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आगरा में अन्ना हजारे ने भरी हुंकार, बोले- हमें न मोदी चाहिए, न राहुल

अन्ना हजारे ने कहा- आजादी के 70 साल भी देश में लोकतंत्र नहीं आया।

Danik Bhaskar | Dec 12, 2017, 04:38 PM IST
अन्ना हजारे ने कहा-आजादी के 70 स अन्ना हजारे ने कहा-आजादी के 70 स

आगरा. जनलोकपाल आंदोलन की अगुवाई कर रहे समाजसेवी अन्ना हजारे ने ताजनगरी आगरा से हुंकार भरी। किसानों की समस्याओं और जनलोकपाल के मुद्दे पर लोगों को संबोधित कर अन्ना हजारे ने कहा," इस आंदोलन से अब कोई केजरीवाल नहीं आएगा। जिन्होंने मुझे धोखा दिया, उन्हें भी दिल से जोड़े हुए हैं। पहले मोदी जी मेरी बात करते थे, जब किसानों की बात करने लगा, तो उन्हें एलर्जी हो गई। वो मुझसे दूर रहने लगे। लोकपाल के लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों दोषी है। 70 साल बाद नहीं आया लोकतंत्र...

"हमें उद्योगपतियों की सरकार नहीं चाहिए। न मोदी चाहिए, न राहुल। इन दोनों के दिमाग में उद्योगपति बसे हैं। हमें ये दोनों चाहिए। हमें ऐसी सरकार चाहिए, जिसके दिमाग में उद्योगपति नहीं, किसान हो।"

- उन्होंने लोगों से सवाल किया, "आजादी के 70 साल बीत गए। कहां हैं वो लोकतंत्र, जो लोगों के लिए हैं। मनमोहन सरकार ने लोकपाल के ड्राफ्ट को कमजोर कर दिया। हर राज्यों में लोकायुक्त लाने के कानून बदल दिए। मनमोहन शरीफ लगते थे, लेकिन उन्होंने ने भी गड़बड़ कर दी।"


-2014 में आई मोदी सरकार धारा 44 में परिवर्तन कर दूसरा बिल लेकर आ गई। इससे ये बिल और कमजोर हो गया। ऐसे में फिर आंदोलन की जरूरत है। यह आंदोलन 23 मार्च से दिल्ली के रामलीला मैदान में शुरू होगा।


25 साल की उम्र में सुसाइड का आया ख्याल
- समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा, "25 साल की उम्र में मुझे सुसाइड का ख्याल आया था, लेकिन विवेकानंद की किताब मिली और जिंदगी बदल दी। उसके बाद मैंने गांव,समाज और देश सेवा का संकल्प लिया। इसलिए मैंने तय किया कि शादी नहीं करना है। अब 45 साल हो गए घर गए हुए।"


-"मेरे भाई के बच्चों का नाम क्या है, मुझे पता नही। मेरे बैंक एकाउंट की किताब कहां रखी है, मुझे पता नहीं। मंदिर में रहता हूं, सोने को बिस्तर और खाने को एक प्लेट है। मेरे जीवन में आनंद हैं, वो लखपति और करोड़पति के पास भी नहीं हैं।"

पिछली बार कब शुरू हुआ आंदोलन?

- यूपीए सरकार के दौरान अगस्त, 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना 12 दिन तक अनशन पर बैठे थे। इस आंदोलन को देशभर के हजारों लोगों ने सपोर्ट किया था। उनकी मांग थी कि सरकार लोकपाल बिल लागू कर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाए।

आंदोलन का क्या असर हुआ था?

- यूपीए सरकार को लोकपाल बिल के लिए अन्ना हजारे की मांग माननी पड़ी। अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल की अगुआई में बिल के लिए एक कमेटी बनाई गई। इसके बाद सरकार ने लोकपाल बिल पास किया।