जरूरत की खबर:गर्मी में दाद-खाज खुजली क्यों बढ़ती है? जानिए इसका कारण, इलाज और बचने के उपाय

2 महीने पहले

दाद, खाज, खुजली को ही फंगल इंफेक्शन कहते हैं। ठंड के मौसम में सर्दी-खांसी, गर्मी में फंगल इंफेक्शन और बारिश में वायरल फीवर। ये मौसमी बीमारियां जरूर हैं, लेकिन ये आपकी डेली लाइफ को काफी इफेक्ट करती हैं। इन दिनों ज्यादतर शहरों का टेंपरेचर 42 से 45 के बीच है। वहीं, उमस भरे गर्मी के इस मौसम में लोग फंगल इंफेक्शन से भी परेशान हैं। स्किन स्पेशलिस्ट का कहना है कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जाती है, दाद-खाज, खुजली और चर्म रोगों से परेशान मरीजों की संख्या भी बढ़ जाती है।

आज जरूरत की खबर में डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. प्रेरणा शर्मा से जानते हैं फंगल इंफेक्शन से जुड़ी A टू Z बातें…

सवाल- गर्मी में फंगल इंफेक्शन ज्यादा क्यों होता है?

जवाब- गर्मी में फंगल इंफेक्शन का कारण पसीना है। पसीने की वजह से ही आपके शरीर में फंगस (बैक्टीरिया से पनपता है) को जगह मिलती है। दरअसल फंगस को शरीर में फैलने के लिए नमी की जरूरत होती है। गर्मी में शरीर के कई हिस्सों में पसीना आता है और नमी बनी रहती है। ऐसी ही जगहों पर फंगस जल्दी फैलता है और इंफेक्शन बढ़ने लगता है।

बारिश में भी फंगल इंफेक्शन की समस्या बनी रहती है। ऐसे मौसम में लोग ऑफिस या बाहर जाते वक्त कई बार भीग जाते हैं और ज्यादा देर तक गीले कपड़े पहने रहते हैं। ऐसे में भी फंगस को नमी मिल जाती है और वो फैलने लगता है।

सवाल- आसपास कोई डर्मेटोलॉजिस्ट नहीं है तो क्या करें?

जवाब- अगर आप कोई गांव या कस्बे में रहते हैं और आपके आसपास कोई स्किन रिलेटेड डॉक्टर यानी डर्मेटोलॉजिस्ट नहीं है तो ऐसी स्थिति में किसी फिजिशियन को दिखाएं। आप एंटी फंगस ट्यूब का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन यह उपाय भी टेंपरेरी है। आप जल्द से जल्द शहर जाकर किसी अच्छे डर्मेटोलॉजिस्ट से इलाज जरूर करा लें, क्योंकि बिना सही इलाज परेशानी बढ़ सकती है।

फंगल इंफेक्शन हो जाए तो क्या करें?

  • डॉक्टर ने जो क्रीम या लोशन बताया है, वहीं लगाएं।
  • स्टेरॉयड क्रीम का इस्तेमाल करने से बचें।
  • इस पर घरेलू उपचार बिल्कुल न करें।

पर्सनल हाइजीन का भी ध्यान रखें

बगल यानी आर्मपिट्स को साफ करना न भूलें। अगर पसीना अधिक आता है तो इसकी साफ-सफाई जरूरी है। ऐसा नहीं करने से बैक्टीरिया अधिक पनपेंगे, बदबू भी अधिक आएगी और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाएगा।

सवाल- फंगल इंफेक्शन कितने तरह के होते हैं?

जवाब- यह कई रूप में आपके शरीर में मौजूद रह सकता है। यहां मैं कुछ तरह का जिक्र कर रही हूं, जिससे आम तौर से लोग परेशान रहते हैं।

एथलीट फुट या पैरों में दाद की समस्या: इस समस्या से पुरुष ज्यादतर परेशान होते हैं। इसमें फंगल गर्म और नम वातावरण में पनपता है। यानी यह जूते, मोजे, स्वीमिंग पूल जैसी जगहों में तेजी से बढ़ता है।

दाद: यह फंगल इंफेक्शन का कॉमन रूप है। इसे रिंग वर्म कहते हैं। यह आपके सिर की स्किन, जांघ, पैर किसी भी हिस्से में हो सकता है। इसमें सबसे पहले एक लाल, पपड़ीदार पैच या गांठ होता है, जो खुजली करता है। समय के साथ, एक रिंग या सर्कल के आकार के पैच में बदल जाती है। इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

नाखून में फंगस: इसकी शुरुआत नाखून के टिप से होती है। शुरुआत में सफेद या पीले रंग के स्पॉट दिखते हैं। जैसे-जैसे इंफेक्शन बढ़ता है, नाखून का रंग बदरंग होने लगता है। नाखून मोटा हो जाता है और किनारे से उखड़ने या टूटने लगता है। पैरों के नाखूनों में यह समस्या ज्यादा होती है।

जांघों में खुजली होना: इस इंफेक्शन को जोक इच या टीनिया क्रूरिस कहा जाता है। यह प्रॉब्लम भी पुरुषों में ज्यादा देखी जाती है। यह शरीर के उन हिस्सों में फैलता है, जहां पसीना ज्यादा आता है। इसलिए जांघों के अलावा यह इंफेक्शन प्राइवेट पार्ट, हिप्स और आर्मपिट्स में भी होता है।

सवाल- क्या फंगल इंफेक्शन का पता किसी टेस्ट से किया जा सकता है?

जवाब– हां बिल्कुल। डॉक्टर स्किन टेस्ट कर ही पता लगाते हैं कि आपको किस तरह का फंगल इंफेक्शन है और उसका इलाज क्या है। इस टेस्ट के लिए जिस जगह पर इंफेक्शन हुआ है, वहां की पपड़ी, नाखून की कतरन या फिर बाल के नमूने लेकर इंफेक्शन का पता लगाते हैं। ब्लड टेस्ट से पता लगाया जा सकता है कि इंफेक्शन क्यों हुआ है?