राजू श्रीवास्तव की तीसरी बार हुई एंजियोप्लास्टी:इससे दोबारा हार्ट अटैक आने का खतरा होता है कम, पर तनाव से दूर रहना है जरूरी

3 महीने पहलेलेखक: एकता सिन्हा

कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को जिम में अचानक हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद वो अस्पताल में भर्ती हैं। राजू पहले से हार्ट पेशेंट हैं। पहले ही उन्हें 9 स्टेंट्स लग चुके हैं।

दो बार एंजियोप्लास्टी हुई थी। आज से दस साल पहले कोकिलाबेन धीरूबेन अंबानी अस्पताल में पहली बार राजू की एंजियोप्लास्टी हुई थी। उसके कुछ साल बाद मुंबई के लीलावती अस्पताल में दूसरी बार एंजियोप्लास्टी हुई। अब तीसरी बार एम्स, दिल्ली में उनकी एंजियोप्लास्टी हुई है।

एंजियोप्लास्टी आखिर होती क्या है? इसे क्यों और कब कराया जाता है। क्या इसकी जरूरत किसी भी आम इंसान को पड़ सकती है। चलिए समझते हैं।

आज की स्टोरी के लिए हमने बात की है- डॉ. निलेश गौतम, कार्डियोलॉजी, एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबई और डॉ. बालकृष्ण श्रीवास्तव, कार्डियोलॉजिस्ट, भोपाल से

सवाल 1– एंजियोप्लास्टी क्या होती है?
जवाब-
यह एक सर्जिकल प्रोसेस है। हार्ट की धमनियां यानी आर्टरी ब्लॉक हाेने पर उसे एंजियोप्लास्टी कर खोला जाता है। हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, हार्ट अटैक आने पर 1 से डेढ़ घंटे के बीच एंजियोप्लास्टी की जानी चाहिए, क्योंकि जितनी जल्दी एंजियोप्लास्टी होगी, उतना ही हार्ट की मांसपेशियों को नुकसान कम होगा। किसी इंसान की जान बचाई जा सकती है।

‘सोसायटी फॉर कार्डियोवस्क्युलर एंजियोग्राफी एंड इंटरवेंशन्स’ की रिपोर्ट की मानें तो, हार्ट अटैक की वजह से सांस में तकलीफ या छाती में दर्द के वक्त भी एंजियोप्लास्टी राहत देती है।

इससे ब्लड क्लॉट और हार्ट अटैक का खतरा भी कम हो सकता है। ये तीन तरह से की जा सकती है। बैलून एंजियोप्लास्टी, लेजर एंजियोप्लास्टी और अथेरेक्टॉमी एंजियोप्लास्टी।

सवाल 2- क्या एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी एक ही चीज है या उसमें अंतर है?
जवाब-
एंजियोग्राफी एक प्रकार का टेस्ट है, जो यह जानने के लिए किया जाता है कि आर्टरी में कोई ब्लॉकेज तो नहीं है, जबकि एंजियोप्लास्टी इलाज यानी ट्रीटमेंट, इसमें नली से एक तार डालते हैं, जिसे स्टेंट कहते हैं। इसका आकार, बाल जितना बारीक होता है।

सवाल 3- सर्जरी के बाद पेशेंट को किस तरह का प्रिकॉशन लेना चाहिए?
जवाब-
ऐसे पेशेंट को नॉर्मल लाइफ जीते हुए अपना खास ख्याल रखना चाहिए। कहने का मतलब यह है कि वे अपनी बीमारी को लेकर स्ट्रेस यानी तनाव न लें, लेकिन सावधानी भी बरतें। जैसे– एंजियोप्लास्टी के बाद उन्हें हेल्दी डाइट लेना चाहिए। सोडियम, कोलेस्ट्रॉल ट्रांस-फैट, सैचुरेटेड फैट्स जैसी चीजों को खाने से बचना चाहिए। पेशेंट को कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर कंट्रोल करना चाहिए। योग और मेडिटेशन करना चाहिए।

सवाल 4– एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी में कितना खर्च आता है?
जवाब-
एंजियोग्राफी करने में 10 से 12 हजार तक का खर्च आता है। वहीं एंजियोप्लास्टी करने में 5 लाख तक का खर्च आता है। स्टेंट कौन-सा लग रहा है, कितनी आर्टरी में लग रहा है और कितना बड़ा लग रहा है, इन सभी बातों के आधार पर खर्च बढ़ता-घटता है।

सवाल 5– हार्ट में जब स्‍टेंट डलता है तो किस तरह का बदलाव आता है?
जवाब-
इसके बाद पेशेंट की हार्ट बीट अन‍ियम‍ित हो सकती है। उसे हार्ट मसल्‍स से जुड़ी बीमार‍ियां भी हो सकती हैं। इसलिए स्टेंट डालने के बाद रेगुलर चेकअप करवाते रहना चाहिए। एंज‍ियोप्‍लास्‍टी के मरीज की उम्र अगर ज्‍यादा है तो उसके शरीर में कमजोरी आ सकती है।

चलते-चलते

नीचे लिखे लक्षण दिखाई दें, तो हार्ट अटैक न समझें, डॉक्टर के पास जाएं

डॉ. बाल कृष्ण श्रीवास्तव कहते हैं कि यूट्यूब देख-देखकर पेशेंट साइको एनालिसिस खुद करने लगे हैं। अक्सर पेशेंट सीने में दर्द के साथ आते हैं और खुद ही कहते हैं डॉक्टर साहब देखें, मुझे हार्ट अटैक आया है। डॉक्टर के पास समय से जाना सही फैसला है, लेकिन जांच के बाद डॉक्टर को ही तय करने दें कि आपकी परेशानी की वजह क्या है। इसलिए गहरी सांस लेने में दर्द हाे, सीने को दबाने में दर्द हाे या फिर करवट बदलने में दर्द हो रहा है, तो उसे हार्ट अटैक न समझें। डॉक्टर से सलाह लें।

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