जरूरत की खबर:मंदिर-मस्जिद के लाउडस्पीकर ही नहीं, मिक्सी की आवाज भी बहरा कर सकती है, जानिए बचने के उपाय

15 दिन पहलेलेखक: सुनीता सिंह

बीते कुछ दिनों से देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग समुदायों के धार्मिक स्थलों में बजने वाले लाउडस्पीकरों को लेकर चर्चा हो रही है। हर दिन लाउडस्पीकर का जिक्र सुनकर 10 साल की अंशिका अपने टीचर समीप सर से इसके बारे में पूछती है।

दोनों के बीच हुई बातचीत को आप भी पढ़ें, समझें और अपने बच्चों को समझाएं।

यह तो हुई अंशिका और उनके सर के बीच बातचीत। अब ये जानिए कि

किस चीज से आती है कितनी आवाज

  • मंदिर और मस्‍जिद में लगे लाउडस्पीकर– 100 से 120 डेसिबल
  • एरोप्लेन का इंजन टेकऑफ के दौरान– 140 डेसिबल
  • पटाखे– 100 से 110 डेसिबल
  • वाहनों के हॉर्न– 70 से 100 डेसिबल
  • मिक्सी: 80- 90 डेसिबल
  • ट्रैफिक का शोर- 85 डेसिबल
  • जनरेटर (रेजिडेंशियल )- 55 डेसिबल
  • म्यूजिक सिस्टम- 55 डेसिबल

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक इंसान के कान 70 डेसिबल तक की ध्वनि यानी आवाज को झेल सकते हैं। अगर आप हफ्ते में 5 दिन 80 डेसिबल से ज्यादा का शोर 6 से 8 घंटे तक झेल रहे हैं तो आप बहरे भी हो सकते हैं।

क्या हैं सावधानियां

  • अगर शोर तेज है तो ईयर-प्लग का इस्तेमाल करें।
  • अपने आस-पास 'शोर' होने से रोकें।
  • बहुत देर तक ईयर प्लग का इस्तेमाल करना भी गलत है।
  • साल में एक बार डॉक्टर से चेकअप के लिए मिलें।

अब आप समझ गए होंगे कि लाउडस्पीकर के मामले को धर्म से जोड़ना सही नहीं। हम सभी को अपने स्तर पर साउंड या नॉइस पॉल्यूशन को कम करने के प्रयास करने चाहिए। आज से ही छोटे-छोटे प्रयास शुरू कर दें।

अगली कहानी के साथ जल्द मुलाकात होगी। तब तक अपना ख्याल रखें, आसपास खुशियां बांटें।

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