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मां को खोजने के लिए इस बहादुर बेटी ने नहीं की शादी, ऐसे स्ट्रगल कर पाल रही परिवार

आगरा की रहने वाली तब्बसुम की मां फरजाना 2 साल पहले अपने परिवार से बिछड़ गई थी।

Dainik Bhaskar

Mar 10, 2018, 12:38 PM IST
तबस्सुम तबस्सुम

आगरा. आगरा की रहने वाली तबस्सुम की मां फरजाना दो साल पहले परिवार से बिछड़ गई थी। बेटी ने लापता मां को तलाशने के लिए निकाह तक नहीं किया। खुद मजदूरी कर छोटे भाई-बहनों की परवरिश की। इस बीच तमाम मुश्किलें भी सामने आईं, लेकिन उसने हार नहीं मानी। आखिरकार दो साल बाद तबस्सुम अपनी मां को खोजने में कामयाब हो गई। तबस्सुम ने Dainikbhaskar.com से बात की और अपनी आपबीती को बयां किया।

बचपन में ही टूट गया मुसीबतों का पहाड़


- तबस्सुम (20) बताती है, "मेरा जन्म आगरा के स्टेशन रोड पर बर्फ वाली गली में हुआ था।
- पिता सज्जाद हलवाई हैं। मां फरजाना हाउस वाइफ है। घर में तीन बहन और एक भाई है। मैं उनमें सबसे बड़ी हूं।

- पिता ने किसी को भी नहीं पढ़ाया। रोज शराब पीकर घर आते थे और मां के साथ मारपीट करते थे।
- उन्होंने बैंक से 2 लाख का कर्ज ले रखा था। बाद में उसे चुकाने के लिए घर ही बेच दिया। फिर परिवार से अलग हो गए। हम लोग अब किराए के मकान में रहते हैं।"

मजदूरी कर की भाई -बहनों की परवरिश

- "घर बिक जाने और पिता के अलग होने के बाद से मेरी मां के उपर घर की सारी जिम्मेदारियां आ गई। मां ने चार बच्चों की परवरिश करने के लिए आगरा में ही दिहाड़ी मजदूर का काम करना शुरू कर दिया।
- 2016 में एक दिन मां अम्बेडकर पुल के पास काम कर रही थी। वहीं पर कुछ लोग उसे उठाकर मथुरा लेकर चले गए। मां का शोषण किया। उसके बाद उसे वहीं के जंगल में छोड़कर चले गए। सदमा लगने के कारण मां ने मानसिक संतुलन खो दिया।
- वह मथुरा की सड़कों पर घूम-घूमकर भीख मांगने लगी। उस टाइम मेरी शादी होने वाली थी। मां और पिता दोनों ही घर पर नहीं थे।

- मैं भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। इसलिए मेरे उपर ही परिवार की सारी जिम्मेदारियां आ गई। मैंने भाई बहनों की परवरिश करने के लिए अपनी शादी का फैसला टाल दिया।
- मैं एक फैक्ट्री में काम करने लगी। मुझे तब 3 से 4 हजार रूपए महीने सैलरी मिलती थी। मेरा छोटा भाई शानू 13 साल का है। मैंने उसे एक बेसन की फैक्ट्री में काम पर लगा दिया।

- भाई को ढ़ाई हजार रूपए सैलरी मिलती है। दोनों ने एक हजार रूपए में आगरा में ही किराए का मकान ले लिया। इस तरह घर का खर्च चलने लगा।

- दोनों भाई-बहनों को जो सैलरी मिलती थी। उसमें से मैं थोड़े पैसे बचाने लगी। उसके बाद उस पैसे से 5 अप्रैल 2017 को छोटी बहन मुस्कान की शादी आगरा में ही कर दिया।
- बहन अपने ससुराल जा चुकी है। एक छोटी बहन थी। वो अब नानी के घर पर रह रही है। घर पर अब मैं और मेरा एक छोटा भाई बचा है।

- हम दोनों साथ ही किराए के मकान में रहते है। इस बीच मैंने अपनी मां को तलाशने के लिए कोशिश जारी रखी"।

फोटो में बायीं ओर मौसी बीच में फरजाना और सबसे आखिर में तबस्सुम फोटो में बायीं ओर मौसी बीच में फरजाना और सबसे आखिर में तबस्सुम

