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सोशल एंग्जाइटी से पाएं छुटकारा:क्वारैंटाइन में सोशल एंग्जाइटी बढ़ रही है, वजह सामजिक दूरी; निजात पाने के 4 तरीके

6 दिन पहले
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जेनी टैटिज. दुनिया में कोरोना की तीसरी लहर आ चुकी है और अपने पीक पर भी है। जो लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं, उन्हें क्वारैंटाइन होना पड़ रहा है। अमेरिकी डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के मरीज समाज से कट गए हैं। किसी तरह का डायरेक्ट संपर्क नहीं हो पा रहा है। यह उनके स्ट्रेस की सबसे बड़ी वजह है।

कोरोना के मरीज इसे लेकर काफी असहज हैं कि कोरोना के बाद होने वाले लंबे ब्रेक से उनका रहन-सहन पहले से काफी अलग हो जाएगा। कोरोना होने के बाद अपराइट्स सिटीजन ब्रिज में टीचर ऑस्कर मोंटोयो ने पाया कि अब उनका रहन-सहन आम नहीं रहा। यह उनके तनाव की सबसे बड़ी वजह बनी।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, समाज से अलग हो जाने से होने वाला यह तनाव सोशल एंग्जाइटी में भी बदल सकता है। यह आपके पॉजिटिव इमोशन को कम कर सकता है। इसके चलते आपको अकेलापन भी महसूस हो सकता है। साथ ही मानसिक तौर पर आपको और भी समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन इसमें भी अच्छी खबर यह कि आप खुद ऐसी समस्याओं से निजात पा सकते हैं।

क्वारैंटाइन के दौरान मानसिक तनाव और सोशल एंग्जाइटी से निजात पाने के 4 तरीके

1: खुद को रिलैक्स करने पर करें फोकस

अगर आप अपनी सामाजिक मौजूदगी और संबंधों को लेकर चिंता कर रहे हैं तो आप खुद को मानसिक तौर पर काफी कमजोर कर रहे हैं। इससे बचने के लिए कुछ प्लान करना या अपने किसी काम जैसे- बिजनेस का हिसाब-किताब और टैक्स के बारे में सोचना भी एक गलत तरीका है।

बस ऐसा कुछ करने पर फोकस करना चाहिए, जिससे आपको मानसिक तौर पर आराम मिल सके। आप अच्छा, पॉजिटिव और रिलैक्स महसूस कर सकें।

2: नेगेटिविटी को फिल्टर करें

आमतौर पर हमारे जहन में कई तरह की चीजें होती हैं। नेगेटिव और पॉजिटिव चीजों से हमें हर रोज गुजरना होता है, लेकिन जब हम कुछ सोच रहे होते हैं तो हमारी फीलिंग्स मिक्स होने के बजाए या तो पॉजिटिव होती हैं या नेगेटिव।

निर्भर करता है कि हमारा मूड कैसा है। जब हम खुश होते हैं तो पॉजिटिव सोचते हैं और जब दुखी होते हैं तो नेगेटिव।

3: फोकस को शिफ्ट करें

जब हम बहुत ज्यादा परेशान और तनाव में होते हैं तो कई-कई घंटों तक एक ही बात सोचते रहते हैं। ये घंटे दिन में, दिन हफ्तों में और हफ्ते महीनों में भी बदल जाते हैं। क्वारैंटाइन के दौरान भी इस तरह के तनाव का सामना कर रहे मरीजों के कई मामले सामने आ चुके हैं।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक हो रहे तनाव को 'डीप स्ट्रेस' कहा जाता है। इसका सबसे खतरनाक पहलू यह है कि डीप स्ट्रेस की स्टेज से नॉर्मल मानसिक स्टेज में वापस आने में कई दिन लग जाते हैं। अगर मरीज वापस नहीं आ पाया तो एंग्जाइटी काफी बढ़ जाती है, जो डिप्रेशन का कारण भी बन सकती है।

4: खुद को एक्सप्लोर करें

क्वारैंटाइन में यह देखा गया कि लोग सामाजिक दूरी के अलावा खुद के करियर, काम और बिजनेस को लेकर तनाव ले रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर आप खुद से जुड़े कामों में खुद को उलझाए रखेंगे तो, तनाव स्वाभाविक तौर पर होगा। क्वारैंटाइन में आप खुद को अपने काम से अलग कर यह एक्सप्लोर करें कि आप और क्या कर सकते हैं। यह तरीका भी अमेरिकी डॉक्टरों ने अपनाया, जो कारगर साबित हुआ।

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