नुसरत भरुचा जनहित में बोलीं:कंडोम को प्रोटेक्शन की नजर से देखें, इसके इस्तेमाल से आप 98% तक कर सकते हैं सेफ सेक्स

2 महीने पहलेलेखक: अलिशा सिन्हा

एक्टर नुसरत भरुचा की फिल्म ‘जनहित में जारी’ 10 जून को रिलीज होने वाली है। ये एक पारिवारिक फिल्म है, जिसमें कंडोम का मुद्दा उठाया गया है। फिल्म में नुसरत एक कंडोम बेचने वाली कंपनी में काम करती हैं। वहां पहले कभी किसी लड़की ने काम नहीं किया, इसलिए कई तरह के चैलेंज आते हैं। ऐसा ही चैलेंज नुसरत को फिल्म के प्रमोशन के दौरान फेस करना पड़ रहा है। वे फिल्म को लेकर लगातार ट्रोल हो रही हैं। कंडोम बेचने को लेकर लोग उनका मजाक उड़ा रहे हैं।

कंडोम की जरूरत पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को है- नुसरत
नुसरत कहती हैं कि कंडोम कितना इंपॉर्टेंट है यह बात खुद उन्हें भी फिल्म के लिए रिसर्च करते वक्त पता चली। आम लोग कंडोम को सिर्फ सेक्स के नजरिए से देखते हैं। इस नजरिए को बदलना है। इसे प्रोटेक्शन की नजर से देखना चाहिए। बच्चों को 7वीं क्लास में सेक्स एजुकेशन दी जाती है, तो फिर कंडोम से बच्चों को क्या परेशानी हो सकती है?

मेरी फैमिली में सेक्स एजुकेशन को लेकर सब ओपन माइंडेड हैं। यही वजह है कि मैं हर तरीके की बात फैमिली से शेयर कर पाती हूं। मुझे लगता है कंडोम का यूज न करने से पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को भुगतना पड़ता है। अबॉर्शन का खतरा बढ़ जाता है। इस फिल्म में बढ़ते अबॉर्शन केसेस पर भी चर्चा की गई है। जब आप डेटा देखेंगे तो बात साफ हो जाएगी कि कंडोम कितना जरूरी है। इसलिए मेरी सलाह है कि अगर लड़का कंडोम नहीं खरीदता है, तो लड़कियों को सैनिटरी पैड्स की तरह अपने बैग में रखने चाहिए, ये हमारी सेफ्टी है।

नुसरत कहती हैं कि कंडोम की जरूरत पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को है।
नुसरत कहती हैं कि कंडोम की जरूरत पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को है।

ये तो बात हुई नुसरत भरूचा की। अब उन लोगों के तमाम सवालों के जवाब देते हैं जिन्हें लगता है कि क्या वाकई कंडोम का इस्तेमाल करना जरूरी है? अगर हां तो क्यों? इसके इस्तेमाल से क्या फायदे होते हैं?

सवाल: कंडोम का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
जवाब:
सेफ सेक्स करने के लिए लोग कंडोम का इस्तेमाल करते हैं। इसको यूज करने से यौन संबंधित बीमारियां (एड्स, HIV) होने का खतरा कम हो जाता है।

सवाल: महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग कंडोम आते हैं?
जवाब:
जी हां। दोनों के लिए अलग-अलग तरह के कंडोम मार्केट में उपलब्ध हैं।

महिलाओं के कंडोम की 6 बातें

  1. यह 95% तक सेफ होता है।
  2. ये वाटर या ऑयल बेस्ड लुब्रिकेंट से बनते हैं।
  3. इनका इस्तेमाल करना थोड़ा मुश्किल होता है।
  4. ये हर मेडिकल स्टोर पर नहीं मिल पाते हैं।
  5. ये पुरुषों के कंडोम के मुकाबले महंगे होते हैं।
  6. इनका साइज एक ही तरह का होता है।

पुरुषों के कंडोम की 6 बातें

  1. यह 98% तक सेफ होता है।
  2. इसमें वाटर बेस्ड लुब्रिकेंट होता है।
  3. काफी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।
  4. ये आसानी से मेडिकल स्टोर पर मिल जाते हैं।
  5. ये महिलाओं के कंडोम के मुकाबले सस्ते होते हैं।
  6. ये अलग-अलग साइज और फ्लेवर के मिलते हैं।

सवाल: क्या कंडोम से कोई नुकसान भी हो सकता है?
जवाब:
जी हां, जिस चीज के फायदे हैं उसके नुकसान भी होते हैं। कुछ पुरुषों की शिकायत रहती है कि कंडोम का इस्तेमाल करने से सेक्स के दौरान उनकी एक्साइटमेंट कम हो जाती है। इसके अलावा गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर वह खराब हो सकता है या फिर फट सकता है। कंडोम में लेटेक्स होता है। कई लोगों को इससे एलर्जी हो सकती है।

चलते-चलते डालते हैं डेटा पर नजर

10 में से 1 पुरुष करते हैं कंडोम यूज, नसबंदी से उन्हें लगता है डर

  • देश में 10 में सिर्फ 1 ही पुरुष कंडोम का इस्तेमाल करते हैं। पुरुष कंडोम का इस्तेमाल नहीं करें तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इससे महिलाओं की जिंदगी में बदलाव आ सकता है। वह प्रेग्नेंट हो सकती हैं, जिससे उनकी बॉडी में काफी बदलाव आते हैं। कई बार अबॉर्शन करवाना ही एकमात्र रास्ता बचता है। जिससे महिलाओं की फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर असर पड़ता है।
  • पुरुषों को नसबंदी के नाम पर शारीरिक कमजोरी, नामर्द होने और ताउम्र के लिए बोझ न उठा पाने या फिर किसी बीमारी की चपेट में आने का खौफ सताने लगता है।
  • नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS) के मुताबिक, फैमिली प्लानिंग करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है। 10 में से 4 महिलाएं अनवांटेड प्रेग्नेंसी से बचने के लिए नसबंदी करवाती हैं, जबकि नसबंदी कराने वाले पुरुषों की संख्या न के बराबर है।