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फेक न्यूज पहचानें:बुजुर्गों को बीमारी के साथ गलत जानकारी का जोखिम भी ज्यादा, गलत खबरों के खिलाफ चल रहे वेबिनार और क्लासेज में हो सकते हैं शामिल

3 महीने पहले
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  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक, खबरों की केवल हेडलाइन न पढ़ें, शेयर या कमेंट करने से पहले जुटाएं पूरी जानकारी
  • ऑनलाइन क्लासेज में सोर्स को पहचानने, सत्यता का पता करने, फैक्ट चैकिंग जैसे सब्जेक्ट्स की सीख दी जा रही है

एमी यी. कोरोनावायरस के मामले में हेल्थ एजेंसी और एक्सपर्ट्स हमें बचने के तरीके बता रहे हैं, लेकिन अभी भी सुरक्षा को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। ऐसे में इंटरनेट पर मिलने वाली गलत जानकारी हमें मुश्किल में डाल सकती है। खासतौर से हाई रिस्क जोन वाले बुजुर्गों के लिए सही और भरोसेमंद जानकारी बेहद जरूरी है।

एएआरपी में प्रोग्राम्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जीन सेट्जफैंड कहते हैं, "जब भी कहीं ज्यादा कन्फ्यूजन होता है तो गलत जानकारियां बढ़ जाती हैं। खासतौर से कोविड के मामले में अगर आपके पास गलत जानकारी आए तो इसके नतीजे बहुत ही खतरनाक हो सकते हैं।"

हालांकि, अब बुजुर्गों को गलत जानकारियों के बारे में जानकारी देने के लिए एएआरपी और नॉन प्रॉफिट मीडिया संस्था पॉइंटर इंस्टीट्यूट के तैयार किए प्रोग्राम "मीडियावाइज फॉर सीनियर्स" और सीनियर प्लेनेट से फ्री क्लासेज "हाउ टू स्पॉट फेक न्यूज" से ऑनलाइन वेबिनार्स, क्लासेज और वीडियो मौजूद हैं।

क्या है सीनियर प्लेनेट का "हाउ टू स्पॉट फेक न्यूज"
सीनियर प्लेनेट का एक घंटे का ऑनलाइन सेशन इंटरनेट पर "डीप फेक" वीडियो समेत अलग-अलग गलत जानकारियों, फर्जी एडवरटाइजमेंट और मनगढ़ंत खबरों के बारे में जानकारी देता है। जूम पर उपलब्ध इस वर्कशॉप में कई सब्जेक्ट्स पर बात की जाती है। क्लास का शेड्यूल एक हफ्ते पहले सीनियर प्लेनेट की वेबसाइट पर पोस्ट कर दिया जाता है। यहां पर जुड़ने के लिए रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है।

सीनियर प्लेनेट क्लास में आप सवाल भी पूछ सकते हैं। बीते महीने एक सेशन के दौरान एक व्यक्ति ने सवाल किया कि ट्रैंडिंग में चल रही चीज का मतलब क्या होता है? क्या उसे ज्यादा लोगों ने पढ़ा या वो ज्यादा सच्ची है? फरवरी में सीनियर प्लेनेट की क्लास में शामिल लोग इस बात को नहीं जानते थे कि गलत जानकारी कितनी फैलती है।

एक महिला को मैसेज आया कि सांस रोकने से कोविड 19 का पता चल सकता है। इसके बाद महिला ने इस मैसेज को फॉरवर्ड कर दिया। क्लास में सिखाने वाली प्रोग्राम मैनेजर ब्री क्लार्क ने कहा, "उन्होंने पाया कि वे उसे एक बार शेयर करने के बाद संपादित नहीं कर सकती थीं।"

गलत जानकारी के बारे में पता करने और शेयरिंग से बचने में मीडिया हाउस के बारे में पता करना भी एक तरीका है। आकलन करें कि क्या खबर एक जाने-माने मीडिया हाउस ने दी है, तारीख देखें, लेखक का नाम देखें। चैक करें कि वेबसाइट के आखिर में क्या लिखा है। जैसे- .gov, .edu, .org या .com। इस क्लास में यूजर फैक्ट चैकिंग के बारे में भी सीख सकते हैं।

कैसे जुड़ें: सीनियर प्लेनेट

मीडियावाइज फॉर सीनियर्स
एएआरपी और पॉइंटर के इस प्रोग्राम में प्रैक्टिकल टिप्स के साथ ऑनलाइन सेमिनार, क्लास होती हैं। इसकी शुरुआत अगस्त में 30 मिनट के वेबिनार और वर्चुअल टाउन हॉल के साथ हुई थी। इसे होस्ट सीएनएन की चीफ मेडिकल संवाददाता डॉक्टर संजय गुप्ता ने किया था। संस्था के मुताबिक, पहले सेशन के लिए करीब 41 हजार लोगों ने साइन-अप किया था। एएआरपी अपने आगामी ईवेंट्स की जानकारी वेबसाइट पर पोस्ट करती है।

टाउनहॉल में दी गई टिप्स में दी गई जानकारियों में कंटेट का सोर्स, केवल हेडलाइन न पढ़ना, एक से ज्यादा सोर्स से जानकारी लेना शामिल था। वेबिनार में सेट्जफैंड ने बताया कि कैसे सोशल मीडिया लोगों के गुस्से और डर जैसे इमोशन का फायदा उठाता है। वे कमेंट और शेयर करने से पहले रुकने और थोड़ी फेक्ट चैकिंग की सलाह देती हैं। इसके अलावा प्रोग्राम में यह भी बताया गया कि सोशल मीडिया और सर्च इंजन काम कैसे करते हैं।

कोविड 19 को लेकर दी जा रही जानकारी में अपनी गाइडलाइंस में पॉइंटर ने सनसनीखेज हेडलाइंस से बचने की सलाह दी है। इस तरह की हेडलाइन लो क्वालिटी क्लिकबेट स्टोरीज की निशानी होती हैं। इसके अलावा जिन लेखकों को आप नहीं जानते, उनके बारे में ऑनलाइन चैकिंग करने, हाइपरलिंक्स पर क्लिक कर आधिकारिक सोर्स पर पहुंचने और मतलब समझने की सलाह भी दी गईं। मीडियावाइज फॉर सीनियर्स 24 सितंबर से 15 अक्टूबर तक मुफ्त चार पार्ट का ऑनलाइन कोर्स पेश करेगा। रजिस्टर करने की आखिरी तारीख सोमवार है।

कैसे जुड़ें: पॉइंटर

एएआरपी फ्रॉडवॉच
ऑनलाइन गलत जानकारी ऑनलाइन फ्रॉड के साथ आती है। स्कैम करने वाले हर उम्र के लोगों को अपना निशाना बनाते हैं, लेकिन बुजुर्गों को फ्रॉड का खतरा ज्यादा होता है। महामारी के दौरान धोखेबाजों ने कोविड 19 की फर्जी दवा, कॉन्टेक्ट ट्रैसिंग के नाम पर लोगों की निजी और आर्थिक जानकारी लेने की कोशिश की है।

एएआरपी की वेबासाइट पर नए कोविड 19 फ्रॉड समेत फिशिंग और धोखेबाजी जैसी कई जानकारी मौजूद है। इसके साथ ही संदिग्ध मेल को खोलने और इसमें आईं लिंक्स के संबंध में भी टिप्स दी गई हैं। ज्यादा जानकारी के लिए लोग एएआरपी के धोखेबाजी को लेकर बनाए गए न्यूजलैटर को भी साइन अप कर सकते हैं।

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