डिलीवरी बॉय ने जबरदस्ती Kiss किया:कहा- अंकल जैसा हूं; समझिए इनसे सामान लेते वक्त बच्चे और महिलाएं रखें किन बातों का ख्याल

6 दिन पहलेलेखक: अलिशा सिन्हा

महाराष्ट्र के पुणे में इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने वाली एक लड़की ने जोमैटो से खाना ऑर्डर किया। ऑर्डर डंजो ऐप के साथ इंटरचेंज हो गया। रात में तकरीबन 9:30 बजे फूड डिलीवरी बॉय खाना लेकर आया। बातों-बातों में 42 साल के रईस शेख ने लड़की से एक बार पानी मांगा और उसके पेरेंट्स के बारे में पूछा।

लड़की ने बताया वो दोस्तों के साथ रहती है। रईस ने दोबारा पानी मांगा, लड़की पानी के लिए मुड़ी, तो उसने पीछे से पकड़ के जबरदस्ती उसे Kiss कर लिया। विरोध करने पर वो पीछे हटा और जाते-जाते कहा कि वह उसके अंकल के जैसा है। अगर उसे कभी भी किसी तरह की मदद की जरूरत पड़े तो वह बेझिझक उसे बोल सकती है। थोड़ी देर बाद उसने लड़की को वॉट्सऐप पर मैसेज करना शुरू कर दिया। इसके बाद लड़की ने पुलिस से शिकायत कर दी।

चलिए अब कर लेते हैं आपके काम की बात-

आज जरूरत की खबर में हमारे एक्सपर्ट हैं- DoorPar India private limited के मैनेजिंग डायरेक्टर शुभांकर बुजाड़े, भोपाल के किड्स केयर थैरेपी सेंटर की रिहैब साइकोलॉजिस्ट सीमा राठौर और फैमिली एंड क्रिमिनल लॉ एक्सपर्ट एडवोकेट सचिन नायक

सबसे पहले नीचे दिए ग्राफिक्स को पढ़ें-

सवाल- डिलीवरी बॉय से कस्टमर अपना कॉन्टैक्ट कैसे सुरक्षित रखें, ताकि वो प्रोडक्ट डिलीवर करने के बाद उन्हें फालतू मैसेज या कॉल न कर सकें?
शुभांकर बुजाड़े-
जब आप कोई प्रोडक्ट या फूड ऑर्डर करते हैं, तब आपका नंबर डायरेक्ट डिलीवरी बॉय के पास नहीं जाता है। उसके पास कंपनी का नंबर होता है, जिसके थ्रू वो आपको यानी कस्टमर को कॉल कर सकता है।

अब आप सोच रहे होंगे कि जब आप डिलीवरी बॉय को कॉल करते हैं, तब तो उससे डायरेक्ट बात हो जाती है, तो फिर ये कैसे होता है। दरअसल, जब आप डिलीवरी बॉय को कॉल करते हैं, तो पहले आपका कॉल कंपनी को जाता है फिर कंपनी डिलीवरी बॉय को कनेक्ट करती है और आपकी बात डिलीवरी बॉय से हो जाती है।

कई बार घर में मौजूद बच्चे डिलीवरी बॉय से सामान पिक करते हैं, क्योंकि हो सकता है कि मां किचन में हों और पिता किसी दूसरे काम में व्यस्त। ऐसी सिचुएशन में हमें बच्चों को पहले से ऐसी ट्रेनिंग देनी चाहिए ताकि बच्चे समझ सकें कि उनकी सेफ्टी कैसे हो सकती है। इसके लिए नीचे दिए क्रिएटिव को पढ़ें-

नोट- ऊपर ग्राफिक में लिखें टिप्स को महिलाएं भी फॉलो कर सकती हैं।

सवाल- अगर डिलीवरी बॉय किसी बच्चे, महिला या लड़की के साथ मिसबिहेव करता है, तो उसके खिलाफ क्या एक्शन लिया जा सकता है?

