जरूरत की खबर:पत्नियों को आसानी से लेने हैं कानूनी फायदे, तो कटरीना-विक्की की तरह कराना होगा अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन

10 महीने पहले

कोर्ट मैरिज और कोर्ट में शादी को रजिस्टर करवाना, ये दोनों ही अलग-अलग बातें हैं। कुछ लोग इसे लेकर कन्फ्यूज रहते हैं। भारतीय परम्परा के अनुसार अगर कोई कपल शादी कर लेता है तो क्या यह जरूरी है कि वो अपनी शादी रजिस्टर करवाए? इसके क्या फायदे और नुकसान हो सकते हैं...

इन 2 कपल की शादी से इस बात को समझने की कोशिश कर सकते हैं-

कटरीना कैफ और विक्की कौशल
कटरीना और विक्की ने 9 दिसंबर 2021 को राजस्थान में शादी की थी और 19 मार्च 2022 को मुंबई के कोर्ट में अपनी शादी रजिस्टर करवा ली। कुछ रिपोर्ट्स में ये लाइन लिखी गई कि- कटरीना और विक्की अब लीगली मैरिड हो चुके हैं। इसकी वजह एडवोकेट अविनाश गोयल बताते हैं। वे कहते हैं कि शादी चाहे इंटरकास्ट हो, इंटररिलीजन हो या विदेशी नागरिक से हो। हर स्थिति में मैरिज रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है। चूंकि, कटरीना भारतीय नागरिक नहीं है। इसलिए उनका रजिस्ट्रेशन तो ज्यादा जरूरी था।

सुप्रीम कोर्ट में वकील अनिल के. सिंह श्रीनेत कहते हैं कि कटरीना वीजा लेकर भारत में 17 साल से रह रही हैं। भारत में रहकर काम करने के लिए वह अपना वर्किंग वीजा रिन्यू करा सकती हैं। भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के नियमों के मुताबिक, उन्हें यहां की नागरिकता लेने के लिए किसी भारतीय से शादी करने के बाद कम से कम 7 साल तक भारत में रहना अनिवार्य होगा।

नुसरत जहां और निखिल जैन
एक्टर और पॉलिटिशियन नुसरत जहां और बिजनेसमैन निखिल जैन की शादी का मामला याद तो है न। 2019 में दोनों ने शादी की थी। डेस्टिनेशन वेडिंग थी। मीडिया में चर्चा भी खूब हुई थी। इसी तरह कुछ ही दिनों के बाद इनके अलग होने की चर्चा हुई। खबर आई कि बिना तलाक नुसरत जहां पति से अलग हो गई। मामला काेर्ट तक जा पहुंचा।

कोर्ट में क्या हुई बात

  • निखिल जैन ने दावा किया था कि दोनों पति-पत्नी की तरह रह रहे थे।
  • नुसरत जहां ने कहा कि 2019 में जो शादी तुर्की में हुई वह भारत में गैरकानूनी है।

इसे लेकर कोलकाता कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि दोनों की शादी लीगल नहीं है। यानी भारतीय कानून के हिसाब से मान्य नहीं है।

…चूंकि शादी भारत में रजिस्टर्ड नहीं हुई थी
निखिल और नुसरत की शादी इंटर रिलीजन थी। भारत में दोनों अगर यह शादी करते तो उन्हें इसे स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत करनी होती, जो नहीं हुई। चूंकि इनकी शादी तुर्की के कानून के हिसाब हुई थी और भारत में जब दो अलग धर्म के लोग शादी करते हैं तो उसे रजिस्टर्ड करवाना जरूरी होता है। इसलिए उनके रिश्ते को लिव-इन रिलेशनशिप माना गया और ऐसे में तलाक लेने की कोई जरूरत ही नहीं पड़ी।

एडवोकेट अविनाश गोयल के मुताबिक भारत में दो अलग-अलग धर्मों के लोगों को कोर्ट मैरिज करना जरूरी होता है। ऐसे में कोर्ट से उन्हें शादी का सर्टिफिकेट मिल जाता है। जो इस बात का सबूत होता है कि उनकी शादी भारत में लीगल है।

अब जानते हैं मैरिज रजिस्ट्रेशन से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब। इसके लिए हमने बात की एडवोकेट सचिन नायक और एडवोकेट अविनाश गोयल से।

सवाल- मैरिज रजिस्ट्रेशन क्या होता है?
जवाब-
लोग शादी अरेंज या लव करते हैं। ये बात आपके परिवार, रिश्तेदार, दोस्त और पड़ोसियों को तो पता होती है, लेकिन सरकार को नहीं। उनके पास शादी का कोई सबूत नहीं होता है। इसलिए मैरिज को दस्तावेजों पर रजिस्टर्ड करवाया जाता है। इसे ही मैरिज रजिस्ट्रेशन कहते हैं।

सवाल- मैरिज रजिस्ट्रेशन कानूनन जरूरी है या नहीं?
जवाब-
एडवोकेट अविनाश गोयल के अनुसार, मैरिज रजिस्टर करवाना जरूरी है। ये ऑप्शनल नहीं है। मैरिज रजिस्टर्ड करवाने का तरीका अब काफी आसान हो गया है। ये 2-3 दिन में हो जाता है।

ध्यान देने वाली बात- संवैधानिक तौर पर पत्नी को कुछ कानूनी फायदे दिए गए हैं। इसके लिए उनके पास अपनी शादी का सबूत होना जरूरी है। अगर पत्नी के पास मैरिज सर्टिफिकेट होगा तो उसे आसानी से कानूनी फायदे मिल जाएंगे। अगर नहीं है तो कई परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं। मैरिज सर्टिफिकेट तभी मिलेगा जब आपके शादी का रजिस्ट्रेशन होगा।

अगर आप शादी के 30 दिन के बाद मैरिज रजिस्ट्रेशन करवाते हैं तो आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है। अलग-अलग राज्यों में जुर्माने की राशि भी अलग-अलग है।

सवाल- लड़का या लड़की में से कोई एक विदेशी नागरिक है तो क्या रजिस्ट्रेशन जरूरी है?
जवाब-
एडवोकेट अविनाश गोयल कहते हैं कि शादी चाहे इंटरकास्ट हो, इंटररिलीजन हो या विदेशी नागरिक से हो। हर स्थिति में मैरिज रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है।

सवाल- क्या मैरिज रजिस्ट्रेशन सिर्फ ऑफलाइन होता है?
जवाब-
नहीं, जरूरी नहीं कि आप मैरिज रजिस्ट्रेशन ऑफलाइन करवाएं। आप चाहें तो ऑनलाइन भी रजिस्टर्ड करवा सकते हैं।

ध्यान देने वाली बात- एडवोकेट सचिन नायक के अनुसार, मैरिज रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि बिना रजिस्ट्रेशन की शादी अमान्य है। दोनों ही स्थिति में तलाक की प्रक्रिया कोर्ट के माध्यम से ही मान्य है।

मैरिज सर्टिफिकेट कौन जारी करता है?
हिंदू एक्ट के तहत शादी रजिस्टर कराने के लिए सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के पास आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी किया जा सकता है। नॉर्मल केस में सर्टिफिकेट 7 से 15 दिन के अंदर मिल जाता है। स्पेशल मैरिज एक्ट के केस में सर्टिफिकेट के लिए 30 दिन का इंतजार करना पड़ता है।