गोवा में भी फेमस है भरलेली केली:कोंकणी इसे कहते हैं सात्विक फलाहारी, खूब आता है स्वाद जब केले में होती है नारियल की स्टफिंग

4 महीने पहले

पूरे हिंदुस्तान में व्रत वाले दिन केले खाए जाते हैं। आपने भी खाए होंगे। आज हम आपको केले की एक ऐसी रेसिपी बताएंगे, जो आसानी से भी बन जाएगी और आपके मुंह का स्वाद भी बदल जाएगा।

पुष्पेश पंत (खानपान विशेषज्ञ) से जानिए भरेले केले की खासियत-
त्योहार के शुभ दिन भारत के पश्चिमी तटवर्ती अंचल में रहने वाले गोवा तथा कोंकण निवासियों का यह व्यंजन सात्विक फलाहारी है। यहां रहने वाले सारस्वत समुदाय के लोग स्वयं को उसी परिवार का मानते हैं जो लुप्त हो चुकी सरस्वती नदी के किनारे बसते थे। इनमें से कुछ ने कश्मीर का रुख किया, कुछ ने गौड़ बंगाल का तो अन्य ने पश्चिमी समुद्र तट का। केला और नारियल दोनों ही इस प्रदेश में आसानी से सुलभ होते हैं इसीलिए सबकी पहुंच इस तक है।

तो चलिए पर्व के पकवान सीरीज में हम बताते हैं इसे बनाने का तरीका...

पर्व के पकवान सीरीज की पांचवी रेसिपी हैं भरलेली केली, जिसे बनाने का तरीका सीखा रही हैं मुंबई की शेफ रूपा संजय नाबर।

4-5 लोगों के लिए बनाना है, तो चाहिए ये सामग्री:

  • केले - 6 बहुत कम पके
  • घी- 1/2 कप
  • ताजा नारियल- 3 कप कद्दूकस किया
  • गुड़- 1 1/2 कप कद्दूकस किया हुआ
  • नमक
  • इलायची पाउडर- 1 छोटा चम्मच
  • दालचीनी - 1 इंच
  • लौंग- 4-5
  • दूध- 500 मि.ली

बनाने में समय लगेगा- 40-45 मिनट

बनाने का तरीका:

केलों को छीलकर इनके दो इंच के टुकड़े काट लें। लंबाई में बीच से एक चीरा लगाएं ताकि भरावन भर सकें । पैन में एक बड़ा चम्मच घी गर्म करें। नारियल डालकर 1 मिनट तक भूनें।

गुड़, नमक और इलायची पाउडर डालकर धीमी आंच पर 3-4 मिनट तक मिलाएं । आंच बंद करके ठंडा कर लें। इस भरावन को केले में भर लें। अब पैन में बचा घी गर्म करें। इसमें दालचीनी और लौंग डालें, भरावन भरे केले के टुकड़े डालें। अब दूध डालें और ढककर धीमी आंच पर केले मुलायम होने तक पकाएं । बीच-बीच में केले पलटाएं । केले सूखकर मुलायम होने तक आंच पर रखें। गर्मा-गर्म भरलेली केली परोसें।

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