जरूरत की खबर:जानिए कैसे 5 हजार के बजाय 260 रुपए की RT-PCR जांच में ही चल सकता है ओमिक्रॉन का पता

5 महीने पहलेलेखक: अलिशा सिन्हा

देश में ओमिक्रॉन तेजी से फैल रहा है। ये कोरोना के बाकी वैरिएंट से ज्यादा संक्रामक है। इसकी पहचान जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्ट से की जा रही है, लेकिन भारत जीनोम सीक्वेंसिंग के मामले में अभी काफी पीछे है। आज हम आपको बताते हैं कि RT-PCR टेस्ट से भी ओमिक्रॉन का पता लगाया जा सकता है। इसमें जीनोम सीक्वेंसिंग के मुकाबले खर्च भी कम आता है। जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्ट के लिए जहां 5000 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं, वहीं RT-PCR टेस्ट कराने में मात्र 260 रुपए खर्च होते हैं।

आज जरूरत की खबर में हम आपको बताएंगे कि RT-PCR टेस्ट से कैसे होगी ओमिक्रॉन की पहचान...

क्या है जीनोम सीक्वेंसिंग?
जीनोम सीक्वेंसिंग किसी भी इंसान का पूरा जेनेटिक बायोडेटा होता है। अगर किसी इंसान की जेनेटिक डाइवर्सिटी को समझना हो, तो हमे जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्ट करना पड़ेगा। इसके बाद हमें किसी भी नई बीमारी या नए वैरिएंट का पता चल जाएगा।

किसी भी वैरिएंट का पता जीनोम सीक्वेंसिंग में आसानी से लग जाता है, लेकिन देश के काफी कम राज्यों में ये टेस्ट किए जा रहे है। इसलिए हर व्यक्ति का जीनोम सीक्वेंसिंग कर पाना संभव नहीं है। ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को सलाह दी है कि वो दो बार RT-PCR टेस्ट करें और देखें कि सैंपल से S-Gene गायब है या नहीं, क्योंकि ओमिक्रॉन से S-Gene गायब है, जबकि डेल्टा में S-Gene मौजूद है।

S-Gene के गायब होने का मतलब है आप ओमिक्रॉन संक्रमित हैं?
जी हां, वायरस में मौजूद S-Gene के जरिए ही ओमिक्रॉन की पहचान की जा रही है। कई वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि ओमिक्रॉन में S-Gene नहीं है। अगर किसी व्यक्ति के सैंपल में S-Gene मिसिंग है, तो वो ओमिक्रॉन संक्रमित है। अगर S-Gene मौजूद है और रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव है तो, व्यक्ति कोरोना के ओमिक्रॉन से अलग किसी दूसरे वैरिएंट से संक्रमित है।

S-Gene पर WHO ने क्या कहा?
WHO के अनुसार, ओमिक्रॉन से S-Gene के गायब होने की वजह इसमें मौजूद मल्टिपल म्यूटेशन है, जो अब तक किसी वैरिएंट में नहीं देखा गया है। S-Gene का मिसिंग होना ही ओमिक्रॉन की मौजूदगी का संकेत है।

किस राज्य में RT-PCR किट से चेक किया जा रहा ओमिक्रॉन संक्रमण?
महाराष्ट्र में दो बार RT-PCR किट से कोविड सैंपल की जांच की जा रही है। टेस्ट किट में कुछ बदलाव भी किए गए हैं, जिससे S-Gene की मौजूदगी का पता लगाया जा सके।