एडवोकेट सचिन नायक- बच्चा है, तो उसके पेरेंट्स और लड़की या महिला खुद पुलिस स्टेशन जाकर उसके खिलाफ केस दर्ज कराएं। पूरा मामला बताने पर पुलिस FIR दर्ज करेगी और मामले की जांच करके आरोपी को जेल भेज देगी। अगर आरोपी जेल से छूट जाता है और आप आगे भी लड़ना चाहते हैं, तो कोर्ट में आरोपी की बेल कैंसिल करवाने के लिए एक एप्लिकेशन लगवा सकते हैं।

मौजूदा मामले में पुलिस के अनुसार, लड़की एक दोस्त के साथ थाने गई और शिकायत दर्ज की। टीम ने उसी रात आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। अगले दिन अदालत ने उसे जमानत दे दी, क्योंकि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। आरोपी पर धारा 354 और 354ए के तहत यौन उत्पीड़न का आरोप है।

सवाल- मौजूदा मामले में आरोपी को अगले ही दिन जमानत मिल गई। ऐसे में अगर वो उसी लड़की को या किसी दूसरी लड़की को परेशान करता है, तब लड़की क्या कर सकती है?
एडवोकेट सचिन नायक-
उसी लड़की को अगर वो परेशान करता है, तब लड़की को दोबारा पुलिस में कम्प्लेन करनी होगी। डिलीवरी बॉय का बेल खारिज करवाने के लिए एक एप्लिकेशन कोर्ट में और दूसरा पुलिस स्टेशन में देना होगा।

किसी दूसरी लड़की के साथ ऐसा होता है, तो वो इस लड़की की तरह पुलिस में कम्प्लेन कर सकती है। अगर उसे ये पता हो कि इस डिलीवरी बॉय ने पहले भी किसी लड़की के साथ मिसबिहेव किया है, तब लड़की को पुलिस में ये बात बोलनी चाहिए कि इसने पहले भी एक लड़की के साथ ऐसा ही किया था। कोर्ट में भी बोले कि- ये इंसान समाज के लिए सही नहीं है, इसको जेल में ही रखा जाए।

सवाल- IPC की धारा 354 और 354ए क्या है?
एडवोकेट सचिन नायक-

354- लड़की के अभिमान को ठेस पहुंचाने पर ये धारा आरोपी पर लगती है। जैसे- उसके शरीर को गलत तरीके से देखना, उसे अनकम्फर्टेबल फील कराना। इसमें 1-5 साल तक की सजा दी जा सकती है।

354ए- ये यौन उत्पीड़न के लिए लगाई जाने वाली धारा है। अगर लड़की की इजाजत के बिना आप उससे फिजिकल कॉन्टैक्ट बनाने की कोशिश करते हैं या उसे इसके लिए ऑफर करते हैं और उसे पोर्नोग्राफी दिखाते हैं, तब ऐसी हरकतें अपराध मानी जाएंगी। इसमें 3 साल तक की सजा हो सकती है।

चलते-चलते
मिसबिहेव करने वाले के खिलाफ कंपनी की तरफ से क्या किया जाता है?

शुभांकर बुजाड़े-

  • पहले दोनों पक्षों की बात सुनी जाती है।
  • पूरा मामला जानने की कोशिश करते हैं।
  • क्रास वेरिफाई का प्रोसेस भी होता है।
  • अगर कस्टमर सही है और डिलीवरी बॉय गलत, तो एक्शन लिया जाता है।
  • उस डिलीवरी बॉय को नौकरी से निकाल दिया जाता है।
  • अगर उसके खिलाफ पुलिस कम्प्लेन है, तो कंपनी जांच में पुलिस का पूरा साथ देती है।
  • अगर कस्टमर इस पूर मामले में गलत पाया जाता है, तो हम उसे सॉरी बोलकर मामला खत्म कर देते हैं, उसके खिलाफ कोई कम्प्लेन नहीं करते हैं।

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