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  • If You Want To Avoid High Risk Pregnancy, Then Take Advice From The Doctor And Not From The Neighbor And Relative जब किसी महिला को हेल्थ रिलेटेड प्रॉब्लम की वजह से प्रेग्नेंसी में जोखिम यानी रिस्क होता है तब उसे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी कहते हैं।

वजन ज्यादा, मां बनने में है खतरा:हाई रिस्क प्रेग्नेंसी से बचना है तो पड़ोसी और रिश्तेदार से नहीं बल्कि डॉक्टर से लें सलाह

3 महीने पहले

काजल हाई ब्लड प्रेशर की पेशेंट है। इस वजह से, जो भी उससे मिलता है यही कहता है– तुझे मां बनने में परेशानी आएगी। आज उसकी मुलाकात स्नेहा से दो साल के बाद हुई। स्नेहा को बचपन से डायबिटीज है, जिससे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का खतरा था। उसने 6 महीने पहले ही हेल्दी बच्चे को जन्म दिया है। आखिर ये हाई रिस्क प्रेग्नेंसी क्या है? क्या हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की वजह से मां की जान जा सकती है ये सारी बातें समझते हैं काजल और स्नेहा की इस बातचीत से

स्नेहा– क्या तुम किसी डॉक्टर के पास गई हो?

काजल– नहीं, अब तक नहीं।

स्नेहा– फिर तुम्हें किसने कहां कि तुम्हारी प्रेग्नेंसी हाई रिस्क होगी।

काजल– घर-परिवार और जानने वालों ने। मुझे हाई ब्लड प्रेशर जो है।स्नेहा– मुझे भी डायबिटीज है, याद नहीं कॉलेज में भी, मैं इंसुलिन लेती थी। बच्चे के जन्म के वक्त मैं भी डॉक्टर की देखरेख में रही। फिर डॉक्टर ने जो कुछ भी बताया वही किया, वही खाया और आज बेबी मेरे पास है।

काजल– अच्छा। ये बता, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी क्या है?

स्नेहा- जब किसी महिला को हेल्थ रिलेटेड प्रॉब्लम की वजह से प्रेग्नेंसी में जोखिम यानी रिस्क होता है तब उसे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी कहते हैं।

  • इन दौरान महिलाओं को नॉर्मल प्रेग्नेंसी से अधिक देखभाल की जरूरत होती है।
  • ऐसी सिचुएशन में बच्चे को भी कई तरह की बीमारी का खतरा रहता है।
  • महिलाओं में कंसीव करने के बाद की स्थिति की वजह से इसका खतरा रहता है।
  • कुछ में जेस्टेशनल डायबिटीज, HIV, मोटापा जैसी प्रॉब्लम की वजह से।

काजल– स्नेहा क्या तुम मुझे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के सिम्टम्स यानी लक्षण बता सकती हो।

स्नेहा– मुझे ज्यादा डिटेल तो नहीं पता, लेकिन कुछ मैं बता देती हूं, फिर हम डॉक्टर से मिलकर डिटेल में जानेंगे। क्योंकि डॉक्टर ने मेरे केस में बताया था कि हर प्रेग्नेंट महिला में अलग-अलग सिम्टम्स यानी लक्षण हो सकते हैं। मुझे तो लंबे समय तक पेट में दर्द होता था, घबराहट और बुखार जैसी कुछ प्रॉब्लम होती थी। हम यही तो गलती करते हैं कि डॉक्टर के पास जाने की जगह पड़ोसी, रिश्तेदार और दोस्तों की सलाह मानते हैं। तुम्हें ऐसी गलती नहीं करने दूंगी।

नीचे लगी क्रिएटिव में डिटेल में पढ़ें हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के लक्षण के बारे में…

क्या हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में प्री-मेच्योर डिलीवरी का खतरा रहता है?
डॉ. वैशाली जोशी के मुताबिक हां, प्री-मेच्योर डिलीवरी का खतरा हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में रहता है। अगर 37 हफ्ते से पहले बच्चे का जन्म हो जाए, तो उसे प्री-मेच्योर डिलीवरी कहते हैं। इंफेक्शन, हाइपर टेंशन, एनिमिया, गर्भ में जुड़वा बच्चे, ज्यादा ब्लीडिंग यह सब प्री-मेच्योर डिलीवरी की वजह बन सकते हैं।

हाई रिस्क प्रेगनेंसी से बचने के लिए इन 7 बातों को ध्यान रखना होगा…

  1. प्रेग्नेंसी के हर स्टेज पर अलर्ट रहें।
  2. डॉक्टर से चेकअप समय पर कराएं।
  3. हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के सिम्टम्स को इग्नोर न करें।
  4. अगर हाई बीपी, थाइराइड या डायबिटीज है तो प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले ही डॉक्टर से मिलें।
  5. अगर कोई दवा पहले से ले रही हैं, तो डॉक्टर को बताएं।
  6. लाइफस्टाइल हेल्दी रखें, देर रात तक न जागें।
  7. शराब, सिगरेट जैसे नशे से दूर रहें।

सोर्स– डॉ. रितु गोयल, गाइनेकोलॉजिस्ट, दिल्ली

क्या हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में नॉर्मल डिलीवरी संभव है?

डॉ. रितु गोयल कहती हैं– हां, बिलकुल ऐसा संभव है। इसके लिए मां को अपनी देखभाल सही तरह से करनी होगी। डॉक्टर से चेकअप समय पर करवाना होगा। अगर आपको बीपी या डायबिटीज है, ताे अपने खानपान पर ध्यान देना होगा, डाइट चार्ट को फॉलो करना होगा। अगर मेंटल प्राॅब्लम हो रही है तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलने से हिचके नहीं।

स्नेहा– समझना होगा कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के लिए कोई अलग से दवाई नहीं होती। जिसे खिलाकर डाॅक्टर खतरे को कम कर दें।

काजल– हां, अगर आज तुम से नहीं मिलती तो इतना कुछ पता नहीं चलता।

स्नेहा– तुम समय-समय पर डॉक्टर के पास जाओ और पाॅजिटिव रहो।

काजल– हां अब मैं प्रेग्नेंसी के लिए तैयार हूं। मानसिक तनाव से दूर रहूंगी।

स्नेहा– अब चलती हूं और जल्द ही गुड न्यूज सुनना।

चलते-चलते

हाल ही में मध्यप्रदेश के इंदौर में एक कैंसर पेशेंट की हाइरिस्क डिलीवरी करवाई गई। महिला को आंतों का कैंसर है। अक्टूबर 2021 में इंदौर के ही एक प्राइवेट अस्पताल में कैंसर सर्जरी की गई। इसके बाद डॉक्टर ट्रीटमेंट के साथ नियमित रूप से कीमोथैरपी दे रहे थे। दो घंटे चली इस सर्जरी में महिला और बच्चा दोनों की जान को खतरा बना हुआ था। डॉक्टरों ने इमरजेंसी दवाएं देने के साथ उसे स्टेबल कर सर्जरी की। डिलीवरी के बाद महिला और नवजात दोनों ही स्वस्थ हैं।

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