति घरेलू हिंसा कर रहा है, तो वो कोर्ट में याचिका दायर करके अपील कर सकती है। महिला ने अगर अपनी बात कोर्ट में साबित कर दी, तो Domestic violence Act 2005 के सेक्शन 19B के तहत कोर्ट ऑर्डर भी दे सकता है कि पति, अपनी पत्नी और बच्चे को नया घर दिलाए। अगर वो ऐसा करने में सक्षम नहीं है तो खुद घर से निकल जाए।

बहुत से पति या ससुराल वाले शादी के बाद महिलाओं को कभी दहेज के लिए तो कभी बेटी पैदा होने की वजह से प्रताड़ित करते हैं। ऐसे में शादीशुदा महिलाओं के लिए देश में कुछ कानून हैं, जिनके बारे में आपको पता होना जरूरी है। नीचे दिए ग्राफिक्स को पढ़ें

सवाल: इस मामले में कोर्ट ने कहा है कि अगर परिवार का माहौल पति के कारण बिगड़ता है, तो सुरक्षात्‍मक आदेश यानी Protection Order के तहत पति को घर से बेघर किया जा सकता है। आखिर क्या होता है प्रोटेक्शन ऑर्डर?
जवाब-
प्रोटेक्शन ऑर्डर को समझने के लिए नीचे दिए वीडियो को क्लिक करें, जिसमें एडवोकेट सचिन नायक ने इसके बारे में अच्छे से समझाया है।

सवाल: इस मामले में पत्नी ने तलाक के लिए याचिका दायर की थी, पति ने नहीं। ऐसे में तलाक कैसे हो सकता है?
जवाब:
पटियाला हाउस कोर्ट की एडवोकेट सीमा जोशी कहती हैं कि ऐसे में पत्नी को contested divorce (विवादित तलाक) मिल सकता है। इसे एकतरफा तलाक भी कहते हैं। इसमें काेर्ट पत्नी से सबूत मांग सकता है कि उसे क्यों तलाक चाहिए।

हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 13 में contested divorce के आधार के बारे में साफ तौर से लिखा गया है-

एडल्ट्री- यह क्राइम है, जिसके मुताबिक पति या पत्नी में से कोई भी शादी से बाहर किसी के साथ फिजिकल रिलेशन रखता है।

क्रूरता- इसमें मेंटली या फिजिकली दर्द देना, गाली देना, मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शामिल हो सकता है।

धर्म परिवर्तन- हिंदू विवाह में, अगर पति या पत्नी में से कोई एक धर्म परिवर्तन कर लेता है तो इसे तलाक का आधार माना जा सकता है।

मेंटल डिसऑर्डर- मेंटल डिसऑर्डर में मन की स्थिति, मानसिक बीमारी या प्रॉब्लम शामिल है, जो व्यक्ति को असामान्य रूप से आक्रामक बना देता है।

कुष्ठ रोग- लेप्रोसी या कुष्ठ रोग एक संक्रामक और पुरानी बीमारी है, जो स्किन और नर्व को डैमेज करती है।

पार्टनर के बीच बातचीत नहीं- अगर पति-पत्नी के बीच सात साल से ज्यादा समय से बातचीत नहीं हुई है, तो इसे तलाक का आधार माना जा सकता है।

संन्यास- हिंदू कानून के तहत, संसार का त्याग तलाक के लिए एक आधार है। अगर पति या पत्नी में से किसी एक ने संन्यास ले लिया है तो उसे तलाक मिल जाता है।

महिला के पति ने इस पूरे मामले में क्या कहा, चलिए यह भी जानते हैं

पति ने दावा किया था कि वो एक अच्छा पति और पिता है। उसकी पत्नी घर में रहना पसंद नहीं करती है। वो ज्यादातर मौकों पर घर से बाहर जाती-आती है। एक आदर्श मां वही होती है, जो हमेशा घर पर रहती है और घर का काम करती है। पत्नी एक वकील है, इसलिए वह उसे कोर्ट में घसीट रही है।

चलते-चलते यह भी जान लेते हैं कि पूरे मामले में कोर्ट ने क्या कहा

  • एक-दूसरे पर आरोप लगाने से परिस्थिति और बात दोनों बिगड़ेगी। इस मामले में पति-पत्नी के दो बच्चे हैं। एक दस साल और छह साल का। पति हमेशा गाली-गलौच और चीखेगा-चिल्लाएगा, यह बच्चों के लिए सही नहीं है। उनकी मानसिक स्थिति पर गलत असर पड़ेगा।
  • अगर शादीशुदा जिंदगी अच्छी न चले, तो एक छत के नीचे रहने का कोई मतलब नहीं निकलता है। हां, कई बार दोनों पक्षों को कोशिश जरूर करनी चाहिए। इस मामले में ऐसा नहीं हो सकता है, क्योंकि पति के व्यवहार की वजह से बच्चे डरे-सहमे हुए हैं। पत्नी खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।
  • दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कोर्ट ने पत्नी के पक्ष में ही फैसला सुनाया। जस्टिस आरएन मंजुला ने आदेश दिया कि पीड़ित पत्नी के पति को दो हफ्ते के अंदर घर से बाहर निकलना होगा। अगर पति ऐसा नहीं करता है, तो उसे घर से बाहर निकालने के लिए पुलिस भेजी जाएगी।

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