जरूरत की खबर:प्रेग्नेंट महिलाएं कोरोना का सॉफ्ट टारगेट, प्रीमैच्योर डिलीवरी और बच्चे को सीरियस कॉम्प्लिकेशन्स का खतरा, ऐसे बचें

2 महीने पहलेलेखक: अलिशा सिन्हा

30 साल की सौम्या पिछले साल मां बनने वाली थीं। यह बच्चा काफी मन्नतों और इलाज के बाद आने वाला था। अप्रैल 2021, कोरोना की दूसरी लहर से सभी टेंशन में थे। वह भी प्रिकॉशन ले रही थीं, लेकिन मई आते-आते कोरोना संक्रमित हो गईं। प्रेग्नेंसी में वैक्सीन लेने से भी मना कर दिया था और जुलाई में ही उन्होंने बेटे को जन्म दे दिया।

प्रीटर्म बर्थ की वजह से बच्चे को सांस लेने में दिक्‍कत हो रही थी, वजन कम था, दूध पीने में दिक्‍कत आ रही थी। आज बच्चा पहले से ठीक है पर नॉर्मल बच्चों के मुकाबले कमजोर है।

कोरोना के मामले पूरे देश में लगातार बढ़ रहे हैं। इस बीच नई रिसर्च में दावा किया गया कि प्रेग्नेंसी के दौरान कोरोना संक्रमण होने से बच्चा समय से पहले पैदा (प्रीटर्म बर्थ) हो सकता है। AIIMS के डॉक्टर प्रदीप भट्टाचार्य से जानते हैं इस मामले से जुड़ी जरूरी बातें-

प्रीटर्म बर्थ क्या होती है?
प्रीटर्म बर्थ को ही प्री-मैच्योर डिलीवरी कहते हैं। यह वह स्थिति है, जब बच्चे का जन्म तय ड्यू डेट से काफी पहले हो जाता है।

प्रीटर्म बर्थ से बच्चे को क्या परेशानी हो सकती है?
बच्चे को भविष्य में गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं, जो आजीवन चल सकती हैं।

कोरोना संक्रमित महिलाओं में भी प्री-मैच्योर डिलीवरी के मामले देखे जा रहे हैं।
कोरोना संक्रमित महिलाओं में भी प्री-मैच्योर डिलीवरी के मामले देखे जा रहे हैं।

प्रीटर्म बर्थ की गंभीरता को देखते हुए एक्सपर्ट की सलाह है कि प्रेग्नेंट महिला का कोरोना संक्रमण से बचना जरूरी है।

कितने महीने की प्रेग्नेंसी में प्रीटर्म बर्थ का खतरा ज्यादा होता है?

डॉक्टर प्रदीप भट्टाचार्य के अनुसार…

  • प्रेग्नेंट महिलाओं को 3 और 6 महीने तक वायरल इंफेक्शन और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
  • 6 महीने के अंदर अगर किसी प्रेग्नेंट महिला को खतरा ज्यादा है तो उसका अबॉर्शन हो सकता है, लेकिन उसके बाद खतरा होने पर अबॉर्शन नहीं किया जा सकता है।

क्या कोरोना संक्रमित सभी प्रेग्नेंट महिलाओं को ICU में भर्ती होने का खतरा है?
ऐसा नहीं है, ICU में भर्ती होने का खतरा उम्र और हाई ब्लड प्रेशर जैसी कोमोर्बिडिटी पर भी निर्भर करता है। यानी जिन प्रेग्नेंट महिलाओं की उम्र ज्यादा है या फिर उन्हें हाई ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी कोई बीमारी है। उन्हें ICU में भर्ती होने का खतरा ज्यादा है।

कोरोना संक्रमित प्रेग्नेंट महिलाओं में ICU में भर्ती होने का खतरा कैसे कम किया जा सकता है?
अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, प्रेग्नेंसी के पहले या उसके दौरान वैक्सीन लगवाने से कोरोना से बचा जा सकता है। अगर कोई प्रेग्नेंट महिला वैक्सीन नहीं लगवाती है तो गर्भ में बच्चे के विकास से जुड़ी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए समय पर वैक्सीन लेना और कोरोना से जुड़ी सारी सावधानियों को फॉलो करना जरूरी है।

क्या कोरोना संक्रमित प्रेग्नेंट महिला से बच्चे पर भी बुरा असर पड़ता है?
सेंटर फॉर डिजीज एंड प्रिवेंशन (CDC) के मेडिकल एपिडेमियोलॉजिस्ट केट वुडवर्थ के अनुसार, एक रिसर्च में इस बात का पता चला है कि कोरोना संक्रमित महिलाओं से जन्म लेने वाले बच्चों का संक्रमित होना असामान्य बात है, यानी जरूरी नहीं कि बच्चा भी संक्रमित हो।

प्रीटर्म बर्थ पर हालिया रिसर्च

  • जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (JAMA) में पब्लिश एक रिसर्च के अनुसार प्रेग्नेंसी के दौरान कोरोना होने पर महिलाओं को अस्पताल और ICU में भर्ती होने का खतरा ज्यादा होता है।
  • कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया (UBC) की स्टडी कहती है कि प्रेग्नेंसी में कोरोना होने के कारण बच्चे का जन्म समय से पहले हो सकता है, यानी डिलीवरी प्री-टर्म हो सकती है।

WHO के अनुसार

  • भारत में हर साल 100 में से 13 बच्चे प्री-मैच्योर जन्म लेते हैं।
  • दुनियाभर में 1.5 करोड़ बच्चों का जन्म सालाना समय से पहले होता है।
  • दुनियाभर में हर साल करीब 10 लाख बच्चों की मौत प्रीटर्म बर्थ की वजह से होती है।