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महामारी में सेफ रहने का फंडा:छोटे आयोजनों में है कोरोना का खतरा; किसी करीबी से भी मिलें तो एहतियात जरूर बरतें, बच्चों की गतिविधियों पर भी रखें नजर

2 महीने पहले
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  • अगर घर के अंदर लोग इकट्ठा हो रहे हैं, तो खिड़की-दरवाजों को खोलकर ज्यादा से ज्यादा वेंटिलेशन की व्यवस्था करें
  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक, छोटे आयोजनों के मुकाबले बड़े और औपचारिक आयोजन ज्यादा सुरक्षित, यहां कड़े नियमों का पालन जरूरी

मेलिंडा वीनर मोयर. इस बात का पता लगाना फिलहाल मुश्किल है कि कोरोनावायरस कब तक रहेगा। हालांकि, शुरुआती दिनों में कोरोना को लेकर सावधानी बरत रहे लोग अब लापरवाह हो गए हैं। वहीं, महीनों से अनिश्चितताओं के बीच रह रहे छोटे बच्चों वाले परिवार अब सामान्य होने की कोशिश कर रहे हैं। वे अब बाहर निकलकर लोगों से मिलना शुरू कर रहे हैं। पिछले दिनों में अमेरिकी हेल्थ अधिकारियों ने पाया है कि कुछ परिवार ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने लगे हैं, जो कुछ समय पहले तक खतरनाक माने जा रहे थे।

एक्सपर्ट्स ने दी है चेतावनी

  • फिलहाल स्वास्थ्य अधिकारियों को इस बात की जानकारी नहीं है कि देश में बढ़ रहे कोविड के मामलों में छोटा जमावड़े की कितनी भूमिका है। हालांकि, अमेरिका के शिकागो, लॉस एंजिलिस, मेरिलैंड, मिशीगन जैसे कुछ शहरों में इन दोनों चीजों के आपस में जुड़े होने की बात सामने आ रही हैं।
  • एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि यदि आप अपने करीबी दोस्तों, रिश्तेदारों और दूसरे लोगों के करीब रह रहे हैं, तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। मिनेसोटा के हेल्थ कमिश्नर जैन मैल्कम ने एक न्यूज कॉन्फरेंस में कहा कि "कहीं न कहीं हमारे दिमाग में यह बात है कि अगर हम परिवार के करीबियों के साथ इकट्ठे होते हैं, तो बीमारी फैलने का डर उतना नहीं होता, जितना सार्वजनिक जगहों पर होता है। जबकि, ऐसा नहीं है।"

बीमार बच्चे का पता लगाना बड़ी चुनौती से कम नहीं

  • एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक परेशानी यह भी है कि कोविड 19 से जूझ रहे कई बच्चों में लक्षण नजर नहीं आते हैं। जब वे बीमार होते हैं, तो यह कहना मुश्किल हो जाता है कि उन्हें लक्षण कोरोनावायरस के कारण नजर आ रहे हैं या नहीं।
  • दक्षिण कोरिया में 91 बच्चों पर हुई एक स्टडी में पता चला था कि 42% पॉजिटिव बच्चे एसिंप्टोमैटिक थे। इसलिए ऐसा हो सकता है कि परिवार अपने बच्चों के साथ किसी कार्यक्रम में शामिल हो जाएं और उन्हें इस बात का एहसास ही न हो कि उनका बच्चा कोरोना फैला सकता है।

कैसे सुरक्षित तरीके से शामिल हों?

  • शिकागो हेल्थ डिपार्टमेंट की कमिश्नर डॉक्टर एलिसन एर्वाडी का कहना है कि हो सकता है कि यह थोड़ा अजीब लगे, लेकिन छोटे और अनौपचारिक आयोजनों की तुलना में बड़े और औपचारिक आयोजन आमतौर पर सुरक्षित होते हैं, क्योंकि बड़े इवेंट में लोगों को जोखिम कम करने के लिए नियमों का पालन करना पड़ता है।
  • एलिसन कहते हैं कि हाल ही में आए मामलों में से 5-6% ही ऐसे केस होंगे, जिनके तार भीड़ वाली जगह या बड़े दफ्तरों से जुड़े हों। कुछ मामले बड़े धार्मिक या आंदोलन जैसी आयोजनों से मिले हैं। कई शहरों में कई जगह समर कैम्प भी चले, लेकिन कड़े नियमों के कारण कुछ ही बच्चे बीमार हुए।

परिवार के साथ भी हों, तो भी न करें लापरवाही

  • यह बात सच है कि जब भी हम दोस्तों और परिवारों के साथ मिलते हैं, तो हम रिलेक्स हो जाते हैं और मास्क हटा देते हैं। इसके अलावा बच्चों के सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर भी हम ध्यान नहीं देते हैं। डॉक्टर एलिसन कहते हैं कि "मुझे लगता है कि जहां लोगों को सुरक्षित महसूस होता है, दरअसल वहां कई मायनों में जोखिम ज्यादा होता है, बल्कि सबसे ज्यादा होता है।"
  • हालांकि, एएपी की इन्फेक्शियस डिसीज की कमेटी के वाइस चेयरमैन और पीडियाट्रिशियन डॉक्टर शॉन ओ लेरी ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि परिवारों को खुद को घर के अंदर पूरे साल के लिए बंद हो जाना चाहिए। हमें पब्लिक हेल्थ गाइडलाइंस का पालन करने की जरूरत है।
  • लेरी के मुताबिक, 'जब भी मुमकिन हो सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन बाहर ही करें और यह तय कर लें कि सभी लोग मास्क पहनें। खासतौर से तब जब मौके पर 6 फीट की दूरी बनाना मुमकिन न हो। अगर आपको अंदर रहना जरूरी है तो सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन घर में वेंटिलेशन बढ़ाने की सलाह देती है।
  • डॉक्टर एलिसन कहती हैं कि "बच्चों को दूसरों से मिलना जरूरी है, मुझे गलत मत समझिए। हमारा मकसद यह है कि बच्चों को वे सभी चीजें मिलें, जो उनके भावनात्मक विकास और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं, लेकिन सुरक्षित तरीकों से।"

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