जरूरत की खबर:QR कोड स्कैन करते ही आपका पैसा किसी दूसरे के अकाउंट में भी जा सकता है, जानें ऑनलाइन फ्रॉड से कैसे बचें

6 महीने पहले

लोग डिजिटल पेमेंट के दौर में कैश लेकर चलना पसंद नहीं करते हैं। जहां जाते हैं QR कोड ढूंढते हैं और उसे स्कैन करके पेमेंट कर देते हैं, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि QR Scan करते ही आपके अकाउंट के पैसे गायब भी हो सकते हैं? अगर इस नजरिए से कभी नहीं सोचा है तो आज सोचें जरूर। वरना एक गलती से आपका अकाउंट खाली हो सकता है।

ऑनलाइन फ्रॉड के मामले रोजाना बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि इससे बचने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने कस्टमर्स के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी बैंक ने कस्टमर्स को QR स्कैन के माध्यम से होने वाले फ्रॉड से सावधान रहने और बचने की सलाह दी है।

SBI ने कहा ‘स्कैन या स्कैम’?
SBI ने एक वीडियो जारी किया है। इसमें QR Scan की प्रक्रिया दिखाते हुए सवाल किया है ‘स्कैन या स्कैम’? वीडियो में अनजान QR Code को कभी भी स्कैन न करने की सलाह दी गई है।

SBI ने ट्वीट कर भी बताया कि QR कोड स्कैन करें और पैसे पाएं, ऐसे मैसेज से सावधान रहें। अगर कोई आपको पैसे दिलाने का लालच दे रहा है तो उसके झांसे में न आएं। अनजान फोन नंबर को इंटरटेन न करें। अनजान और अनवेरिफाइड QR कोड स्कैन न करें।

QR Code क्या होता है?
QR कोड यानी क्विक रिस्पॉन्स कोड। यह BAR कोड की तरह एक कोड होता है। इसमें लिखा कुछ नहीं होता है। स्क्वायर होता है। इसमें काले रंग का पैटर्न बना होता है। इस कोड के पीछे URL embedded होता है। जब हम QR Code को अपने मोबाइल से स्कैन करते हैं तब URL embedded के बारे में पता चलता है। यही हमें स्कैन करने के बाद किसी वेबसाइट के URL से कनेक्ट कर देती है। इसके जरिए QR फिशिंग होती है।

QR फिशिंग क्या है?
जो पैटर्न कोड आप QR कोड में देखते हैं उसमें यूजर का अकाउंट रिलेटेड डेटा सेव हो जाता है। जब आप मोबाइल फोन से किसी Code को स्कैन करते हैं तब उसमें सेव डेटा डिजिटल लैंग्वेज में बदल जाता है। इसी का फायदा उठाकर साइबर क्राइम करने वाले लोगों को ठगते हैं। इसे ही QR फिशिंग कहते हैं।

ऐसे चेक करें आपके साथ तो नहीं हुआ फ्रॉड

  • आपके नाम पर कितने लोन अकाउंट हैं, इसे क्रेटिड स्कोर पर चेक कर सकते हैं।
  • क्रेडिट स्कोर चेक करने के लिए क्रेडिट ब्यूरो की सर्विस लेने की जरूरत पड़ती है।
  • आप ट्रांसयूनियन सिबिल, इक्विफैक्स, एक्सपीरियन या CRIF हाई मार्क जैसे ब्यूरो की सर्विस ले सकते हैं।
  • SBI कार्ड, पेटीएम और बैंक बाजार जैसी साइट भी ब्यूरो से साझेदारी कर रिपोर्ट चेक करने की सुविधा देते हैं।
  • डेट ऑफ बर्थ, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, पैन नंबर जैसी कुछ जानकारियां देकर आपका अकाउंट बना सकते हैं और अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं।
  • लॉगिन करके एक्सेस कर सकते हैं कि आपके नाम पर कितने लोन अकाउंट चल रहे हैं।
  • अगर कोई लोन चल रहा है, जिसकी जानकारी आपको नहीं है, तो इसकी शिकायत इनकम टैक्स की वेबसाइट पर कर सकते है।

यह सब पढ़ने के बाद अब आपके मन ये सवाल जरूर आ रहा होगा कि

कैसे जाती है फ्रॉड करने वालों के पास जानकारी?
जब आप कोई ऐप इस्तेमाल करने के लिए उसे इंस्टॉल करते हैं तो सारे नोटिफिकेशन बिना पढ़े अलाउ करते जाते हैं। इसमें आपकी कॉन्टैक्ट डिटेल, गैलरी और लोकेशन की जानकारी होती है। अगर सुविधा के लिहाज से उसको Deny, यानी मना करते हैं तो आप उसके आगे नहीं बढ़ पाते हैं। फ्रॉड करने वाले वहीं से आपका डेटा उठाते हैं।

कई बार लोग भूल जाने के डर से ATM PIN लिखकर ATM का पासवर्ड सेव कर लेते हैं या अन्य डिटेल भी सेव कर लेते हैं, जो सुरक्षा के लिहाज काफी गलत है।

लोन देने वालों के फोन आते हैं तो इसे जरूर पढ़ें

फिनटेक ऐप से फ्रॉड
एक क्लिक पर लोन देने वाली एप्लिकेशन से भी लोग फ्रॉड का शिकार हो रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में ऐप से होने वाले फ्रॉड का मामला सामने आ रहा है। कुछ विवाद फाइनेंशियल सर्विस ऐप Dhani से जुड़े हुए हैं। इसलिए इस तरह के फ्रॉड को हम Dhani ऐप से ही समझते हैं।

यह एक फिनटेक कंपनी है। फिनटेक यानी Financial Technology यानी इसमें हम फाइनेंस की बात टेक्नोलॉजी के माध्यम से करते हैं।

असल में Dhani ऐप के जरिए आप बिना सिक्योरिटी लोन ले सकते हैं। कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं कि जिन लोगों ने लोन इश्यू करवाने के लिए अप्लाई नहीं किया था, उन्हें भी लोन इश्यू कर दिया गया। कई लोगों के साथ ऐसा भी हुआ कि बिना उनकी सहमति से उनके पैन कार्ड पर दूसरों को लोन दिया गया।

कहां कर सकते हैं शिकायत?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ( Home Ministry) ने ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है।
यह नंबर है -155260। फ्रॉड हाेने पर इस नंबर कॉल कर शिकायत दर्ज करवाएं। शिकायत मिलते ही गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला इंडियन साइबर-क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर ( I4C) एक्टिव हो जाता है। यहां से RBI से कंनेक्टेड सभी बैंक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इसकी सूचना पहुंच जाएगी। यह सुविधा फिलहाल छत्तीसगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में अवेलेबल है।

ऊपर लिखे नंबर पर हमने बहुत बार कॉल किया हर बार नॉट रिचेबल गया इसलिए अगर आपका नंबर लग जाए तो ठीक वरना सबसे पहले पास के थाने में FIR दर्ज करवाएं।

चलते-चलते करते हैं ज्ञान की बात

  • QR कोड जापान में डेवलप किया गया था।
  • QR कोड पहली बार 1970 में इस्तेमाल किया गया।