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रिश्तों की अहमियत जानिए:कोरोना टाइम में रिश्ते और मजबूत हुए, 2020 में पैरेंट्स ने बच्चों से 4 जरूरी बातें सीखीं

4 महीने पहले
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क्रिस्टीना कैरोन. कोरोना महामारी दुनिया में 17 लाख लोगों की जिंदगी छीन चुकी है। अब तक 8 करोड़ से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। जान गंवाने वालों में लाखों की संख्या में पैरेंट्स और बच्चे भी हैं। इस सबसे इतर एक अच्छी बात भी सामने आई है। वो यह है कि कोरोना के दौर में बच्चों और पेरेंट्स के बीच रिश्ते मजबूत हुए। इनके बीच इमोशनल अटैचमेंट और बढ़ा है।

मूवी नाइट, वीडियो गेम खेलना और क्वालिटी टाइम बिताना अच्छा लगा

अमेरिका की रहने वाली 7 साल की सेरेना कहती हैं कि मेरे लिए 2020 अच्छा साल रहा। सेरेना की ये बात हर किसी को हैरान कर सकती है। सेरेना की मां हेली पेलाडीनो को भी बेटी जैसा ही फील हुआ। उनका कहना है कि 2020 थकावट दूर करने वाला साल रहा। मेरी फैमिली ने पहली बार थैंक्स गिविंग हॉलिडे ग्रैंड पेरेंट्स और कजिन के बिना सेलिब्रेट किया था।

हालांकि हेली कहती हैं कि कोरोना की वजह से स्कूल बंद रहे। बच्चों के लिए रिमोट लर्निंग एक्सपीरियंस अच्छा नहीं रहा। समर कैंप कैंसिल हो गए। खुद का प्ले-राइटिंग करियर होल्ड पर है। इस लिहाज से तो साल बहुत अच्छा कतई नहीं रहा।

2020 में क्या अच्छा रहा? इसका जवाब देते हुए सेरेना कहती हैं कि फैमिली के साथ मूवी नाइट, भाई के साथ वीडियो गेम खेलना और पिता के साथ क्वालिटी टाइम बिताना। यह सब 2020 में मेरे लिए अच्छा रहा।

बेटी की बात सुनकर पेलाडीनो कहती हैं कि समस्याओं के बीच परिवार के साथ रहना बहुत पसंद आया। मेरे दादाजी हमेशा बोलते थे कि हम अपनी तकदीर खुद तय करते हैं। अब बेटी ने मुझे सिखाया कि हमें अपनी भलाई खुद करना चाहिए।

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सबसे मुश्किल साल रहा

पेलाडीनो जैसे कुछ और पैरेंट्स से भी इस बारे में बात की गई। उनसे पूछा गया कि महामारी के दौरान क्या सीखा? इनमें वो फैमिली हैं, जिन्हें बेसिक जरुरतों के लिए जूझना नहीं पड़ा। वे आराम से वर्क फ्रॉम होम कर सके। सभी परिवारों के लिए ये सबसे मुश्किल साल रहा है। लेकिन, इसके बावजूद बच्चों और पेरेंट्स के रिश्ते मजबूत हुए हैं।

कोरोना के दौर में ऐसी 4 बातें जो पेरेंट्स ने बच्चों से सीखीं-

1. जिन चीजों पर बस नहीं, उन्हें लेकर परेशान न हों

  • लेरिसा ली के पति की कोरोना से मौत हो गई। बच्चों ने दुख से बाहर निकलने में उनकी मदद की। उन्होंने बच्चों से सीखा कि जिन चीजों पर अपना बस नहीं होता, उन्हें लेकर ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए।
  • लेरिसा कहती हैं कि इस बार मैं थैंक्स गिविंग डे सेलिब्रेट नहीं करना चाहती थीं, लेकिन बच्चों के कहने पर सेलिब्रेट किया। इस दौरान मैंने बच्चों के साथ कार्ड, बोर्ड गेम खेले।अच्छा म्यूजिक सुना और एक साथ मिलकर खाना बनाकर खाया।
  • क्लेयर ओब्रेन कहते हैं कि उनकी बेटी एलिन ने सिखाया कि किसी के दिन को अच्छा बनाने में मदद करने से पॉजीटिव फील होता है। ऐसा करने से मुझे अकेलापन महसूस नहीं होता। मेरी बेटी पिछले साल एंजाइटी से जूझ रही थीं। लेकिन, अब वह म्यूजिक के जरिए लोगों की मदद कर रही है।

