जरूरत की खबर:जस्टिन बीबर वाली बीमारी रैमसे हंट सिंड्रोम में चेहरे पर लकवा मार जाता है, जानिए इसके लक्षण और उपाय

4 महीने पहलेलेखक: अलिशा सिन्हा

हॉलीवुड सिंगर जस्टिन बीबर ने अपने सारे कॉन्सर्ट कैंसिल कर दिए हैं। वे अपनी बॉडी को कुछ दिनों के लिए आराम देना चाहते हैं। वजह यह कि उनके आधे चेहरे पर पैरालिसिस हो गया है। ऐसा उन्हें रैमसे हंट सिंड्रोम (Ramsay Hunt Syndrome) की वजह से हुआ है।

आज जरूरत की खबर में जानते हैं कि क्या है रैमसे हंट सिंड्रोम और यह कब और कैसे हो सकता है।

सबसे पहले जानते हैं कि जस्टिन ने वीडियो में अपनी बीमारी के बारे में क्या कहा

28 साल के जस्टिन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर अपनी बीमारी के बारे में फैंस को समझाया कि…

  • यह बीमारी मुझे एक वायरस की वजह से हुई है।
  • यह मेरे कान और चेहरे की नसों पर अटैक कर रहा है।
  • इसकी वजह से मेरी एक आंख नहीं झपक रही है।
  • चेहरे के एक तरफ से स्माइल (मुस्कुरा) नहीं कर सकता हूं।
  • नाक की एक साइड नहीं हिल रही है।
  • यह रैमसे हंट सिंड्रोम नाम की बीमारी है, जो बहुत गंभीर है।
  • इसकी वजह से एक साइड का चेहरा पैरालाइज्ड हो गया है।
  • जो लोग मेरे कॉन्सर्ट कैंसिल होने से निराश हैं। उन्हें यही कहूंगा कि मैं अभी फिजिकली फिट नहीं हूं।

सवाल- क्या है रैमसे हंट सिंड्रोम, जो जस्टिन बीबर को हुआ है?
जवाब-
डॉ अन्ना वाल्ड वॉशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोग विशेषज्ञ हैं। उनके अनुसार, रैमसे हंट सिंड्रोम एक तरह की न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है, जो वेरीसेल्ला जोस्टर वायरस के कारण होती है। इसी वायरस की वजह से चिकनपॉक्स और दाद की बीमारी भी होती है।

सवाल– क्या रैमसे हंट सिंड्रोम का इलाज संभव है?
जवाब–
हां। इस बीमारी वाले ज्यादातर लोग ठीक हो जाते हैं। कुछ लोग जल्दी ठीक हो जाते हैं तो कुछ लोगों को थोड़ा समय लगता है। कुछ पेशेंट ऐसे होते हैं, जिन्हें पैरालिसिस या बहरापन तक हो सकता है। 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को इससे बचने के लिए एक सिंगल डोज चिकनपॉक्स वाला टीका जरूर लगवाना चाहिए।

सवाल- चिकनपॉक्स ठीक हो जाने के बाद भी क्या ये बीमारी हो सकती है?
जवाब-
जी हां। दरअसल, चिकनपॉक्स ठीक हो जाने के बावजूद वेरीसेल्ला जोस्टर वायरस आपकी नसों में रहता है। सालों बाद भी यह एक्टिव (सक्रिय) हो सकता है। फिर ये आपके चेहरे और नसों को प्रभावित भी कर सकता है। जिसकी वजह से आप रैमसे हंट सिंड्रोम के शिकार हो सकते हैं।

सवाल- रैमसे हंट सिंड्रोम का इलाज कैसे किया जाता है?
जवाब-
चिकनपॉक्स के खिलाफ लगने वाली वैक्सीन इससे संक्रमित होने की आशंका कम करती है।

डॉक्टर बीमारी के हिसाब से पेशेंट को दवा देते हैं। आमतौर पर एंटी-वायरल दवा दी जाती है। कुछ पेशेंट को स्टेरॉयड भी दिया जाता है। ज्यादातर लोगों को फिजिकल थैरेपी नहीं दी जाती है।

सवाल- क्या रैमसे हंट सिंड्रोम संक्रामक बीमारी है?
जवाब-
नहीं। यह एक से दूसरे को नहीं फैलती। लेकिन इस बीमारी वाले व्यक्ति के शरीर पर अगर फोड़े हैं और उनमें भरे मवाद या फ्लूड के संपर्क में दूसरा व्यक्ति आ जाए तो रैमसे हंट सिंड्रोम होने की आशंका बढ़ जाती है।

डेटा पर एक नजर डाल लेते हैं

डॉ. वालीद जावेद, इंफेक्शन प्रिवेंशन और माउंट सिनाई डाउनटाउन के डायरेक्टर के अनुसार, 1 लाख लोगों में सिर्फ 5-10 लोगों को ही हर साल रैमसे हंट सिंड्रोम होता है। ऐसा किसी भी इंसान के साथ हो सकता है, लेकिन लोगों को इससे डरने की जरूरत नहीं है।

चलते-चलते जानते हैं

इस बीमारी का नाम जेम्स रैमसे हंट नाम के एक अमेरिकी न्यूरोलॉजिस्ट के नाम पर रखा गया है। हंट को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान एक सेना अधिकारी के रूप में तैनात किया गया था और इस दौरान उन्होंने तीन सिंड्रोम के बारे में लिखा। उन्हीं में से एक रैमसे हंट सिंड्रोम है।