18% महंगे हुए किराए के घर:रेंट पर रहते हैं तो GST के नए नियम को समझिए, किन्हें देना होगा टैक्स और किन लोगों को मिलेगी छूट

3 महीने पहलेलेखक: अलिशा सिन्हा

किराए पर रहने वालों को GST देना होगा कि नहीं, सरकार ने इसको लेकर कुछ नियम बनाए हैं। जून में हुई बैठक में GST नियमों में कई बदलाव किए गए थे। ये बदलाव 18 जुलाई से लागू हो गए हैं।

इसके पहले 13 जुलाई को एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था। तब ये बात लोगों के बीच साफ नहीं हो पाई थी कि कब और किस सिचुएशन में किराएदार को GST देना होगा।

अब हम आपको इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब बता रहे हैं। आइए एक-एक करके जानते हैं...

सवाल: GST क्या होता है?
जवाब:
GST यानी Goods And Services Tax. हिन्दी में इसका मतलब होता है- वस्तु एवं सेवा कर। किसी सामान को खरीदने या किसी सर्विस को खरीदने पर GST चुकाना पड़ता है। भारत में GST 1 जुलाई 2017 से लागू है।

सवाल: कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि सभी किरायेदारों को हाउस रेंट, यानी किराए में रहने के दौरान 18% GST देना होगा, क्या ये सही बात है?
जवाब:
PIB यानी प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेकिंग आर्म ने इस बात को लेकर एक ट्वीट किया है। इसमें कहा गया है कि इस तरह की खबरें गलत हैं। लोगों को इसके जरिए गुमराह करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कुछ सिचुएशन में किरायदारों को GST देना होगा। नीचे ट्वीट के बाद ग्राफिक्स में पढ़ें-

सवाल: अगर मकान मालिक GST रजिस्टर्ड नहीं है और वो अपना मकान किराए पर किसी GST रजिस्टर्ड को देता है, तो नियम क्या कहता है?
जवाब:
नए नियमों के मुताबिक अनरजिस्टर्ड व्यक्ति यानी नौकरी करने वाला या छोटा कारोबारी अपना मकान GST के तहत किसी रजिस्टर्ड व्यक्ति (मान लीजिए किसी कंपनी) को देता है, तो किराए पर GST लगेगा। मतलब साफ है कि रिवर्स मैकेनिज्म के तहत किराएदार को किराए पर 18 फीसदी GST देना होगा।

ध्यान रखें: टैक्स रूल्स के मुताबिक व्यक्ति का मतलब सिर्फ कोई इंडिविजुअल इंसान नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा टर्म है और इसमें कंपनियों के साथ-साथ सभी लीगल एंटिटी भी शामिल हैं।

कई मामलों में देखा गया है कि, इससे भी कम टर्नओवर वाले लोगों ने GST रजिस्ट्रेशन कराया है। इसकी वजह यह है कि इससे उनके क्लाइंट या कस्टमर सप्लाई चेन में इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकते हैं।

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये इनपुट टैक्स क्रेडिट क्या है। चलिए ये भी समझ लते हैं। दरअसल, GST में इनपुट टैक्स क्रेडिट का मतलब ऐसे सिस्टम से है, जिसमें आपको पहले कहीं चुकाए गए GST के बदले क्रेडिट मिल जाता है।

यानी अगर बाद में कभी आपको GST चुकाने की जरूरत पड़ती भी है, तो पैसों के बदले, आप इन क्रेडिट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन क्रेडिट की मदद से टैक्स कम हो जाता है। एक प्रोडक्ट के बिजनेस पर आपको बार-बार टैक्स चुकाने का बोझ नहीं झेलना पड़ता है।

सवाल: अगर मकान मालिक और किराएदार दोनों ही GST रजिस्टर्ड नहीं हैं, तो फिर किराए पर GST का यह नियम लागू होगा या नहीं?
जवाब:
इस मामले में किराए पर GST का नया नियम लागू नहीं होगा।

सवाल: कोई कंपनी अपने किसी कर्मचारी के लिए कोई फ्लैट किराए पर लेती है और मकान मालिक GST रजिस्टर्ड नहीं है, ऐसे में क्या GST देना होगा?
जवाब:
अगर कर्मचारी किराए के फ्लैट में रहता है और कंपनी उसके पूरे किराए का भुगतान नहीं करती है, तो किराए पर GST नहीं लगेगा।

चलते-चलते

नए नियम में किराए के अलावा किन-किन चीजों पर GST लगता है-

  • प्रीपैकेज्ड, लेबल्ड अनाज, दाल और आटे को पहली बार GST के दायरे में लाया गया है। खुले में इनकी बिक्री पर कोई GST नहीं लगेगा।
  • डेकोरेशन, बैंड बाजा, फोटो-वीडियो, शादी के कार्ड, घोड़ा-बग्घी, ब्यूटी पार्लर और लाइटिंग पर भी 18% GST लगता है।
  • शादी के लिए खरीदे जाने वाले कपड़ों और फुटवियर पर 5 से 12 फीसदी GST लगता है।
  • गोल्ड ज्वैलरी पर 3 फीसदी GST लगता है। 3 लाख की ज्वैलरी खरीदने पर 6 हजार रुपए GST के रूप में देना होगा।
  • बस-टैक्सी सर्विस पर भी 5 फीसदी GST लगता है।
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