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स्टीम और गार्गल के साइड इफेक्ट!:कोरोना संक्रमित के स्टीम लेने या गरारे करने से हवा में वायरस के पार्टिकल आ सकते हैं? जानिए इस दावे का सच

4 महीने पहले

कोरोना के बढ़ते प्रकोप ने आम आदमी समेत पूरे प्रशासन की नाक में दम करके रख दिया है। वायरस संक्रमण के मामलों के साथ मृत्यु दर में भी इजाफा देखने को मिल रहा है। ऐसे में बीते साल की तरह ही इस साल भी सोशल मीडिया पर स्टीम लेने और गार्गल करने को लेकर एक वीडियो वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर डॉ. तुषार शाह का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो के मुताबिक 'जब कोरोना संक्रमित गरारे करते हैं या स्टीम लेते हैं, तो वे हवा में वायरस के पार्टिकल छोड़ते हैं।'

डॉ. तुषार शाह कहते हैं कि 'ये पार्टिकल कई मीटर की दूरी तय कर सकते हैं और हवा में कई घंटों तक जिंदा रह सकते हैं। इनडोर और परिवार के दूसरे लोगों में कोरोना वायरस फैलने की यह सबसे बड़ी वजह है।'

स्टीम लेने से हवा में रिलीज नहीं होता वायरस का कोई पार्टिकल
जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट के असिस्टेंट चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर के शनमुगम ने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि 'कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति के गरारे करने या स्टीम लेने से हवा में वायरस पार्टिकल रिलीज नहीं होते। जरूरी है कि संक्रमित व्यक्ति आइसोलेट रहे और अपने परिवार के लोगों से पूरी तरह दूर रहे।'

खांसी या छींक में ड्रॉपलेट के साथ निकलते हैं वायरस
खांसी या छींक में ड्रॉपलेट के साथ वायरस निकलते हैं और संक्रमण फैलाते हैं। बड़ी ड्रॉपलेट सेकेंड से मिनट में हवा से बाहर निकल जाती हैं, लेकिन छोटी ड्रॉपलेट और एयरोसोल मिनट से घंटे तक हवा में रह सकते हैं। एयरोसोल और ड्रॉपलेट्स कोरोना वायरस के फैलने के प्रमुख कारण हैं।

संक्रमित व्यक्ति के ड्रॉपलेट्स हवा में दो मीटर तक जा सकते हैं, जबकि एयरोसोल उन ड्रॉपलेट्स को 10 मीटर तक आगे बढ़ा सकता है और संक्रमण का खतरा पैदा कर सकता है। यहां तक कि एक संक्रमित व्यक्ति जिसमें कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं, वह 'वायरल लोड' बनाने लायक पर्याप्त ड्रॉपलेट्स छोड़ सकता है जो कई अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है।

स्टीम लेना और गरारे करना कोरोना का इलाज नहीं
फोर्टिस हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी के डायरेक्टर डॉक्टर विकास मौर्या ने अपने एक इंटरव्यू में स्टीम और गरारे करने से वायरस फैलने की बात को पूरी तरह से गलत बताया है।

डॉक्टर का कहना है कि' आमतौर पर गले की खराश और बंद नाक में स्टीम और गार्गल मदद करते हैं, लेकिन यह कोरोना का इलाज नहीं है। नीम, अदरक और तुलसी डालकर भी स्टीम लेना कोरोना का इलाज नहीं है। यह उपाय करके कोरोना संक्रमित को आराम मिल सकता है, लेकिन इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।'

सीडीसी और WHO भी स्टीम थेरेपी से कोरोना इलाज की पुष्टि नहीं करते
कुछ लोग यह सलाह भी दे रहे हैं कि आप 15 से 20 मिनट तक या जितनी देर ले सकते हैं, उतनी देर स्टीम लें, लेकिन न तो सीडीसी और न ही WHO ने इस बात की पुष्टि की है कि स्टीम थेरेपी कोरोना वायरस का इलाज है। सीडीसी का कहना है कि स्टीम लेना कोरोना के समय जोखिम भरा भी हो सकता है।

सीडीसी ने यह भी कहा है कि अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिसके आधार पर यह कहा जाए कि स्टीम लेने का उपाय कोरोना का अंत कर सकता है। सीडीसी का मानना है कि स्टीम लेने की वजह से व्यक्ति जल सकता है या किसी प्रकार की इंजरी भी हो सकती है।

ज्यादा स्टीम लेना फेफड़े और एयरवे के लिए खतरनाक हो सकता है
टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉ. बेंजामिन नीमन का कहना है कि फेफड़े नाजुक होते हैं और स्टीम लेने से फेफड़े और एयरवे को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए स्टीम लेते वक्त सावधानी रखने की बहुत ज्यादा जरूरत है।

डॉक्टर एक दिन में जितनी बार और जितनी देर तक स्टीम लेने की सलाह दें, सिर्फ उतनी देर तक ही स्टीम लें।