2. बच्चे ईमानदारी को सरहाते हैं

  • 38 साल की ऐना थॉम्पसन को इस साल पहला पैनिक अटैक आया। इसके बाद से उन्हें और ज्यादा तनाव होने लगा। पैनिक अटैक आया, तो उन्होंने अपने बच्चों को इस बारे में बताया। फिर उन्होंने नोटिस किया कि बच्चों के सामने खुलकर बात करने से वह नॉर्मल फील करती हैं। फिलहाल थॉम्पसन एक चाइल्ड केयर सेंटर चला रही हैं। इस सेंटर को उनके बच्चे संभाल रहे हैं। थॉम्पसन कहती हैं कि बच्चे काम संभाल लेंगे, ऐसा मुझे यकीन नहीं था। लेकिन, अब मेरा भ्रम टूट गया।
  • मेगन शी कहती हैं कि उनके बच्चे भी ईमानदारी को सरहाते हैं। वे हर जानकारी हासिल करना चाहते हैं, जो महामारी के दौरान मैंने महसूस किया। मैंने दो हफ्ते के लॉकडाउन में बच्चों से कोरोना पर बात की। 6 महीने तक लाइफ-डेथ, नस्लवाद जैसे टॉपिक पर बात की।
  • मेगन ने कोरोना के बाद घर से काम करना शुरु किया। ऐसे में वे बच्चों से ज्यादा बात नहीं कर पाती थीं। मार्च में एक बिजनेस ट्रिप से लौटने के बाद उन्हें फील हुआ कि अगर लाइफस्टाइल में चेंज नहीं किया, तो बच्चों को समझ नहीं पाएंगी।

3. बच्चों में सीखने का तरीका हमेशा एक जैसा नहीं होता

  • लौरा मैरी कोलमेन कहती हैं कि वर्चुअल लर्निंग में उनके दोनों बच्चों को बहुत ज्यादा मुश्किलें आईं। दोनों की उम्र 11 और 13 साल है। उन्हें डायलेक्सिया है। इसके बावजूद वे टीचर से पर्सनली बात करने लगे।
  • एरिका बैकर कहती हैं कि मेरी फेमिली मुश्किल वक्त में थी। बच्चे ऑनलाइन क्लास कर रहे थे। स्कूल दोबारा शुरु हुए तो बच्चों में चेंज आया। 9 साल का सबसे छोटा बच्चा लोगों के साथ घुलने-मिलने लगा। 15 साल का बेटा लोगों को इंटरटेन करने लगा। 16 साल का बेटा जो अभी 11वीं क्लास में है, वह अपने गोल को लेकर सीरियस रहने लगा। इससे मुझे समझ आया कि बच्चों को पीयर ग्रुप, टीचर और स्कूल की जरूरत होती है। वर्चुअल क्लास अटेंड करना स्कूल जाने जैसा बिल्कुल नहीं है।
  • कैटरीना डोनोवान कहती हैं कि मेरा 9 साल का बेटा अपनी फीलिंग कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। उसे ऑनलाइन लर्निंग में कई चैलेंज आ रहे थे। लेकिन, अब स्कूल जाने से वह बिल्कुल सही है। हालांकि, सोशल इंटरेक्शन कम रखने से बच्चे में एंजाइटी की समस्या नॉर्मल रहती है। पिता के साथ बास्केटबॉल खेलने से उसके एग्रेशन में कमी आई है।

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4. बच्चों को कम करके नहीं आंकना चाहिए

  • कैरेना पोमरेंटज कहतीं हैं कि मुझे कोरोना के दौर में अपने दोनों बच्चों को इंटरटेन करने की जरूरत नहीं पड़ी। पहले पति बच्चों को घुमाने ले जाने में प्रेशर महसूस करते थे। लेकिन, अब लॉकडाउन होने से बच्चे घर में ही खेलते हैं। एक दिन तो उन्होंने टॉयलेट पेपर रोल को कलर कर डाला। उसे मोती और पंखों से डेकोरेट किया। ड्राइंग्स बनाकर टीवी रूम की दीवार पर सजाईं।

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