पिता और पुलिस ने नहीं की मदद


- "मैं आगरा थाने में अपनी लापता मां की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए 2016 में गई थी। मैंने पुलिस को अपनी आपबीती बताया था लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट लिखने से मना कर दिया था। मैं अकेले घर भी संभालती थी और काम से लौटने के बाद मां की फोटो लेकर उसे तलाशने के लिए भी जाती थी।
- मैंने 2 साल तक अपनी मां को काफी तलाशने की। लेकिन मां का पता नहीं चल पाया। मैंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी कोशिश जारी रखी। बाद में मेरे पिता को भी मां के लापता होने की जानकारी किसी के माध्यम से मिली लेकिन उन्होंने ने भी हमारी कोई हेल्प नहीं की। वे हमसे मिलने तक नहीं आए"।

 

सोशल एक्टिविस्ट नरेश पारस तबस्सुम को उसकी मां से मिलाते हुए सोशल एक्टिविस्ट नरेश पारस तबस्सुम को उसकी मां से मिलाते हुए

ऐसे पता चला मां के बारे में


-  "मेरी मां 2 साल से मथुरा की सड़कों पर भिखारी की तरह जिंदगी बिता रही थी। छह महीने पहले आगरा के रहने वाले सोशल एक्टिविस्ट नरेश पारस किसी काम से मथुरा गए हुए थे। उन्होंने मेरी मां को लावारिस हालत में सड़कों पर भीख मांगते हुए देखा था।
- मां ने पूछताछ में उन्हें अपनी आप बीती बयां की थी। उसके बाद से वे मेरी मां को घरवालों से मिलाने के लिए जुट गए। उन्होंने इस काम के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। उनकी फेसबुक और टिवटर पर मेरी मां की फोटो डिटेल के साथ पोस्ट की।
- आगरा के रहने वाले एक शक्स ने नरेश पारस की पोस्ट पढ़ने के बाद मेरी मां को पहचान लिया। उन्होंने उन्हें मेरे घर के बारे में जानकारी दी।

तबस्सुम की मां फरजाना तबस्सुम की मां फरजाना

2 साल बाद इस हाल में मिली मां


- "उसके बाद नरेश पारस ने एक दूसरे शख्स को मेरी मां की फोटो लेकर हमारे पास भेजा। मैंने अपनी मां की फोटो देखकर उसे फौरन पहचान लिया।  
- 6 मार्च को मैं नरेश पारस के बताये गये पते पर पहुंची और वहीं पर मेरी मुलाकात मां से हुई। मां ने मुझें देखते ही पहचान लिया। वह खूब रोई और अपनी आप बीती बताया।

- उस टाइम उसकी हालत पागलों जैसी थी। देखने से लग रहा था जैसे उसने कई दिनों से नहाया नहीं है। उसके बाल खुले हुए थे। शरीर पर उसने गंदे कपड़े पहन रखे थे।

- उसकी बॉडी पर खरोच के निशान थे। उसके बाद मैंने मां को साथ ले जाने का फैसला किया। मैं अपनी मां को साथ लेकर अपने किराये के मकान पर लेकर आ गई।
- मां की दिमागी हालत इस टाइम थोड़ी ठीक नहीं है। मैं उसका इलाज करा रही हूं। वह अब हमारे साथ घर पर ही रहती है।

- पिता को जब मां के मिलने की सूचना किसी के माध्यम से पता चली। उसके बाद वे हमसे मिलने के लिए घर पर आए थे। उस दिन भी उन्होंने शराब पी रखी थी। मां से मिलने के बाद वे चले गए"।

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तबस्सुमतबस्सुम
फोटो में बायीं ओर मौसी बीच में फरजाना और सबसे आखिर में तबस्सुमफोटो में बायीं ओर मौसी बीच में फरजाना और सबसे आखिर में तबस्सुम
सोशल एक्टिविस्ट नरेश पारस तबस्सुम को उसकी मां से मिलाते हुएसोशल एक्टिविस्ट नरेश पारस तबस्सुम को उसकी मां से मिलाते हुए
तबस्सुम की मां फरजानातबस्सुम की मां फरजाना
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